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आय और खर्च पर नजर, कर अधिकारियों से कैसे जाएंगे बचकर...
तिनेश भसीन /  February 19, 2017

नई और आधुनिक तकनीक की मदद से आयकर विभाग कर चोरों को पकडऩे में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। आय कर अधिकारियों के पास पहले से ही सारी सूचनाएं मौजूद रहती हैं और उन्हीं के आधार पर वह करदाताओं को नोटिस भेजते हैं। कुछ समय पहले तक कर चोरी की धड़पकड़ के लिए समेकित प्रयास नहीं हो पाता था, लेकिन अब कर अधिकारी बिग डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीक का इस्तेमाल कर सभी सूचनाएं जुटा रहे हैं और करदाताओं की आय संबंधी सभी जानकारियां प्राप्त कर लेते हैं। पहले आप अगर घर खरीदते थे और यह खरीदारी आपके आयकर रिटर्न से मेल नहीं खाती थी तो उस स्थिति में आपको पूरी स्थिति समझाने के लिए बुलाया जाता था। इसके बाद आपको आय कर समीक्षा अधिकारी को ऋण कागजात और बचत खाते दिखाने पड़ते थे। अब यही सत्यापन आपकी आय की पूरी छानबीन के साथ किया जाता है।
अब अधिकारी आपकी खरीदारी और खर्च जैस कार, सोना या क्रेडिट कार्ड बिल की पड़ताल करते हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि आपके द्वारा दिखाई गई बचत वाजिब है भी या नहीं।

जमा रकम की पड़ताल तो महज शुरुआत
जांचकर्ताओं के लिए नोटबंदी के दौरान जमा रकम की पड़ताल तो महज शुरुआत है। नांगिया ऐंड कंपनी के निदेशक (डायरेक्ट टेक्सेशन) शैलेश कुमार कहते हैं, 'कर अधिकारियों के पास भरपूर सूचनाएं होती हैं। वे निवेश, जायदाद निवेश, महंगी खरीदारी और क्रेडिट कार्ड से खर्च पर पैनी नजर रखते हैं।' जुटाई गई सभी जानकारियां व्यक्ति के स्थायी खाता संख्या (पैन) से मिलाई जाती हैं। अगर आप जायदाद खरीदते हैं तो यह जानकारी आपके पैन से जुड़ जाती है। इसी तरह, अधिक खर्च और निवेश से जुड़ी जानकारियों भी पैन से जुड़ जाती हैं। संभावित कर चोरी तलाशने के लिए आंकड़े जुटाकर इनका अच्छी तरह विश्लेषण होता है।

नई तकनीक
पिछले साल वित्त मंत्रालय ने प्रोजेक्ट इनसाइट की शुरुआत की थी। इसका क्रियान्वयन शुरू हो चुका है और 2018 तक पूरा हो जाएगा। यह एक टेक्नोलॉजी प्लेटफॉर्म है, जो उपलब्ध सूचनाओं का इस्तेमाल कर चोरों का पता लगाने, स्वैच्छिक कर भुगतान बढ़ाने और कर चोरी रोकने के लिए करता है। एचऐंडआर ब्लॉक इंडिया के प्रमुख (कर शोध) चेतन चांडक कहते हैं, 'इस परियोजना में दो मॉड्यूल-इनकम टैक्स ट्रांजेक्शन एनालिसिस सेंटर (आईएनटीआरएसी) और कंप्लायंस मैनेजमेंट सेंट्रल प्रोसेसिंग सेंटर (सीएमसीपीसी)-हैं।'
आईएनटीआरएसी डेटा इंटीग्रेशन, डेटा प्रोसेसिंग, डेटा क्वालिटी मॉनिटरिंग, डेटा एनालिटिक्सि आदि तकनीकों का इस्तेमाल करता है। ये आय में अनियमितता पकड़ते हैं। अगर आपने 1 करोड़ रुपये मूल्य की जायदाद खरीदी है और अपने रिटर्न में 5 लाख रुपये दिखाए हैं तो इसमें जांच की गुंजाइश स्वत: बन जाती है। आईएनटीआरएसी किसी व्यक्ति के बारे में जानकारियां जुटाने के लिए वेब और सोशल मीडिया का भी इस्तेमाल करता है। अगर आप सोशल मीडिया पर लक्जरी ट्रिप आदि के बारे में पोस्ट करते हैं और आयकर रिटर्न दाखिल नहींं करते हैं तो आयकर विभाग आपकी आय से जुड़ी जानकारियां प्राप्त करने के लिए नोटिस भेज सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इसमें आश्चर्य की बात नहीं अगर कर विभाग ने किसी व्यक्ति या कारोबार के लिए इनकम मॉडल जैसे क्रेडिट ब्यूरो आदि बनाए हैं। अगर किसी व्यक्ति के लेन-देन से जुड़ी पिछली सूचनाएं मौजूद नहीं हैं तो क्रेडिट ब्यूरो उधार लेने वालों के मिलते-जुलते प्रोफाइल देखकर नए कर्जदाता की आय के बारे में पता कर सकते हैं। इसके बाद वे अनियमितता का पता लगाने के लिए घोषित आय अपने अनुमान से मेल कराते हैं, जिससे बैंकों को उधार लेने वाले के प्रोफाइल का पता लगाने में मदद मिलती है।
सीएमसीपीसी शुरुआती सत्यापन, थोक में पत्र या नोटिस सृजित करता है और इनसे जुड़ी चीजों पर नजर रखता है। ऑपरेशन क्लीन मनी के तहत सीएमसीपीसी के नोटिस तहत स्वत: भेजे जाते हैं। नोटिस के जवाब में करदाताओं द्वारा दी गई जानकारी भी स्वत: प्रणाली में दर्ज हो जाएगी और इसका विश्लेषण हो जाएगा। इसके आधार पर आगे की जांच होगी। नोटिस के ऑटोमेशन का मतलब है कि करदाताओं को संबंधित जानकारी मुहैया कराने के लिए समीक्षा अधिकारी के पास जाने की जरूरत नहीं है। इससे कर अधिकारियों पर काम का बोझ भी कम हो गया है। वित्त मंत्रालय ने प्रोजेक्ट इनसाइट को लेकर गोपनीयता बरती है। इसके काम-काज से जुड़ी कोई जानकारी बाहर जाने से रोकने के लिए ऐसा किया गया है। जब मंत्रालय ने कार्यक्रम के लिए निविदा जारी की थी तब बोली में भाग लेने वाली सभी कंपनियों से नॉन-डिस्क्लोजर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कराया गया था।
नोटबंदी के बाद कई तरह की चीजें सामने आई हैं। रद्द हुए 15.4 लाख करोड़ रुपये के नोटों का एक बड़ा हिस्सा आरबीआई के पास वापस आ गया है, जिससे इस आशंका को बल मिला है कि कर चोरों ने गलत तरीके से अपने काले धन को सफेद बना लिया है। कई कारोबारी मालिकों ने जमा नकदी वैध बताने के लिए पिछली तारीख के बिल का इस्तेमाल किया है। लेकिन कर चोरी करने वाले विभिन्न माध्यमों के इस्तेमाल से कर चोरी तो कर रहे थे ,साथ ही इसी क्रम में अधिकारियों को सूचनाएं भी देते जा रहे थे। चूंकि, रकम बैंकिंग प्रणाली में आई है, इसलिए इनका पता आसानी से लगाया जा सकता है। ऐसे लोगों का पता लगाने के लिए विभाग उपलब्ध जानकारियों का इस्तेमाल कर रहा है और विशेषज्ञों का मानना है कि आय कर विभाग से बचना आसान नहीं है। नोटबंदी के दौरान 1.09 करोड़ बैंक खातों में 2 लाख रुपये से 80 लाख रुपये के बीच रकम जमा हुई थी। 80 लाख रुपये से अधिक रकम 1,48,000 खातों में जमा हुई थी।

Keyword: income tax, tax payers,
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