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छह दिग्गजों ने चुनीं 8 श्रेष्ठ कारोबारी हस्तियां
बीएस संवाददाता / मुंबई 02 20, 2017

बिज़नेस स्टैंडर्ड वार्षिक पुरस्कार

भारतीय उद्योग जगत के शीर्ष निर्णायक मंडल ने चुने बिजऩेस स्टैंडर्ड वार्षिक पुरस्कार के विजेताओं के नाम

इंडिगो एयरलाइंस ने वर्ष 2006 में पहली बार उड़ान भरने के बाद से एक दशक के अपने सफर में भारतीय उड्डयन जगत को कई मायनों में नए सिरे से परिभाषित किया है। उसने साबित कर दिया कि विमानन कारोबार में मुनाफा कमाया जा सकता है। इंडिगो ने भारतीयों को दिखाया कि समय पर उड़ान क्या होती है और हवाई सफर कैसे सुखद अनुभव हो सकता है। इंडिगो एयरलाइंस का संचालन करने वाली कंपनी इंटरग्लोब एविएशन का आईपीओ अक्टूबर 2015 में आया और आज इसका बाजार पूंजीकरण 30,000 करोड़ रुपये है।

आयशर मोटर्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी सिद्धार्थ लाल ने भारत में रॉयल एनफील्ड को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने के बाद लंदन का रुख किया है क्योंकि वह पूरी दुनिया में अपनी छाप छोडऩा चाहते हैं। वर्ष 2000 में 26 साल की उम्र में लाल रॉयल एनफील्ड के मुख्य कार्याधिकारी बने थे जो उस समय अपना अस्तित्व बचाने के लिए संघर्ष कर रही थी। चार साल बाद आयशर मोटर्स के मुख्य संचालन अधिकारी के तौर पर लाल ने अपनी कंपनी के 15 कारोबारों में से 13 में विनिवेश का फैसला किया ताकि रॉयल एनफील्ड और ट्रकों के कारोबार पर पूरा ध्यान केंद्रित किया जा सके। लाल का मानना था कि इन्हीं दो क्षेत्रों में कंपनी ऊंचाइयों पर पहुंच सकती है। उनका यह दांव बेहद कामयाब रहा। आयशर को जबर्दस्त सफलता मिली। आज आयशर का बाजार पूंजीकरण 68,000 करोड़ रुपये है। 

कार बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी के चेयरमैन की अध्यक्षता में जब निर्णायक मंडल (जूरी) बिज़नेस स्टैंडर्ड अवॉर्ड्स फॉर कॉर्पोरेट एक्सीलेंस, 2016 के लिए विजेताओं का फैसला करने बैठा तो वह इंडिगो और लाल की असाधारण उपलब्धियों को नजरअंदाज नहीं कर सका। इस जूरी में एक शीर्ष कंज्यूमर कंपनी, एक दिग्गज निजी इक्विटी, दो जानी मानी प्रबंधन और रणनीतिक सलाहकार फर्मों के प्रमुख तथा एक जाने माने वकील शामिल थे। मारुति सुजुकी के चेयरमैन आर सी भार्गव की अध्यक्षता में जूरी की शुक्रवार को दो घंटे तक चली बैठक में आकार, निरंतरता, नेतृत्व और नवाचार पर ज्यादा जोर रहा।

भार्गव ने कहा, 'पिछले प्रदर्शन का यथार्थपरक विश्लेषण जरूरी है लेकिन व्यापक अनुभव और भारतीय कारोबार जगत की गहरी समझ रखने वाली जूरी की नजर असाधारण उपलब्धि पर थी।' यही कारण था कि लाल को सर्वसम्मति से वर्ष का मुख्य कार्याधिकारी चुना गया जबकि इंडिगो को कंपनी ऑफ द ईयर का खिताब मिला। इंडिगो के संस्थापक राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल हैं जबकि आदित्य घोष इसके अध्यक्ष हैं। इन दो प्रतिष्ठित श्रेणियों में चर्चा के लिए कई नाम आए लेकिन जो बात लाल और इंडिगो के हक में गई, वह थी, नया कारोबारी मॉडल।

बिज़नेस स्टैंडर्ड पुरस्कार के निर्णायक मंडल की सोमवार को मुंबई में हुर्ई बैठक में उपस्थित केकेआर इंडिया एडवाइजर्स के सीईओ संजय नायर, मैकिंजी इंडिया के एमडी नोशिर काका, अमरचंद मंगलदास एडवोकेट्स के एमडी सिरिल श्रॉफ, मारुति सुजूकी के चेयरमैन आर सी भार्गव, मैरिको के चेयरमैन हर्ष मरीवाला और ईवाई इंडिया के सीईओ राजीव मेमानी (बाएं से दाएं)।

फोटो : सूर्यकांत निवाते

जूरी के सदस्य और मैकिंजी के ग्लोबल को-लीडर इन एनालिटिक्स प्रेक्टिस नोशिर काका ने कहा, 'विजेताओं का चुनाव दिग्गज कारोबारियों ने काफी चर्चा के बाद पारदर्शी प्रक्रिया से किया। बिज़नेस स्टैंडर्ड पुरस्कार भारतीय कारोबार जगत में सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में शामिल हैं।' जूरी के अन्य सदस्यों में मैरिको के चेयरमैन हर्ष मरीवाला, केकेआर इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी संजय नायर, ईवाई इंडिया के चेयरमैन और ईवाई की ग्लोबल एमर्जिंग मार्केट्स कमेटी के चेयरमैन राजीव मेमानी और सिरिल अमरचंद मंगलदास के मैनेजिंग पार्टनर सिरिल श्रॉफ शामिल थे। श्रॉफ ने सलाह दी कि कुछ ही दिन पहले रिकॉर्ड 104 उपग्रह छोडऩे वाला भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) भी पुरस्कार का हकदार है। जूरी ने उनके सुझाव पर सहमति जताई और कहा कि इसरो ने देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम में उल्लेखनीय योगदान दिया है और दुनियाभर में भारत का नाम ऊंचा किया है। 

जूरी ने सर्वसम्मति से इसरो को इनोवेटिव ऑर्गेनाइजेशन पुरस्कार के लिए चुना। इसरो ने पिछले साल प्रक्षेपण वाहन, उपग्रह, ऐप्लिकेशन और अंतरिक्ष अन्वेषण में कई अहम उपलब्धियां हासिल कीं। इसरो ने 1975 में रूस की मदद से आर्यभट्ट का प्रक्षेपण किया था और आज वह दूसरे देशों के उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित कर रहा है। विजेताओं का चुनाव मुश्किल था क्योंकि सभी श्रेणियों में कई मजबूत दावेदारों को छांटा गया था। लेकिन छह सदस्यीय जूरी ने चर्चा के हल्के फुल्के माहौल में इसे आसानी से अंजाम दिया। अलबत्ता इस दौरान उन्होंने विजेताओं को गुणवत्ता के ऊंचे मानकों पर परखा और इसमें कोई ढील नहीं दिखाई।

सभी इस बात पर सहमत थे कि विजेताओं के चयन के लिए वित्तीय आंकड़ें जरूरी हैं लेकिन चुनौतियों के समय नवाचार के दम पर संस्थाओं को खड़ा करने वाले लोगों को भी उतनी ही अहमियत दी जानी चाहिए। नायर ने कहा, 'हम नवाचार और कंपनियों द्वारा अपनाए जा रहे नए कारोबारी मॉडल को सम्मानित करना चाहते थे।' जाहिर सी बात है कि जूरी के सदस्यों ने छांटे गए उम्मीदवारों के बारे में विस्तृत जानकारी को खंगाला। बिज़नेस स्टैंडर्ड रिसर्च ब्यूरो ने राजस्व और मुनाफे तथा बाजार पूंजीकरण, कुल मूल्य और पूंजी पर रिटर्न जैसी अन्य वित्तीय मापदंडों के आधार पर उम्मीदवारों को छांटा था।  

बैठक की शुरुआत में भार्गव ने सदस्यों से हर श्रेणी में दो उम्मीदवारों को चुनने को कहा। इसके बाद हर उम्मीदवार की कड़ी जांच पड़ताल हुई। बैठक का एजेंडा लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड विजेता, सीईओ ऑफ द ईयर और कंपनी ऑफ द ईयर के साथ-साथ स्टार पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग, स्टार मल्टीनैशनल कंपनी और स्टार स्मॉल ऐंड मीडियम इंटरप्राइज और बेस्ट स्टार्ट अप का चुनाव करना था।

जूरी ने शॉर्टलिस्ट प्रक्रिया में सॉफ्टवेयर और दवा कंपनियों का दबदबा कम किया और विजेताओं में विनिर्माण कंपनियों उभरकर सामने आईं। जूरी ने कई ऐसे नामों पर चर्चा की जिन्होंने भारत के कॉर्पोरेट इतिहास में अपनी गहरी छाप छोड़ी लेकिन जल्दी ही उसने लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड के लिए आईटीसी के वाई सी देवेश्वर के नाम पर मुहर लगा दी। भार्गव ने कहा, 'हमने फैसला किया कि देवेश्वर को यह अवॉर्ड दिया जाना चाहिए क्योंकि उनके नेतृत्व में आईटीसी ने सिगरेट बनाने वाली कंपनी से अपने कारोबार को विभिन्न क्षेत्रों में फैलाया और इसका होटल तथा एफएमसीजी कारोबार उल्लेखनीय है।'देवेश्वर 1996 में आईटीसी के कार्यकारी अध्यक्ष बने और तबसे कंपनी का राजस्व 10 गुना और कर पूर्व मुनाफा 33 गुना बढ़ा है। कुल शेयरहोल्डर रिटर्न 20 फीसदी की सालाना चक्रवृद्धि दर से बढ़ा है। एफएमसीजी कारोबार में कंपनी ने पिछले एक दशक के दौरान नए क्षेत्रों में दस्तक दी है और आज उसके पास 25 से अधिक मूल ब्रांड हैं जिनका कुल बाजार 12,000 करोड़ रुपये से अधिक का है। 

आईटीसी का गैर सिगरेट बाजार 1996 से 17 गुना बढ़ चुका है और इसका कुल राजस्व 23,000 करोड़ रुपये का है। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली और हार्वर्ड बिज़नेस स्कूल से पढ़ाई करने वाले देवेश्वर 1968 में आईटीसी से जुड़े थे। 1991 से 1994 के बीच वह एयर इंडिया के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक थे। इस महीने की शुरुआत में देवेश्वर आईटीसी के गैर कार्यकारी चेयरमैन बने। उन्होंने अपने पीछे जो कंपनी छोड़ी है वह उससे बहुत अलग है जो उन्हें विरासत में मिली है।

जूरी को सबसे ज्यादा समय स्टार्ट अप ऑफ इ ईयर के चुनाव में लगा। अधिकांश सदस्य इस बात पर सहमत थे कि वे उन कंपनियों को यह अवार्ड देने के हक में नहीं हैं जो नकदी लुटा रही हैं, उपभोक्ताओं के पीछे भाग रही हैं और मुनाफे की कीमत पर राजस्व की बलि दे रही हैं। वे ऐसी कंपनी को वरीयता देना चाहते थे जिसने तकनीक का हटकर इस्तेमाल किया है और जिसकी मौलिक सोच है, न कि जिसने विदेशी मॉडल अपनाया है। 

जूरी ने आखिरकार क्लाउड आधारित कस्टमर सपोर्ट कंपनी फ्रैशडेस्क को इसके लिए चुना। कई छोटी और बड़ी कंपनियां फोन, ईमेल, चैट, वेबसाइट, सोशल नेटवर्क और मोबाइल ऐप के जरिये अपने उपभोक्ताओं तक पहुंचने के लिए फ्रैशडेस्क का इस्तेमाल करती हैं। जूरी को यह बात पंसद आई कि कंपनी का स्थापित मॉडल है और राजस्व वृद्धि तथा मुनाफा मजबूत है।स्टार एमएनसी अवार्ड के लिए कई उम्मीदवार होड़ में थे और जूरी के सदस्य यह पुरस्कार यात्री कार बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी मारुति सुजुकी को देने के हक में थे। जूरी के चेयरमैन आर सी भार्गव ने खुद को इस चर्चा से अलग कर लिया क्योंकि वह खुद मारुति के चेयरमैन हैं। 

राजीव मेमानी ने कहा, 'मारुति ने शुरुआत में 10,000 वाहन बनाए थे लेकिन आज वह 15 लाख वाहन बना रही है। देश में ऐसे कम ही उदाहरण हैं जब किसी कंपनी ने निरंतर अपना दबदबा कायम रखा और एक दशक से अधिक समय तक 50 फीसदी से अधिक बाजार पर अपना कब्जा रखा।' उन्होंने कहा कि देश के विनिर्माण क्षेत्र में मारुति का योगदान सही मायनों में अद्वितीय है। मारुति ने दिसंबर 2016 की तिमाही में राजस्व के मामले में अपनी मूल कंपनी सुजुकी को पीछे छोड़ दिया है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2016 में 15 फीसदी राजस्व वृद्धि और 23 फीसदी शुद्ध लाभ हासिल किया और अपने शेयरधारकों को 30 फीसदी से अधिक वार्षिक रिटर्न दिया। 

जब लघु और मझोले उद्योगों की श्रेणी में स्टार एसएमई अवार्ड की बारी आई तो जूरी ने डॉ लाल पैथलेब्स को चुनने में कोई समय नहीं लगाया। 2,000 करोड़ रुपये से कम राजस्व वाली इस नई श्रेणी में कई कंपनियां पुरस्कार की होड़ में शामिल थीं। नई दिल्ली की डॉ लाल पैथलेब्स दिसंबर 2015 में अपना आईपीओ लाई थी और तबसे उसके शेयर 80 फीसदी तक ऊपर जा चुके हैं। 

मारीवाला ने कहा, 'डॉ लाल को वृद्धि दर, वित्तीय स्थिति, पिछले साल आए आईपीओ की सफलता और शेयरधारकों के लिए लाभ कमाने पर चुना गया। इसने थायरोकेयर और मेट्रोपोलिस जैसी दूसरी कंपनियों को भी रास्ता दिखाया।'जूरी को लगा कि स्टार पीएसयू अवार्ड के चयन के लिए उन्हें वित्तीय परिस्थितियों से परे जाना चाहिए और देश पर कंपनी के असर को देखना चाहिए। कई कंपनियों पर चर्चा के बाद आखिरकार बिजली उत्पादन करने वाली सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनटीपीसी पर बात बनी। देश की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी कोयला आधारित ताप बिजली के अलावा गैस, सौर और जलविद्युत स्रोतों से भी बिजली बना रही है। इस नवरत्न कंपनी की संयंत्र क्षमता लगातार राष्ट्रीय औसत से बेहतर रही है।

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