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तीसरी तिमाही में एसबीआई के सहायक बैंकों का घाटा कम
अभिजित लेले / मुंबई February 09, 2017

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के सहायक बैंकों का एकीकृत घाटा क्रमिक आधार पर घटकर दिसंबर 2016 तिमाही में 787 करोड़ रुपये रह गया जो सितंबर 2016 में समाप्त तिमाही के दौरान 3,096 करोड़ रुपये रहा था। पिछले वित्त वर्ष (वित्त वर्ष 2016) की तीसरी तिमाही के दौरान एसबीआई के सहायक बैंकों ने 182 करोड़ रुपये का घाटा दर्ज किया था। एसबीआई वित्त वर्ष 2017 की तीसरी तिमाही के वित्तीय नजीतों की घोषणा 10 फरवरी को कर सकता है।
 
एसबीआई के सहायक पांच बैंकों ने चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (सितंबर 2016) के दौरान फंसे हुए कर्ज के लिए प्रावधान की रकम में उल्लेखनी वृद्धि के कारण सबसे अधिक एकीकृत घाटा दर्ज किया था। मूल बैंक में प्रस्तावित विलय से पहले इन सहायक बैंकों के बहीखाते को दुरुस्त करने के उपचार के तौर पर डूबते कर्ज के लिए पर्याप्त प्रावधान की व्यवस्था की गई थी।
 
हालांकि तीसरी तिमाही के दौरान एसबीआई के इन सहायक बैंकों का प्रावधान घटकर 2,994 करोड़ रुपये रह गया जो जुलाई से सितंबर 2016 तिमाही में 7,679 करोड़ रुपये रहा था। विश्लेषकों का कहना है कि पहली और दूसरी तिमाही के दौरान बहीखाते को दुरुस्त करने के लिए उठाए गए कदमों के कारण तीसरी तिमाही के प्रावधान में कमी दर्ज की गई। इन सहायक बैंकों का सकल एनपीए दिसंबर 2016 तिमाही में मामूल वृद्धि के साथ 52,890 करोड़ रुपये हो गया जो सितंबर 2016 तिमाही में 51,380 करोड़ रुपये रहा था।
 
एसबीआई के इन पांच सहायक बैंकों- स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर, स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर ऐंड जयपुर, स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर और स्टेट बैंक ऑफ पटियाला- और भारतीय महिला बैंक को मार्च 2017 तक एसबीआई में विलय करने का प्रस्ताव था। लेकिन विलय योजना को फिलहाल अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही तक टाल दिया गया है।
 
बैंक ऑफ इंडिया ने दर्ज किया मुनाफा 
 
सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक ऑफ इंडिया का चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही में शुद्ध लाभ 101.72 करोड़ रुपये रहा है। इससे पिछले वित्त वर्ष की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही में बैंक को 1505.58 करोड़ रुपये का शुद्ध घाटा हुआ था। समीक्षाधीन अवधि में बैंक की कुल आय बढ़कर 11594 करोड़ रुपये रही है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 11086.95 करोड़ रुपये थी। आलोच्य अवधि में बैंक की सकल गैर-निष्पादित आस्तियां (एनपीए) उसके सकल ऋण का 13.38 फीसदी रही हैं, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 9.18 फीसदी थीं। इस दौरान बैंक का शुद्ध एनपीए उसके शुद्ध ऋण का 7.09 फीसदी रहा है, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में 5.25 फीसदी था।
Keyword: bank, loan, debt, company, SBI,,
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