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फंड कर सकेंगे जिंस वायदा में निवेश
दिलीप कुमार झा / मुंबई February 17, 2017

बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) ने कहा है कि महीने भर के भीतर वह म्युचुअल फं डों को जिंस डेरिवेटिव्स में कारोबार की अनुमति दे देगा। सेबी के चेयरमैन यू के सिन्हा ने यहां इंटरनैशनल कमोडिटी डेरिवेटिव्स कॉन्फ्रेंस 2017 में मीडिया के एक सवाल के जवाब में कहा कि म्युचुअल फंड पहले संस्थागत प्रतिभागी होंगे, जिन्हें जिंस डेरिवेटिव्स में कारोबार का मौका मिलेगा और उन्हें महीने भर के भीतर इसकी इजाजत दे दी जाएगी।
 
करीब 40 साल तक ठप रहने के बाद 2003 में जिंसों में वायदा कारोबार दोबारा शुरू हुआ था। उस वक्त जिंस बाजार का नियामक वायदा बाजार आयोग (एफएमसी) था, जो जिंस के लिए संस्थागत कारोबारियों को इजाजत दिलाने की कोशिश करता रहा। विशेषज्ञ अक्सर यह कहते रहे हैं कि कंपनियों की प्रतिभागिता नहीं होने के कारण ही जिंस डेरिवेटिव्स प्लेटफॉर्म से संस्थागत कारोबारी नदारद दिखते हैं। सितंबर 2015 में एफएमसी का विलय सेबी में होने के बाद नियामक ने सुधार के कई कदम उठाए हैं और अब वह जिंस वायदा बाजार में अधिक से अधिक इकाइयों को लाने और इसका आकार बढ़ाने के लिए नई कंपनियां और योजनाएं लाना चाहता है। जो नए प्रतिभागी आएंगे, उनमें म्युचुअल फंड, बैंक और वित्तीय संस्थान (विदेशी संस्थागत निवेशक तथा घरेलू संस्थागत निवेशक) समेत संस्थागत प्रतिभागी शामिल होंगे। सेबी ने पिछले दिनों संकेत दिया था कि जिंस वायदा कारोबार के लिए वह हेज फंडों यानी वैकल्पिक निवेश फंडों को भी अनुमति दे देगा। सेबी बैंकों को जिंस वायदा बाजार में शामिल करने की प्रक्रिया में लगा है। इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से बातचीत भी की जा रही है। सिन्हा ने बताया, 'हमने आरबीआई से दरख्वास्त की है कि जिंस बाजारों में बैंकों की हिस्सेदारी का खुलासा करना आरंभ कर दिया जाए।'
 
जिंस डेरिवेटिव्स में विकल्प कारोबार
 
सेबी जिंस वायदा एक्सचेंजों पर जल्द से जल्द विकल्प कारोबार भी आरंभ करना चाहता था, लेकिन उसके सामने कानूनी बाधा आ गई। यह बाधा जिंसों में 'विकल्प' आरंभ करने के लिए अपनाई जाने वाली प्रक्रिया को लेकर थी। सिन्हा ने कहा, 'जिंसों में विकल्प की रचना जिस तरह की गई थी, उनसे बाजार की राय के मुताबिक तीन प्रकार से उन्हें आरंभ किया जा सकता था। निपटान या तो फिजिकल डिलिवरी के जरिये होना चाहिए या नकद में अथवा उस दिन तय होने वाली वायदा कीमतों के जरिये होना चाहिए। ज्यादातर की राय तीसरे विकल्प पर थी यानी विकल्प कीमत का निपटान उस दिन के वायदा मूल्य के आधार पर होना चाहिए। कानून के जानकार खंगाल रहे हैं कि विकल्प की अनुमति स्टॉक एक्सचेंज क्लियरिंग कॉर्पोरेशन (एसईसीसी) दिशानिर्देशों में संशोधन के जरिये दी जानी चाहिए अथवा उसके लिए सिक्योरिटीज कॉन्ट्रैक्ट रेग्युलेशन एक्ट (एससीआरए) में तब्दीली करनी होगी। हमारे निदेशक मंडल की पिछली बैठक में तय हुआ कि जिंसों में विकल्प की शुरुआत जल्द से जल्द करने के लिए एसईसीसी नियमों में बदलाव किए जाने चाहिए। लेकिन बैठक में यह भी कहा गया कि इस पर अभी और विचार की जरूरत है।'
Keyword: agri, food, crop, jins, SEBI,,
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