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गलत उड़ान
संपादकीय /  February 09, 2017

खबरों के मुताबिक सरकार एक प्रस्ताव पर विचार कर रही है जिसके तहत बैंकों को घाटे में चल रही सरकारी विमान सेवा एयर इंडिया में निवेशक बनाया जाएगा। इसके लिए भारतीय स्टेट बैंक के नेतृत्व में 19 बैंकों का एक समूह तैयार करना होगा ताकि उसके 28,000 करोड़ रुपये के कार्यशील पूंजी ऋण को शेयरों में तब्दील किया जा सके। इसके बाद इस कंपनी को शेयर बाजार में सूचीबद्घ किया जा सकता है। हालांकि इसके निजीकरण का कोई प्रस्ताव नहीं है। इस सुधार योजना में विमान कंपनी चलाने वाले स्तरीय और अनुभवी लोगों को शामिल करने का भी विचार है। लब्बोलुआब यह कि संकटग्रस्त सरकारी विमानन कंपनी में नई जान फूंकने की यह एक और कवायद है। वर्ष 2012 में सरकार ने कंपनी में नई जान फूंकने के लिए 30,000 करोड़ रुपये की राशि मंजूर की थी। इसमें से तीन चौथाई धनराशि डाली जा चुकी है। इसके बावजूद कंपनी घाटे में चल रही है। यह बात अधिक चिंताजनक है क्योंकि बीते तीन-चार साल नागरिक विमानन  क्षेत्र के लिए काफी बेहतर साबित हुए हैं। 

 
यह सच है कि बीते कुछ समय में एयर इंडिया ने बेहतरी की दिशा में कुछ कदम उठाने का प्रयास किया है। वह मैकिंजी समेत तीन सलाहकार सेवाओं के साथ चर्चा में है ताकि लागत को कम किया जा सके और नेटवर्क को बेहतर बनाया जा सके। निजीकरण की संभावना नहीं है इसलिए संभव है कंपनी के कर्मचारियों का संगठन पुनर्गठन योजना के लिए तैयार हो जाए। हालांकि विमानन कंपनी को मजबूत बनाने की यह ताजातरीन कोशिश लडख़ड़ा सकती है। बीते दिनों विमानन क्षेत्र में जो भी बेहतरी आई उसके लिए विमानन ईंधन की कम कीमत और यात्रियों की संख्या में तेज वृद्घि वजह रही। इसका फायदा उठाते हुए अधिकांश निजी कंपनियों ने जमकर कमाई की। लेकिन एयर इंडिया को वर्ष 2015-16 में 3,500 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। इस बीच यह भी ध्यान रखना होगा कि ये आंकड़ा इससे पिछले वर्ष के 5,800 करोड़ रुपये के नुकसान से काफी कम था। जेट ईंधन की कीमतों में तेजी आनी शुरू हो गई है, ऐसे में एयर इंडिया का सुधार पहले की तुलना में मुश्किल लग रहा है। 
 
सबसे अहम प्रस्ताव है एयर इंडिया के कुल कर्ज के 60 फीसदी हिस्से को शेयर में बदलना। कर्ज की कुल राशि लगभग 50,000 करोड़ रुपये है। उम्मीद है कि इससे कंपनी को कुछ वित्तीय राहत मिलेगी। सवाल यह है कि क्या बैंक यह जोखिम उठाने को तैयार होंगे? खासतौर पर यह देखते हुए कि वे पहले ही फंसे हुए कर्ज से जूझ रहे हैं। अगर कंपनी की हालत नहीं सुधरी तो उनका पैसा फंस जाएगा। इतना ही नहीं परिचालन में सुधार के लिए सरकार चाहती है कि विमानन कंपनी से कुछ सफल पेशेवर लोग जुड़ें। यह पहला अवसर नहीं है जब सरकार ने ऐसी बात की है। अतीत में भी उसने एयर इंडिया में निजी कारोबारियों की सेवाएं ली हैं लेकिन उनसे मनोवांछित परिणाम नहीं मिले। सच यह है कि कोई भी पेशेवर तब तक कंपनी में नहीं आएगा जब तक उसे पूरी स्वायत्तता से काम करने की आजादी न दी जाए। इसके लिए जरूरी होगा कि नागरिक विमानन मंत्रालय कंपनी पर अपनी पकड़ शिथिल करे। लेकिन हम सभी जानते हैं कि सरकारी नौकरशाह अपना नियंत्रण आसानी से गंवाना नहीं चाहते। 
 
एयर इंडिया कई साल पहले किए गए गैर जरूरी भारी-भरकम विस्तार की कीमत चुका रही है। इंडियन एयरलाइंस के साथ इसका विलय भी सही तरीके से नहीं किया गया। इस बीच छोटी कंपनियों तक ने उसके कारोबार पर असर डाला। ताजातरीन योजना पहले से बुरे हालात को और बुरा बना सकती है। सरकार को यही मशविरा दिया जा सकता है कि वह अपने निर्णय को बैंकों पर न थोपे।
Keyword: aviation, airport, airlines, air india,,
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