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नोटबंदी का पुनरावलोकन
साप्ताहिक मंथन
टी. एन. नाइनन /  February 03, 2017

क्या वक्त आ गया है कि नोटबंदी के आलोचक अपनी आलोचना में सुधार कर इसे केवल निपटने में हुई अव्यवस्था तक सीमित कर दें? वित्त मंत्री अरुण जेटली के बजट से निकले आंकड़े तो इसी ओर संकेत करते हैं। उनके मुताबिक बैंकों में जमा उच्च मूल्य के नोटों में से 40 फीसदी बेहिसाबी हो सकते हैं। यह आंकड़ा उन शुरुआती आकलनों से बहुत ज्यादा है जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नोटबंदी की घोषणा के बाद लगाए गए थे। जेटली ने कहा कि 4.9 लाख करोड़ रुपये (1.48 लाख बैंक खाते जिनमें औसत 3.31 करोड़ रुपये जमा हैं) की राशि न्यूनतम 80 लाख रुपये की राशि के साथ जमा की गई। मुझे नहीं लगता कि देश में बहुत ज्यादा लोगों को रोजमर्रा के काम के लिए 80 लाख रुपये नकद रखने की आवश्यकता होगी। जाहिर है यह नोटबंदी से निकला काला धन है। 

 
इससे इतर, बैंकों में कम राशि में जमा उच्च मूल्य की नकदी का कुछ हिस्सा भी काला धन हो सकता है। जैसा कि जेटली ने खुलासा किया कि देश भर में करीब 1.09 करोड़ खातों में दो लाख रुपये से लेकर 80 लाख रुपये के बीच की राशि जमा की गई। इसकी औसत राशि 5.03 लाख रुपये रही। यह राशि 5.48 लाख करोड़ रुपये थी। अगर हम यह मान लें कि इस राशि में 20 फीसदी काला धन हो सकता है तो 4.9 लाख करोड़ रुपये के आरंभिक अनुमान में 1.1 लाख करोड़ रुपये और जुड़ जाएंगे। यानी कहा जा सकता है कि छह लाख करोड़ रुपये मूल्य का काला धन इस कवायद से उजागर हुआ। यह विमुद्रीकृत की गई 15.4 लाख करोड़ रुपये की कुल धनराशि का 39 फीसदी हिस्सा है। अगर इसे सही माना जाए तो अधिकांश पर्यवेक्षक यह मानेंगे कि यह आंकड़ा नोटबंदी की कवायद को सही साबित करने वाला है। अगर इस पूरी प्रक्रिया के क्रियान्वयन में इस कदर गड़बडिय़ां नहीं होतीं जितनी कि हुईं तो अधिकांश लोग इसे एक ऐसा जुआ मानते जो सफल साबित हुआ। गौरतलब है कि नोटबंदी के कारण लाखों लोगों को दिक्कतें हुईं। कई लोगों की आजीविका चली गई जबकि कुछ लोगों को जान तक गंवानी पड़ी। 
 
निश्चित तौर पर अर्थव्यवस्था को इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी। एक अनुमान के मुताबिक जीडीपी को इसके चलते वर्ष 2016-17 में तकरीबन एक फीसदी का नुकसान हुआ यानी 1.5 लाख करोड़ रुपये का। अगले वर्ष भी कुछ नुकसान अवश्य दर्ज किया जाएगा। आखिर इस नुकसान की भरपाई कैसे होगी? इसका एक उत्तर आयकर संग्रह के आंकड़ों में भी छिपा हो सकता है। वित्त मंत्री ने कहा है दिसंबर के अंत तक अग्रिम आयकर संग्रह में 34.8 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई। अगले वर्ष उन्होंने आय कर राजस्व में 24.9 फीसदी का इजाफा होने का अनुमान जताया है। दो वर्ष को मिलाकर देखा जाए तो आयकर में 53 फीसदी का इजाफा होने की उम्मीद है। चूंकि ये आंकड़े अधिकांश वर्षों की तुलना में बहुत बड़े हैं और अन्य करों से आने वाले राजस्व की तुलना में भी बहुत ज्यादा हैं इसलिए यह मान लेना सुरक्षित होगा कि 1.53 लाख करोड़ रुपये का अतिरिक्ति राजस्व नोटबंदी के कारण आएगा। यह राशि उतनी ही है जितना कि हमने जीडीपी को नुकसान होने का अनुमान लगाया है। अगर हम उदार अनुमान लगाएं तो भी इस कवायद से आने वाला अतिरिक्त राजस्व, होने वाले नुकसान से कम ही ठहरेगा। दूसरे शब्दों में नोटबंदी से होने वाला लाभ, उसके चलते हुए नुकसान से कम रहा। 
 
बहरहाल, काले धन की इस सफाई के अलावा भी इसके अन्य लाभ हैं। चूंकि बैंकों में वापस आने वाली धनराशि में से अधिकांश प्रचलित मुद्रा के बजाय जमा करके रखी गई धनराशि हो सकती है इसलिए विमुद्रीकृत नकदी की जगह उस मात्रा में नए नोट छापने की आवश्यकता नहीं है। इससे जीडीपी और नकदी का अनुपात कम होगा और नए कालेधन वाले लेनदेन पर अंकुश लगेगा। डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने की प्रक्रिया के चलते अब पूरी लेनदेन व्यवस्था अधिक पारदर्शी होती जा रही है और कर वंचना की आशंका कम हुई है। इससे वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा। ये लाभ तथा तमाम अन्य लाभ इस बात पर निर्भर करेंगे कि सरकार नोटबंदी के बाद अब कौन से उपाय अपनाती है। संक्षेप में कहा जाए तो लोगों ने नोटबंदी के कारण हुई दिक्कतों की कीमत चुका दी है, अब वक्त आ गया है कि उनको इसका लाभ मिले।
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