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पलनिस्वामी बने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री
गिरीश बाबू/ एजेंसियां /  02 16, 2017

तमिलनाडु में नई सरकार बनते ही पिछले 10 दिनों से बना राजनीतिक अनिश्चितता का दौर हुआ खत्म

तमिलनाडु की पन्नीरसेल्वम सरकार में राजमार्ग एवं वन मंत्री रहे इदाप्पदी के पलनिस्वामी का नाम राष्ट्रीय स्तर पर गत मंगलवार को सामने आया जब उच्चतम न्यायालय के फैसले के चलते अन्नाद्रमुक की कार्यवाहक महासचिव वी के शशिकला मुख्यमंत्री पद के लिए अयोग्य घोषित हो गईं और फिर उन्हें पार्टी विधायक दल का नया नेता चुन लिया गया। शशिकला का समर्थन मिलने से पलनिस्वामी की सियासी ताकत बढ़ गई और गुरुवार को उन्होंने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर पन्नीरसेल्वम के साथ छिड़े सत्ता संघर्ष में तात्कालिक जीत हासिल कर ली। 

हालांकि पलनिस्वामी के सामने अभी अपना बहुमत साबित करने की चुनौती है। राज्यपाल सी विद्यासागर राव ने उन्हें 15 दिनों के भीतर बहुमत साबित करने को कहा है। विरोधी धड़े की तरफ से अब भी संघर्ष जारी रहने के ऐलान के चलते पलनिस्वामी के सामने अपने समर्थक विधायकों को एकजुट रखने की चुनौती होगी। वैसे पलनिस्वामी का नाम उस समय भी मुख्यमंत्री पद के लिए सामने आया था जब गत दिसंबर में तत्कालीन मुख्यमंत्री जे जयललिता का लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया था। लेकिन उस समय जयललिता के पुराने भरोसेमंद पन्नीरसेल्वम बाजी मारने में कामयाब रहे थे। जयललिता के निधन की औपचारिक घोषणा होने के दो घंटे के भीतर ही पन्नीरसेल्वम को मुख्यमंत्री बना दिया गया था। 

लेकिन फरवरी की शुरुआत में शशिकला के कहने पर इस्तीफा देने के बाद पन्नीरसेल्वम बगावत पर उतर गए। उसके बाद चले सियासी उतार-चढ़ाव के दौर में पलनिस्वामी अचानक तमिलनाडु की सियासत का नया चेहरा बनकर उभरे हैं। उन्हें शशिकला खेमे का व्यक्ति माना जा रहा है और विधानसभा में बहुमत साबित करने के बाद सत्ता पर पकड़ मजबूत करनी होगी। 

इरोद के आंधियुर में 2 मार्च, 1954 को वी करूपा गूंदेर के घर जन्मे पलनिस्वामी 12वीं पास हैं। उन्होंने बीएससी में प्रवेश भी लिया था लेकिन किसी वजह से उसे पूरा नहीं कर पाए। फिर वह खेती के काम में अपने घरवालों का हाथ बंटाने लगे। लेकिन राजनीति में उनकी रुचि पनपने लगी और धीरे-धीरे सक्रियता से जुड़ गए। वह पहली बार 1989 में विधानसभा के लिए चुने गए थे। फिर वह 1991 में दोबारा विधायक बने। पलनिस्वामी वर्ष 1998 से 1999 के बीच लोकसभा के भी सदस्य रह चुके हैं। वह वर्ष 2011 और 2016 के विधानसभा चुनावों में भी जीत दर्ज करने में सफल रहे। गत मई में जयललिता सरकार में उन्हें राजमार्ग एवं वन मंत्री बनाया गया। पन्नीरसेल्वम की पिछली सरकार में भी उनका मंत्री पद बरकरार रहा था।   

पलनिस्वामी पहली बार सेलम के इदाप्पदी क्षेत्र से विधायक चुने गए थे। वह इलाका पिछड़ी जातियों में अपेक्षाकृत ऊंची मानी जाने वाली गूंदेर जाति के प्रभाव वाला है। खुद पलनिस्वामी भी उसी समुदाय से ताल्लुक रखते हैं। सेलम में अन्नाद्रमुक को पिछले चुनाव में मिले जबर्दस्त समर्थन का इनाम पलनिस्वामी को मंत्री पद के रूप में मिला। वैसे वह मंत्री बनने के पहले भी जयललिता और उनकी सहेली शशिकला के भरोसेमंद माने जाते रहे हैं। पलनिस्वामी को राज्यपाल राव ने एक सादे समारोह में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाई। उनके साथ 30 मंत्रियों ने भी पद एवं गोपनीयता की शपथ ली है। इनमें अधिकतर मंत्री पिछली सरकार में भी शामिल रह चुके हैं।

पलनिस्वामी पिछले नौ महीने में मुख्यमंत्री की शपथ लेने वाले तीसरे नेता हैं। अन्नाद्रमुक सुप्रीमो और मुख्यमंत्री जयललिता ने मई, 2016 में विधानसभा चुनाव जीतकर लगातार दूसरी बार अपनी पार्टी को सत्ता में पहुंचाया था। लेकिन 74 दिनों तक अस्पताल में रहने के बाद दिसंबर के पहले सप्ताह में जयललिता का निधन हो गया और फिर पन्नीरसेल्वम ने कमान संभाली। वह पहले भी जयललिता के दो बार जेल जाने पर मुख्यमंत्री पद संभाल चुके थे।

शशिकला का मार्ग प्रशस्त करने के लिए पन्नीरसेल्वम बाद में इस पद से हट गए। पहले ही पार्टी महासचिव चुनी गईं शशिकला पांच फरवरी को पार्टी विधायक दल की नेता निर्वाचित हुईं। लेकिन अल्पभाषी पन्नीरसेल्वम ने दो दिन बाद ही बगावत का झंडा उठा लिया और दावा किया कि उन्हें इस्तीफा देने के लिए बाध्य किया गया। उन्होंने तमिलनाडु की जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं की इच्छा के चलते फिर से मुख्यमंत्री बनने की मंशा भी प्रकट की।

उनकी आक्रामकता से तमिलनाडु में राजनीतिक संकट पैदा हो गया। पन्नीरसेल्वम से टकराव के बीच शशिकला नौ फरवरी को राज्यपाल से मिलीं और उन्होंने सरकार बनाने का दावा किया। विभिन्न वर्गों की आलोचना के बावजूद राज्यपाल ने इंतजार करने की नीति का पालन किया। राव का यह कदम तब सही प्रतीत हुआ जब आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति के मामले में शशिकला और उनके परिवार के दो सदस्यों को 14 फरवरी को उच्चतम न्यायालय ने दोषी माना और उनकी सजा बहाल कर दी।

इस फैसले के बाद शशिकला 10 साल के लिए चुनाव लडऩे के अयोग्य हो गईं और मुख्यमंत्री बनने के उनके सपने पर पानी फिर गया।  शशिकला ने तब अपने भरोसेमंद पलनिस्वामी को अन्नाद्रमुक विधायक दल का नया नेता बनवाया। पलनिस्वामी ने बुधवार रात को ही राज्यपाल से मिलकर उन्हें 124 समर्थक विधायकों की सूची सौंपी थी। उनके पास 234 सदस्यीय विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का वक्त है।

Keyword: tamilnadu, shahikala, court, वी के शशिकला,
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