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खेल जगत की हस्तियां और कारोबारी व प्रबंधन सफलता
जिंदगीनामा
कनिका दत्ता /  February 09, 2017

क्या आप फुटबॉल टीम न्यू इंगलैंड पैट्रियट्स के कप्तान टॉम ब्रैडी को बिजनेस गुरु मानेंगे? या फिर क्रिकेटर विराट कोहली को? जैक और सुजी वेल्श की सफल पति-पत्नी की जोड़ी जिसने प्रबंधन सलाह में एक नया करियर तलाश किया, विराट कोहली का नाम भले ही नहीं सुना हो लेकिन उन्होंने उनमें से पहले यानी क्वार्टबैक ब्रैडी (फुटबॉल में एक विशेष स्थान पर खेलने वाले खिलाड़ी को क्वार्टरबैक कहते हैं) में तमाम संभावनाएं देखीं जिनको पांच सुपर बॉल जीतने में कामयाबी मिली। 

 
बै्रडी ने अपनी टीम की अटलांटा फॉल्कंस पर 25 अंक से पिछडऩे के बाद मिली शानदार जीत के बारे में कहा था कि खेल को एकदम आखिर तक खेलना चाहिए। उल्लेखनीय है कि उस जीत को अमेरिकी फुटबॉल जगत में असंभव के संभव होने जैसा माना गया। जैक और सूजी ने ब्रैडी के बारे में कहा, 'वह धीरज के बारे में बात कर रहे थे। कठिन और दु:साध्य चुनौती के सामने टिके रहने के बारे में बजाय कि समर्पण करने के। तब भी जबकि चीजें असंभव नजर आ रही हों। उनका कहना था कि उम्मीद नहीं गंवानी चाहिए और अगर प्रयास जारी रखे जाएं, चीजें बदली जाएं, अपने खेल में निरंतर सुधार किया जाए, कमजोरियों से पार पाया जाए तो जीतने की संभावना शेष रहती है।'
 
वह कहते हैं कि टॉम ने सही कहा था लेकिन इसमें एक बात जो जोड़ी जा सकती है वह कारोबारियों के बारे में है। प्रतिस्पर्धा ठीक इसी तरह काम करती है और करियर भी। यह सब ठीक है लेकिन एक बात यह भी है कि क्या हमें एक पहले से अनुभूत बात को साबित करने के लिए बै्रडी के प्रदर्शन की आवश्यकता है। जरा इस पर विचार कीजिए। टीम जैक और सुजी ने न्यू इंगलैंड पैट्रियट्स के शानदार टीम प्रदर्शन का जिक्र क्यों नहीं किया जिसकी टीम की जबरदस्त वापसी में अहम भूमिका थी। वे आसानी से यह लिख सकते थे कि यह काम टीम वर्क से होता है। कारोबार भी ऐसे ही काम करते हैं।
 
शायद जनरल इलेक्ट्रिक के पूर्व मुख्य कार्याधिकारी जैक और हॉवर्ड बिजनेस रिव्यू की पूर्व मुख्य संपादक सुजी कुशल पेशेवर हैं। अब वह प्रबंधन कारोबार का हिस्सा हैं। अब उनका काम लोगों को बेहतर जीवनशैली सिखाने का है। काफी हद तक भारतीय आध्यात्मिक गुरुओं की तरह। भारतीय आध्यात्मिक गुरुओं की तरह उनकी भी इस उतार-चढ़ाव भरे दौर में बहुत अच्छी मांग है। वे भी धाराप्रवाह और लच्छेदार बातें करते हैं। 
 
चैंपियन खिलाड़ी आसानी से प्रेरक व्यक्तित्व के रूप में उभरते हैं। लेकिन जीवनशैली से जुड़ी शिक्षा देने वाला कोई भी गुरु यह जानता है कि संबंध स्थापित करना अत्यंत महत्त्वपूर्ण बात है। उदाहरण के लिए देख लीजिए किसी ने भी खेल के क्षेत्र में ही विराट कोहली की जबरदस्त और प्रभावित करने वाली सफलताओं का जिक्र नहीं किया है। शायद ऐसा इसलिए हुआ होगा क्योंकि कोहली अपनी सफलता को लेकर जो कहते हैं वह एक असहज करने वाला सत्य हो। वह कहते हैं कि उनके कुछ ही मित्र हैं इसलिए उनका ध्यान नहीं भटकता और वह कामयाब होते हैं। यह बात 'अपना लक्ष्य हासिल करें' जैसी चर्चाओं के लिए उपयुक्त नहीं है। 
 
बड़ी समस्या यह है कि खेल एक अल्पकालिक उद्यम है। एक खेल कुछ घंटे चलता है, एक एथलीट के करियर के बेहतरीन वर्ष तकरीबन 10 साल तक चलते हैं। जबकि हकीकत में किसी कारोबार या करियर को तमाम अनिश्चितताओं के साथ एक लंबे समय तक संभालना होता है। मैनचेस्टर यूनाइटेड के चर्चित प्रबंधक एलेक्स फर्गुसन की मांग कारोबारी जगत में सलाह देने के लिए हमेशा बनी रहती है। उन्होंने सेवानिवृत्ति के बाद लीडरशिप पर बाकायदा एक किताब लिखी। उनकी शैली की नकल करना किसी के लिए भी मुमकिन नहीं लगता। उनकी शैली कितनी अलग थी यह इस बात से समझा जा सकता है कि 27 साल तक यूनाइटेड को संभालने के बाद भी वह कोई विरासत नहीं छोड़ सके। 
 
खेल जगत से जुड़े लोग 30 या 40 के दशक में सेवानिवृत्त होने के बाद भी काफी कुछ कर सकते हैं। वे असामान्य जीवन भी जी सकते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद डिएगो माराडोना की जिंदगी को याद कीजिए। किसे पता है कि क्रिकेट से सेवानिवृत्त होने के बाद कोहली कितने मित्र बनाएंगे। सफल कारोबार और वास्तविक जीवन में स्थिर करियर के लिए एक अलग किस्म के अनुशासन की आवश्यकता होती है। 
 
प्रेरक प्रबंधन के तरकश में अगला बड़ा हथियार है युद्घ। ऐसा इसलिए कि आज भी लोगों को युद्घ अपनी ओर आकृष्टï करते हैं और वे खुद को योद्घा और जनरल के रूप में देखते हैं जो युद्घ की नीतियां बनाए और प्रतिस्पर्धा से निपटने के तरीके भी। अनगिनत ऐसे कार्यालय हैं जो अपने सम्मेलन कक्ष को वॉर रूम कहकर पुकारते हैं। नेपोलियन और एलेक्जेंडर (सिकंदर) के प्रबंधन सबकों पर किताबें लिखी जा चुकी हैं। उनमें बताया गया है कि सैन्य इकाइयां कारोबारी जगत के लोगों को क्या कुछ सिखा सकती हैं। 
 
यहां भी संबंध भ्रामक है। युद्घ का संबंध विनाश से है जबकि कारोबार तो रचनात्मक होता है। एक युद्घ जीतने का अर्थ होता है दूसरे की पराजय। कोई भी मुख्य कार्याधिकारी ऐसी सोच नहीं रखता। वेल्श दंपती ने कारोबार और टॉम बै्रडी के बीच जो रिश्ता कायम किया है वह बताता है कि इस कठिन समय में प्रेरणा के कारोबार में लगे लोगों को अधिक बेहतर संदेश तैयार करने होंगे। 
Keyword: फुटबॉल, टीम, न्यू इंगलैंड पैट्रियट्स,कप्तान, टॉम ब्रैडी,,
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