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दरों में कटौती की गुंजाइश पर मतभेद
अभिजित लेले / मुंबई February 08, 2017

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर ऊर्जित पटेल ने ग्राहकों के लिए ऋण और अधिक सस्ता करने पर जोर दिया है लेकिन बैंकरों ने स्पष्टï कर दिया है कि उधारी में कमजोर वृद्धि और ऊंची उधारी लागत के मद्देनजर कम आय के दबाव के कारण उधारी दरों में कटौती की गुंजाइश काफी कम है। पटेल ने कहा कि उधारी दरों में और कटौती के लिए बैंकों के पास काफी गुंजाइश है। केंद्रीय  बैंक ने प्रमुख नीतिगत दरों में 175 आधार अंकों की कटौती कर चुका है जबकि उधारी दरों में भारित औसत कटौती करीब 85 से 99 आधार अंकों की रही है। रिजर्व बैंक ने नीतिगत दरों में कटौती का लाभ ग्राहकों तक पहुंचाने पर जोर दिया है। हालांकि केंद्रीय बैंक ने उन कारकों का भी जिक्र किया जो लाभ हस्तांतरण में बैंकों के लिए बाधा बने हुए हैं। इन कारकों में गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) का विशाल भंडार और बैंकों खासकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का पुनर्पूंजीकरण शामिल हैं।
 
आरबीआई ने कहा कि छोटी बचत दरों में समायोजन यदि समान परिपक्वता अवधि वाली सरकारी प्रतिभूतियों के प्रतिफल से करें तो उसका फायदा मिल सकता है। हालांकि भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के प्रबंध निदेशक पीके गुप्ता ने कहा कि लघु अवधि में उधारी दरों में कटौती करना कठिन है। बैंकों को वर्तमान एमसीएलआर यानी कोष की सीमांत लागत पर आधारित उधारी दर को बरकरार रखने के लिए भी जमा पर ब्याज दरों में कटौती करना पड़ेगा।
 
गुप्प्ता ने कहा कि ब्याज दरों में कटौती काफी हद तक इस बात पर भी निर्भर करेगी कि निकासी की सीमा खत्म किए जाने के बाद कम लागत वाली कितनी जमा बैंकों के पास बचती है। बैंक ऑफ महाराष्ट्र के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी आरपी मराठे ने कहा कि उनके बैंक ने फरवरी में कोष की सीमांत लागत पर आधारित उधारी दर यानी एमसीएलआर में 20 आधार अंकों की कटौती की थी। इसके साथ ही पिछले पांच महीने के दौरान एमसीएलआर में कुल 90 आधार अंकों की कटौती की जा चुकी है। इसलिए प्रणाली में नकदी प्रवाह को आसान बनाने के लिए हरसंभव कोशिश पहले से ही की जा रही है।
 
मराठे ने कहा कि एमसीएलआर में आगे कोई भी संशोधन कुछ मानदंडों को देखकर किया जाएगा जैसे कोष की सीमांत लागत, नकारात्मकता और परिचालन लागत। बैंक खासकर सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक भारी उधारी लागत और कमजोर ऋण वृद्धि के मद्देनजर अपने मार्जिन और लाभप्राता को लेकर काफी चिंतित दिख रहे हैं। जनवरी 2016 में एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक और अनय वाणिज्यिक बैंकों ने एमसीएलआर में 80 आधार अंक तक की कटौती की थी। हालांकि नवंबर 2016 में हुई नोटबंदी के बाद बैंकों को कम लागत वाली जमा के कारण कोष की बढ़ी हुई लागत में उल्लेखनी कमी का फायदा मिला। बैंक 1 अप्रैल 2016 से कोष की सीमांत लागत आधारित उधारी दर यानी एमसीएलआर के घटकों के आधार पर ऋण के लिए ब्याज दरें निर्धारित करते हैं। एमसीएलआर इसके लिए आंतरिक बेंचमार्क का काम करती है। इसलिए उधारकर्ताओं से वसूली जाने वाली ब्याज दरें अलग-अलग बैंकों की अलग-अलग होती हैं।
Keyword: भारतीय रिजर्व बैंक, आरबीआई, गवर्नर, ऊर्जित पटेल, ऋण,
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