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तेल रॉयल्टी विधेयक से खत्म होगा सब्सिडी का लाभ
ज्योति मुकुल / नई दिल्ली February 23, 2017

अगर केंद्र सरकार अपनी दो तेल कंपनियोंं की ओर से असम और गुजरात को 14,715 करोड़ रुपये रॉयल्टी बकाये का भुगतान करती है तो पेट्रोलियम सब्सिडी पर किए गए कम खर्च से हुई बचत का लाभ खत्म हो जाएगा। साथ ही केंद्र सरकार कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) को अपने खाते में से 2,500 करोड़ रुपये रॉयल्टी के भुगतान की जरूरत होगी, जिससे 31 मार्च को समाप्त हो रही तिमाही में उसके प्रदर्शन पर भी असर पड़ेगा। 
 
इस साल सरकार राज्यों को 2,207 करोड़ रुपये से कुछ ज्यादा भुगतान कर रही है, जिससे वित्त वर्ष 16 की तुलना में उसे कम सब्सिडी देने से वित्त वर्ष 17 में हुआ 2,468 करोड़ रुपये फायदा करीब करीब पूरा खत्म हो जाएगा। केंद्र सरकार, दो राज्य सरकारों, ओएनजीसी और ऑयल इंडिया के बीच हुए समझौते के मुताबिक वित्त वर्ष 18 में केंद्र सरकार के खजाने से दो राज्यों को 9,978 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाना है। उस साल सरकार को उम्मीद है कि सरकार 25,000 करोड़ रुपये पेट्रोलियम सब्सिडी के रूप में भुगतान करेगी, जिससे इस साल के पुनरीक्षित अनुमान के मुताबिक 2,531 करोड़ रुपये का फायदा होगा।
 
समझौते के मुताबिक 2008 से शुरू हो रहे 5 साल के लिए रॉयल्टी का भुगतान छूट के पहले के तेल के मूल्य पर होगा। दोनों राज्यों ने इस बात पर जोर दिया था कि रॉयल्टी का भुगतान अंतरराष्ट्रीय दरों के  20 प्रतिशत के हिसाब से किया जाना चाहिए न कि छूट की दर के आधार पर। अधिकारियों ने कहा कि केंद्र, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश को भी रॉयल्टी में अंतर का भुगतान करेगी, हालांकि यह धनराशि बहुत मामूली होगी। 
 
वैश्विक कीमतें कम होने की वजह से पिछली 12 तिमाही से ओएनजीसी और ओआईएल को छूट देने की जरूरत नहीं थी। इसके पहले ओएनजीसी राज्यों को छूट के पूर्व की दरोंं के हिसाब से रॉयल्टी का भुगतान करती थी। नवंबर 2013 में गुजरात उच्च न्यायालय ने दो महीने के भीतर कच्चे तेल पर रॉयल्टी में अंतर के भुगतान का आदेश किया था।  फरवरी 2014 से जून 2015 के बीच ओएनजीसी ने राज्यों को 2,500 करोड़ रुपये भुगतान किए। इस मामले में उच्चतम न्यायालय में आदेश लंबित है। 
Keyword: तेल, रॉयल्टी, विधेयक, सब्सिडी,,
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