बिजनेस स्टैंडर्ड - रतन की विरासत को समृद्घ बनाने को नटराजन करेंगे कौन से जतन!
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, November 21, 2017 08:27 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम विशेष खबर

रतन की विरासत को समृद्घ बनाने को नटराजन करेंगे कौन से जतन!
इंसानी पहलू
श्यामल मजूमदार /  February 02, 2017

नटराजन चंद्रशेखरन क्रिकेटर राहुल द्रविड़ के जबरदस्त प्रशंसक हैं। बतौर बल्लेबाज द्रविड़ का अभेद्य रक्षण और टीम के लिए अधिकाधिक योगदान करने की उनकी उत्कंठा ने खासतौर से चंद्रशेखरन के दिल में द्रविड़ के लिए विशेष जगह बनाई। चंद्रा के नाम से मशहूर चंद्रशेखरन ने कुछ वर्ष पहले बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ बातचीत में कहा भी था, 'याद कीजिए कि द्रविड़ ने भारतीय एकदिवसीय टीम में विकेटकीपर की भूमिका इसलिए ली थी ताकि वह टीम के लिए अधिक योगदान कर पाएं। प्रदर्शन को मौजूदा क्षमताओं से परे ऐसे ही ले जाया जाता है।' स्वाभाविक रूप से उन्होंने इस बात का उल्लेख नहीं किया था कि द्रविड़ अपने कप्तान सौरभ गांगुली की उस सलाह को अमल में ला रहे थे, जिसमें कप्तान ने 'द वॉल' को सुझाव दिया था कि विकेटकीपिंग का अतिरिक्त जिम्मा सीमित ओवरों वाली टीम के अंतिम एकादश में उनकी जगह को मजबूत बनाएगा।

 
अपने पसंदीदा क्रिकेटर की ही तरह चंद्रा ने भी अपने समूचे पेशेवर जीवन में अपनी क्षमताओं से भी बढ़कर काम करने पर जोर दिया और सुनिश्चित किया कि उनके नेतृत्व कौशल को लेकर बनने वाली कोई भी नकारात्मक धारणा सिरे न चढ़ पाए। मिसाल के तौर पर जब वह टीसीएस में मुख्य परिचालन अधिकारी थे, तब कंपनी में एक बात मजाक के तौर पर चलती थी कि टीसीएस का नाम असल में 'टिल चंद्रा सीज' है। ऐसे में सीईओ का कार्यभार संभालने के बाद पहला काम उन्होंने टीसीएस को 23 कारोबारी श्रेणियों में विभाजित कर उसके पुनर्गठन के रूप में किया। उन प्रत्येक विभागों को अपने-अपने फायदे और नुकसान के अलग खातों के साथ ही अलग सीईओ, मानव संसाधन विभाग और कारोबारी लक्ष्य तय करने का अवसर दिया। केवल आठ वरिष्ठï अधिकारी ही उन्हें सीधे तौर पर रिपोर्ट करते थे। दुनिया को यह दर्शाने का यह उनका तरीका था कि वह निर्णय प्रकिया में तेजी लाना चाहते हैं और किसी तरह के सूक्ष्म प्रबंधन में उनकी कोई दिलचस्पी नहीं है। 
 
अब चूंकि वह एक महीने से भी कम में टाटा संस की कमान संभालने जा रहे हैं, ऐसे में पूरी दुनिया की निगाहें उन पर लगी हैं कि भारत के सबसे बड़े निजी कारोबारी समूह को वह किस अधिकार और उत्साह से संचालित करते हैं। यह स्वाभाविक है कि उन्हें तमाम लोगों को अधिकारसंपन्न सशक्त बनाना होगा, जो चेयरमैन कार्यालय के दिशानिर्देशों के अनुसार व्यापक रणनीतियों के तहत काम कर सकें। समूह के पहले गैर-पारसी चेयरमैन की सबसे बड़ी थाती टीसीएस के मुख्य कार्याधिकारी और प्रबंध निदेशक के तौर पर उनका अद्भुत प्रदर्शन रही है। उनकी वह सफलता गाथा टाटा संस में शेष वरिष्ठï नेतृत्व के बीच उनकी स्वीकार्यता बढ़ाने के साथ ही तमाम कंपनियों का परिचालन उनके लिए आसान बनाएगी। मगर सबसे बड़ी चुनौती कहीं और नजर आती है। स्टर्न स्कूल के प्रोफेसर अश्वत दामोदरन ने 'मिंट' के साथ बड़ा सटीक सवाल उठाते हुए कहा कि 'कॉस्मेटिक इफेक्ट' (दिखावटी प्रभाव) देखने में अच्छे लगते हैं लेकिन वास्तविक चुनौती यही है कि क्या चंद्रा ऐसा कुछ कर सकते हैं, जो 'परिवार' को पसंद न आता हो-मसलन उस कारोबार को बंद करना, जो बहुत ज्यादा कमाई करके न दे रहे हों।
 
मगर किसी समूह के नए मुखिया के साथ समस्या यही होती है कि अगर आप कुछ करते हैं तो भी निशाने पर रहते हैं और अगर नहीं करते तो भी निशाने पर होते हैं। यह काम तब और मुश्किल हो जाता है, जब आपका पूर्ववर्ती कोई ऐसा शख्स रहा हो, जिसने 20 वर्षों तक उसकी कमान संभाली हो, जो 'परिवार' का हिस्सा होने के साथ ही कालजयी छवि वाला हो। इतिहास हमें बताता है कि जब भी कोई दिग्गज प्रवर्तक पेशेवर सीईओ को अपना दायित्व सौंपता है तो उनकी विरासत का अक्सर काफी समय तक गुणगान चलता रहता है। ऐसे में क्या चंद्रा इस ग्रंथि से उबरकर वे सख्त फैसले ले सकते हैं, जो कई बार उस नजरिये से देखे जाते हैं, जिन्हें 'परिवार' पसंद नहीं करता। या फिर एक बाहरी या उनके जैसा पेशेवर रतन टाटा की तरह कुछ जोखिम भरे दांव लगा सकता है, जैसा कि टाटा ने लखटकिया कार और विदेशों में किए गए महंगे अधिग्रहणों के रूप में किया। 
 
भारती समूह के चेयरमैन सुनील मित्तल ने इसका कुछ हद तक हल निकाला है और भारती एयरटेल का पूर्ण नियंत्रण सीईओ गोपाल विट्टïल को सौंपकर खुद प्रवर्तक-चेयरमैन बन गए हैं और केवल दीर्घावधि वाले जोखिम भरे सौदों पर ही फैसला लेते हैं। मगर टाटा जैसे बड़े समूहों में यह रणनीति शायद कारगर नहीं हो सकती क्योंकि चंद्रा खुद कार्यकारी चेयरमैन हैं। लिहाजा, नए चेयरमैन के समक्ष पहली चुनौती तो यही होगी कि उन्हें टाटा ट्रस्ट के साथ कामकाज के लिए तालमेल का ढांचा बिठाना होगा ताकि उन्हें और निदेशक मंडल को दीर्घावधिक अनुबंधों के साथ-साथ परिचालन में पूरी आजादी मिले। 
 
दूसरी बड़ी चुनौती नुकसान में चल रही अनुषंगी कंपनियों की छंटाई करने से जुड़ी होगी, जिनका दायरा उर्वरक से लेकर लक्जरी होटल, कार और बिजली उत्पादन तक फैला हुआ है। यह तथ्य छिपा नहीं रह गया है कि जेएलआर और टीसीएस के रूप में समूह की दो कंपनियों के आंकड़े ही फायदे के संकेत करने वाले हैं। समूह की तमाम कंपनियों को जबरदस्त पुनर्गठन की जरूरत है, जिसमें कारोबार की बिक्री जैसे कदम भी शामिल हैं। जैसे कि ब्रिटेन में इस्पाम साम्राज्य, दूरसंचार और होटल सेवाएं। ऐसे में अपने प्रिय क्रिकेटर की ही तरह चंद्रा को भी शायद ऐसे कप्तान की जरूरत होगी जो उन्हें शुरुआती सलाह के बाद आजाद छोड़ दे। 
Keyword: tata group, cyrus mistry, ratan tata, नटराजन चंद्रशेखरन, टाटा संस,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 इन्फ्रा के दर्जे से लॉजिस्टिक्स को मिलेगा बढ़ावा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.