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एनपीए के नियमों का बैंकों के लाभ पर असर रहेगा जारी
एजेंसियां / मुंबई February 08, 2017

भारतीय रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर एस एस मूंदड़ा ने कहा है कि फंसे कर्ज की खातिर पर्याप्त प्रावधान पर भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देश का बैंकों के मुनाफे पर कुछ समय तक दबाव जारी रहेगा, हालांकि कुछ बैंकों ने एनपीए के अनुपात में गिरावट देखी है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में मूंदड़ा मीडिया के सवालों का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा, कुल मिलाकर बैंंकिंग व्यवस्था ने परिचालन लाभ में सुधार दर्ज किया है। लेकिन प्रावधान के नियमों पर नजर डालें तो मुझे लगता है कि शुद्ध लाभ पर दबाव अभी जारी रहेगा।
 
बैंंकिंग व्यवस्था में संपत्ति की गुणवत्ता पर बताते हुए मूंदड़ा ने कहा, हमें तीसरी तिमाही के सभी बैंकों के नतीजे अभी नहीं मिले हैं। हालांकि बैंकिंग व्यवस्था में शामिल विभिन्न संपत्तियों की श्रेणी में सकल एनपीए अनुपात में थोड़ी बढ़ोतरी दर्ज हुई है, चाहे वह सरकारी बैंक हो या फिर निजी क्षेत्र के बैंक, लेकिन कुछ तिमाहियों में पहली बार यह देखने को मिला है कि कुछ बैंकों का अनुपात इससे पूर्व तिमाही के मुकाबले घटा है। इसी तरह शुद्ध एनपीए के मोर्चे पर मूंदड़ा ने कहा कि यह सकल एनपीए के मुताबिक है और इसमें बढ़ोतरी तो हुई है लेकिन ज्यादातर बैंकों के लिए यह अनुपात घटा है।
 
डिप्टी गवर्नर ने कहा, यह स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है कि प्रावधान का स्तर अपर्याप्त है। साथ ही पुनर्गठित परिसंपत्तियां एनपीए की श्रेणी में शामिल हो रही हैं और इसके नतीजे के तौर पर सभी उद्योगों में पुनर्गठित परिसंपत्तियों के अनुपात में कमी आई है। हालिया सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मौजूदा वित्त वर्ष में अप्रैल-सितंबर के दौरान सरकारी बैंकों का सकल एनपीए 5,89,502 करड़ रुपये पर पहुंच गया, जो इनकी सकल उधारी का करीब 11.82 फीसदी है।
 
इससे पिछले वित्त वर्ष में सरकारी बैंकों की सकल उधारी 51,04,915 करोड़ रुपये थी, जिसमें से 5,02,068 करोड़ रुपये (9.83 फीसदी) सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों के तौर पर वर्गीकृत थीं। पिछले हफ्ते वित्त राज्य मंत्री संतोष गंगवार ने लोकसभा में यह जानकारी दी थी। दूसरी ओर निजी क्षेत्र के बैंकों का सकल एनपीए 48,380 करोड़ रुपये था, यानी 2015-16 के दौरान उनकी सकल उधारी 17,91,681 करोड़ रुपये का महज 2.70 फीसदी। पूंजी पर्याप्तता अनुपात पर मूंदड़ा ने कहा कि ज्यादातर बैंक नियामकीय नियमों का पालन करने की राह पर हैं। लेकिन आगामी दिनों में कुछ बैंकों को अतिरिक्त पूंजी जुटाने की दरकार होगी।
Keyword: भारतीय रिजर्व बैंक, डिप्टी गवर्नर, एस एस मूंदड़ा, कर्ज,
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