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दूरसंचार में विलय के पत्ते बड़े बढ़ते और छोटे निकलते
भूपेश भन्डारी
कारोबारी मंत्र /  February 14, 2017

वोडाफोन और आइडिया सेल्युलर के संभावित विलय की खबरों ने लोगों को कतई चकित नहीं किया। कई टीकाकारों ने 30 जनवरी को इन दोनों कंपनियों की विलय संबंधी बातचीत को लेकर स्वीकारोक्ति के बहुत पहले यह कहना शुरू कर दिया था कि यह विलय एक बेहतर कदम होगा। इसे रिलायंस जियो का प्रभाव भी कहा जा सकता है। ऐसे परिदृश्य में जहां एक नई कंपनी ने वॉयस कॉल मुफ्त कर दी है और हर तरह के डाटा शुल्क को छह महीने के लिए माफ कर दिया है, वहां मौजूदा कंपनियों पर भारी दबाव पडऩा लाजिमी है। स्पेक्ट्रम की ऊंची कीमतों से उपजी समस्या को जोड़ दिया जाए तो यह खतरा बहुत बड़ा हो जाता है। 

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तार में फंसा विस्तार
 
एक समय दूरसंचार बाजार में करीब 12 कंपनियां थीं लेकिन फिलहाल इनमें केवल तीन बड़े नाम भारती एयरटेल, वोडाफोन और आइडिया ही रह गए हैं। गत सितंबर में रिलायंस जियो के बाजार में आक्रामक प्रवेश ने यह तय कर दिया कि सूची और छोटी होगी। इन तीनों कंपनियों में एयरटेल आगे थी लेकिन वोडाफोन और आइडिया के लिए उसके साथ हाथ मिलाना संभव नहीं था। नियमानुसार किसी भी एक क्षेत्र में किसी एक कंपनी के पास 50 फीसदी से अधिक राजस्व हिस्सेदारी या स्पेक्ट्रम हिस्सेदारी नहीं रह सकती। एयरटेल के साथ वोडाफोन या आइडिया किसी का भी विलय होने पर सभी 22 सर्किल में यह नियम टूट जाता। यानी दूसरे और तीसरे नंबर की कंपनियों के पास ही जियो से मुकाबले का विकल्प रह गया। इसके लिए विलय आवश्यक है। अगर यह विलय हो जाता है तो भी दोनों कंपनियां कुछ सर्किल में उपरोक्त नियम तोड़ेंगी। इससे बचने के लिए उनको या तो अपने उपभोक्ताओं की संख्या कम करनी होगी या स्पेक्ट्रम कम करना होगा। लेकिन लगता नहीं इससे कुछ होगा। 
 
वोडाफोन ने भारत में अब तक कोई कमाई नहीं की है। गत वर्ष उसने पांच अरब यूरो बट्टे खाते में डाले। चूंकि बाजार में अधिकाधिक पूंजी की आवश्यकता पड़ रही है इसलिए उसकी ब्रिटिश मातृ कंपनी ने भारतीय अनुषंगी पर यह दबाव बनाना शुरू किया कि वह बाजार में सूचीबद्घ होकर धनराशि जुटाए। लेकिन भीषण प्रतिस्पर्धा को देखते हुए यह आसान नहीं था। ध्यान रखें कि बीते एक साल में दूरसंचार कंपनियों की शेयर कीमतें काफी गिरी हैं। आइडिया के साथ विलय के बाद कंपनी की पहुंच शेयर बाजार तक हो जाएगी क्योंकि आइडिया शेयर बाजार पर कारोबार कर रही है। इसके लिए कंपनी को आईपीओ भी नहीं लाना होगा। आइडिया की बैलेंस शीट पर दबाव स्पष्टï नजर आ रहा था। उसके ऋण का बोझ बढ़ता जा रहा था। करीब 41,500 करोड़ रुपये के कर्ज ने उसकी रेटिंग को प्रभावित करना शुरू कर दिया था। शेयर कीमतों में गिरावट आ रही थी। ऐसे में वोडाफोन का साथ उसे कुछ राहत देगा।
 
दोनों के बीच का तालमेल अहम है। वोडाफोन जहां शहरी बाजार में प्रभावशाली है, वहीं आइडिया की पहुंच ग्रामीण बाजारों में बहुत अच्छी है। दोनों मिलकर देश भर में 3जी और 4जी सेवाएं दे सकती हैं। हालांकि इस साझा कंपनी को 900 और 1,800 मेगाहट्र्ज के अहम बैंड में कुछ स्पेक्ट्रम खाली करना होगा। इसके बावजूद कारोबार के कुल राजस्व के 90 फीसदी के लिए उत्तरदायी 17 सर्किल में इसकी अच्छी पैठ बनी रहेगी। नेटवर्क परिचालन लागत में बचत होगी जो राजस्व का करीब चौथाई हिस्सा है। इसके अलावा पूंजीगत व्यय में भी। 
यह देखना रोचक होगा कि विलय के बाद कौन सा ब्रांड बचा रहता है और किसका नामोनिशां मिटता है। वोडाफोन और आइडिया दोनों ने अपने ब्रांड में जमकर निवेश किया है। एक खबर के मुताबिक तो नई कंपनी का नाम वोडाफोन हो सकता है क्योंकि उसकी हिस्सेदारी ज्यादा रहेगी। अगर ऐसा हुआ तो एक और बड़ा देसी ब्रांड नष्ट हो जाएगा। दूरसंचार ब्रांड बहुत जल्दी गुम भी हो जाते हैं। देश में कम से कम एक दर्जन बड़े दूरसंचार ब्रांड को हमने अधिग्रहण के बाद तेजी से खत्म होते देखा है। 
 
वोडाफोन और आइडिया के पास मिलकर 42 फीसदी बाजार हिस्सेदारी होगी। यह मौजूदा सबसे बड़ी कंपनी एयरटेल की 31 फीसदी हिस्सेदारी से ज्यादा है। लंबे समय तक शीर्ष पर रहने के बाद एयरटेल अपदस्थ हो जाएगी। इसके बाद शायद ही कोई नया अधिग्रहण यूं शीर्ष पर आए। चाहे जो भी हो एयरटेल पर भी कर्ज का बोझ कम नहीं है। इसके बावजूद वोडाफोन और आइडिया के विलय की चर्चा सामने आने पर भी एयरटेल के शेयरों में तेजी आई। निवेशकों को लगा कि इससे प्रतिस्पर्धा कम होगी जिसका फायदा एयरटेल को मिलेगा।
 
यह देखना रोचक होगा कि रिलायंस जियो अब क्या कदम उठाती है? कुछ लोगों का मानना था कि कंपनी 2020 तक वोडाफोन को पीछे छोड़कर देश की दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार कंपनी बन जाएगी। क्या मुकेश अंबानी को यह पसंद आएगा। एक ब्रोकरेज हाउस ने कहा है कि यह वोडाफोन-आइडिया के सौदे के लिए सबसे बड़ा जोखिम हो सकता है। रिलांयस जियो कोई तरीका निकालकर नियामकों को यह बढ़ावा दे सकती है कि वे इस विलय को गैर प्रतिस्पर्धी बताकर रद्द कर दें। फर्म कहती है भारतीय राजनीति के जो हालात हैं उनमें इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। 
Keyword: vodafone, idea, telecom, वोडाफोन, आइडिया,
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