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आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल से किसान हो सकते हैं मालामाल
खेती-बाड़ी
सुरिंदर सूद /  February 21, 2017

कम लागत में भी अधिक उत्पादन हासिल करने के लिए किसानों को उन्नत तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल का मंत्र अपनाना चाहिए। यह किसानों की आय बढ़ाने के साथ ही घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में उनकी उपज को भी प्रतिस्पद्र्धी स्तर तक ले जाने में मददगार बनता है। इसके लिए अधिक से अधिक कृषि कार्यों को मशीनीकृत किए जाने की जरूरत है क्योंकि मानवीय स्तर पर उतने बढिय़ा नतीजे नहीं मिल पाते हैं। साथ ही, खेती में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों और मशीनों को अधिक कारगर और कुशल बनाने की भी जरूरत है। लेकिन दुर्भाग्य से भारतीय कृषि जगत में अभी ऐसा कुछ नहीं हो रहा है।

 
दरअसल अधिकांश कृषि उपकरणों का निर्माण छोटे एवं कुटीर स्तर पर बनी इकाइयों में ही होता है जो तय मानकों का पालन करने और अच्छी गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल करने में ढिलाई बरतते हैं। इसके चलते ये कृषि उपकरण खराब डिजाइन और कमतर गुणवत्ता वाले होते हैं। मनचाही सटीकता से कृषि कार्यों को संपादित करने में ये उपकरण नाकाबिल साबित होते हैं। यहां तक कि पानी के पंप, जुताई वाले हल, हेंगा, बीज डालने वाली मशीन, कीटनाशकों का छिड़काव करने वाली मशीन और गहाई वाली मशीनों जैसे अपेक्षाकृत जटिल उपकरणों को भी बनाने में छोटी एवं मझोले स्तर की इकाइयां तय मानकों का ठीक से पालन नहीं करती हैं।
 
वैसे परिष्कृत तकनीक का इस्तेमाल करने वाली बड़ी औद्योगिक इकाइयां आम तौर पर बेहतर गुणवत्ता और क्षमता वाले कृषि उपकरण बनाने में सफल रहती हैं। लेकिन बड़ी इकाइयों में बने उपकरणों की कीमत छोटे स्तर पर बनी मशीनों की तुलना में अधिक होती है। लिहाजा, लोग उन्हें खरीदना कम पसंद करते हैं। असंगठित क्षेत्र के कृषि उपकरणों में गुणवत्ता को लेकर उतनी जागरूकता नहीं देखी जाती है। इसकी एक वजह तो यह है कि सरकारी सब्सिडी के लिए गुणवत्ता वाले उत्पादों की खरीद अनिवार्य नहीं है। कृषि में उन्नत मशीनों की अहमियत से बेखबर किसानों को इस वजह से फसल की कम उपज के रूप में कीमत चुकानी पड़ती है। इसके अलावा दोयम दर्जे के उपकरणों के चलते किसानों को बीज, खाद, कीटनाशक, पानी, बिजली और ईंधन के मदों में अधिक लागत लगानी पड़ती है।
 
अगर उन्नत मशीनों का इस्तेमाल किया जाए तो किसान न केवल अधिक उत्पादकता हासिल कर सकते हैं बल्कि अपना समय, लागत और मेहनत में भी बड़ी बचत कर सकते हैं। वैसे तो हरेक तरह के परिवेश में इनकी अपनी अहमियत है लेकिन बारिश पर आधारित खेती में इनका महत्त्व बढ़ जाता है। असल में बारिश पर निर्भर कृषि में सीमित संसाधनों का किफायती एवं उत्पादक इस्तेमाल ज्यादा जरूरी है। राष्ट्रीय कृषि विज्ञान अकादमी की तरफ से प्रकाशित एक नीतिगत पत्र में कहा गया है कि बेहतर एवं उन्नत कृषि उपकरणों के इस्तेमाल से 20 से लेकर 30 फीसदी समय और श्रम की बचत की जा सकती है। इससे उपज भी 10 से 15 फीसदी बढ़ जाती है। आधुनिक मशीनों के प्रयोग से फसलों की आवृत्ति भी पांच से 10 फीसदी तक बढ़ाई जा सकती है। इसी के साथ खाद-बीज और रसायन पर होने वाला खर्च भी 15 से 20 फीसदी तक कम किया जा सकता है।
 
कृषि गतिविधियों में सिंचाई से जुड़ी मशीनों को उन्नत किया जाना सबसे ज्यादा जरूरी है। दरअसल सिंचाई के सही तरीके और संसाधनों के बारे में किसानों की जागरूकता का स्तर भी कम है। अधिकतर किसानों को यह अहसास ही नहीं होता है कि असमतल जमीन पर सिंचाई करने में समतल जमीन की तुलना में 20 से 25 फीसदी अधिक बिजली लगती है। असमतल खेत में सिंचाई करने से फसल भी बेतरतीब खड़ी होती है। इसका सबसे बुरा असर यह होता है कि खर-पतवार बढ़ जाती है जो उपज पर असर डालती है। इसके अलावा ऐसे खेतों में होने वाली पैदावार की गुणवत्ता भी कमतर होती है।
 
कुटीर उद्योगों और छोटी इकाइयों में बनाए जाने वाले वाटर पंप का प्रदर्शन काफी खराब रहता है। अकादमी के इस शोधपत्र में कहा गया है कि आम तौर पर बिकने वाले वाटर पंप की क्षमता केवल 45 फीसदी ही होती है जबकि कम-से-कम 60 फीसदी की उम्मीद की जाती है। ये पंप सामान्य से अधिक बिजली खपत करते हैं लेकिन कृषि कार्यों में इस्तेमाल होने वाली बिजली पर मिलने वाली भारी सब्सिडी के चलते वे इस पर शायद ही ध्यान देते हैं। लेकिन बिजली के फालतू खर्च को रोकने के लिए हर हाल में कदम उठाने होंगे। कृषि में इस्तेमाल होने वाले वाटर पंप की क्षमता को बेहतर उत्पादन तकनीकों और कुछ कृषि-विज्ञान तकनीकों के माध्यम से सुधारा जा सकता है। इससे बिजली की बचत करने के साथ ही पानी का भी फालतू खर्च रोका जा सकेगा। 
 
खेत को समतल करने के लिए किसानों को लेजर किरणों से लैस भूमि समतलीकरण मशीन का इस्तेमाल करना होगा। इसके अलावा धान, गेहूं, मक्का, मूंगफली और गन्ना फसलों को समतल जमीन की तुलना में थोड़ी उथली जमीन पर उगाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। पानी के अपव्यय को रोकने वाले ऐसे कदमों से फसल की उपज में भी बढ़ोतरी होगी। पूरी सटीकता से पानी का छिड़काव करने वाले तरीकों से सिंचाई करने पर न केवल खर्च में कमी आएगी बल्कि फसल उत्पादकता भी बेहतर होगी। 
 
कृषि में कीटनाशकों का छिड़काव करने वाली मशीनों को भी उन्नत बनाकर खर्चों को कम किया जा सकता है। इन मशीनों में ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि खेत के आकार-प्रकार के आधार पर छिड़काव की मात्रा को समायोजित किया जा सके। लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि न तो किसान और न ही इन मशीनों की निर्माता कंपनियां इतने अहम मसले को लेकर संवेदनशीलता दिखा रही हैं। 
Keyword: agri, आधुनिक मशीन, किसान, कृषि उपकरण,,
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