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किसानों की आय
संपादकीय /  February 14, 2017

सरकार और उसके विभिन्न विभाग किसानों की आय दोगुनी करने की अपनी प्रतिबद्घता के बारे में जितनी बातें करते हैं, यह मुद्दा उतना ही भ्रामक होता जाता है। सत्ताधारी दल भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 2014 के अपने चुनावी घोषणा पत्र में भी यह बात कही थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी भी अक्सर इसे दोहराते हैं। तथ्य यह है कि इसके लिए आधार वर्ष 2016-17 ही होगा जबकि वर्ष 2021-22 इसका लक्षित वर्ष होगा। अभी तक यह स्पष्टï नहीं है कि यह दोगुनी की जाने वाली आय वास्तविक आय (मुद्रास्फीति से समायोजित) होगी या फिर असमायोजित।  यह वास्तविक आय हो तो ही बेहतर। भ्रम इसलिए पैदा हुआ क्योंकि सरकार ने हाल में संसद से कहा कि किसानों की आय दोगुनी करने संबंधी विभिन्न पहलुओं पर विचार करने के लिए बनी समिति किसानों और खेतिहर मजदूरों की 'वर्तमान आय' का अध्ययन करेगी। इसमें उनकी 'वास्तविक आय' का जिक्र न था।

 
यह बात ध्यान देने लायक है कि मौजूदा मूल्य पर आधारित आय में हर पांच से सात साल में दोगुना होने की प्रवृत्ति देखी गई है। यह बात राष्टï्रीय नमूना सर्वेक्षण संगठन (एनएसएसओ) के आंकड़ों से निकली है जो हर 10 वर्ष में कृषि आय के आंकड़े एकत्रित करता है। ताजातरीन सर्वेक्षण से पता चलता है कि मौजूदा मूल्य पर किसानों की औसत आय वर्ष 2002-03 के 2,115 रुपये से करीब तीन गुनी होकर वर्ष 2012-13 में 6,424 रुपये तक हो गई। ध्यान देने वाली बात यह है कि 11.7 फीसदी की इस औसत सालाना वृद्घि ने भी किसानों की दिक्कत दूर नहीं की बल्कि इस अवधि में किसान सर्वाधिक परेशान रहे। किसानों की आत्महत्या के मामले भी इन 10 वर्षों में कम नहीं हुए। ऐसे में अगले पांच साल में कृषि आय को फिर से दोगुना करना तब तक बेमानी होगा जब तक इससे किसानों की चिंता कम न हो। 
 
निश्चित तौर यह मान लेने का भी कोई अर्थ नहीं है कि किसानों की आय में यह वांछित इजाफा अकेले खेती से हो जाएगा। उनकी आय में यह बढ़ोतरी तमाम कृषि और गैर कृषि गतिविधियों से आए जो ग्रामीण अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं। कृषि से जुड़े क्षेत्र मसलन पशुपालन और मधुमक्खीपालन आदि को खेती की तुलना में अधिक आकर्षक काम माना जाता है। बागवानी, फूलों की खेती, जड़ी-बूटी खेती और कृषि वानिकी आदि उच्च मूल्य वाली कृषि गतिविधियां हैं जिनमें मुनाफा अर्जित किया जा सकता है। कृषि अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने के लिए सबसे अधिक जरूरी है एकीकृत खेती को बढ़ावा देना। यह काम मुख्य और अनुषंगी गतिविधियों के मेल से होगा। चूंकि इन अनुपूरक कामों में से कई का सीधा संबंध कृषि से है इसलिए इनके एकीकरण की मदद से न केवल तालमेल बेहतर होगा बल्कि बेहतर उत्पाद भी बाजार में आ सकेंगे। 
 
जहां तक मुख्य कृषि आय की बात है इसमें इजाफा मोटे तौर पर तीन कारकों पर निर्भर करता है। उच्च उत्पादकता, कम लागत और अच्छी कीमत। उच्च उत्पादन के कारण कृषि उत्पादों के मूल्य में गिरावट अक्सर देखने को मिलती है। इस वर्ष भी खरीफ की अच्छी खेती के बाद यह देखने को मिला। इससे निजात पानी होगी। बदले में हमें कृषि विपणन को सुसंगत बनाने, कच्चे माल के किफायती इस्तेमाल, उच्च मूल्यवद्र्घन और बरबादी की कमी सुनिश्चित करने वाले बेहतर सुधारों को लागू करना होगा। इसके अलावा खराब हो सकने वाले कृषि उत्पादों की साज संभाल बेहतर ढंग से करनी होगी। वैकल्पिक रोजगार सृजन और आय के अवसर ग्रामीण क्षेत्र में मौजूद हैं। इन पर खास ध्यान देना होगा क्योंकि किसान बहुत तेजी से गैर कृषि क्षेत्र के रोजगार पर निर्भर हो रहे हैं जो उनकी अनुपूरक आय का जरिया है।
Keyword: agri, food, crop, farmer, income,,
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