बिजनेस स्टैंडर्ड - वस्तु एवं सेवा कर 1 जुलाई से लागू होने के संकेत
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वस्तु एवं सेवा कर 1 जुलाई से लागू होने के संकेत
बीएस संवाददाता /  02 01, 2017

आम बजट में 1 जुलाई 2017 से वस्तु एवं सेवा कर लागू करने का संकेत दिया गया है। विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं, लिहाजा राजग सरकार ने सेवा कर की दर में इजाफा नहीं किया, जिसकी संभावना जतायी जा रही थी। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने नए प्रत्यक्ष कर व्यवस्था की किसी समयसीमा का जिक्र नहीं किया। फ्यूल सेल आधारित पावर सिस्टम, बायोगैस, हाइड्रोजन और बायो मिथेन में इस्तेमाल होने वाले इनपुट्स पर जारी अधिसूचना में कहा गया है कि 30 जून 2017 से बदलाव लागू नहीं होंगे, जो जुलाई से जीएसटी लागू किए जाने का संकेत देते हैं।

डेलॉयट हस्किंस ऐंड सेल्स एलएलपी के वरिष्ठ निदेशक (अप्रत्यक्ष कर) एम एस मणि ने कहा, उत्पाद व सेवा कर में कोई बड़ा बदलाव न किए जाने से इस बात की पुष्टि होती है कि सरकार निश्चित तौर पर 1 जुलाई से जीएसटी की तरफ बढऩे वाली है। जेटली ने लोकसभा में कहा, हमने उत्पाद व सेवा कर की मौजूदा व्यवस्था में मैं कोई बदलाव नहीं कर रहा हूं क्योंकि जल्द ही जीएसटी इसकी जगह ले लेगा।

मणि ने कहा कि विभिन्न कारोबारों में जीएसटी की तैयारी पिछड़ी हुई है, लेकिन अब इसे तेज गति से तैयारी करनी होगी क्योंकि जीएसटी जल्द लागू होने वाला है। जेटली ने कहा कि सरकार उदद्योग के साथ 1 अप्रैल 2017 से एक कार्यक्रम शुरू करेगी। जीएसटी व नोटबंदी को टैक्टोनिक नीति बताए जाने पर उन्होंने कहा कि भारत वैसी चुनिंदा अर्थव्यवस्थाओं में है जो कायापलट वाला सुधार कार्यक्रम हाथ में लेती हो। जीएसटी के मामले में काफी प्रगति हुई है, जो स्वतंत्रता के बाद सबसे बड़ा कर सुधार है। संविधान संशोधन के बाद यह सुधार सरकार की अग्रणी प्राथमिकता में शामिल हो गया है। राज्यों और सीबीएसई के अधिकारियों की टीम मॉडल जीएसटी कानून व नियम आदि को अंतिम रूप देने के लिए जोर-शोर से काम कर रहे हैं।

जीएसटी परिषद की अब तक नौ बैठक हुई है और इसमें कई मसलों पर चर्चा हुई है। जेटली ने कहा कि परिषद ने सभी मसलों पर सिफारिशों को अंतिम रूप दे दिया है, जो आम राय पर आधारित है। जीएसटी में केंद्र व राज्य के सभी कर मसलन उत्पाद कर, सेवा कर और वैट समाहित हो जाएंगे। अब तक प्रस्तावित कर के स्लैब 5, 12, 18 व 28 फीसदी हैं। जीएसटी लागू होने से केंद्र व राज्य सरकारों को ज्यादा कर मिलेगा क्योंकि कर का दायरा बढ़ेगा। बजट में हालांकि 2017-18 के दौरान अप्रत्यक्ष कर में 9 फीसदी की बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया है।

सोलर मॉड्यूल पर 6 फीसदी उत्पाद शुल्क

सोलर मॉड्यूल के देसी विनिर्माताओं को झटका लगा है। सरकार ने इसके विनिर्माण में काम आने वाले इनपुट्स पर छह फीसदी उत्पाद शुल्क लगा दिया है। इस उत्पाद शुल्क नहीं लगता था। सोलर सेल व मॉड्यूल के आयात पर काउंटरवेलिंग ड्यूटी 12.5 फीसदी के मुकाबले घटाकर 6 फीसदी कर दी गई है। इसी तरह सरकार स्थानीय इलेक्ट्रॉनिक्स सामान के विनिर्माण में निवेश लाने की कोशिश कर रही है ताकि विदेशी मुद्रा बचे। ऐसे में प्रॉपुलेटेड प्रिंटेड सर्किट बोर्ड पर 2 फीसदी विशेष अतिरिक्त शुल्क से मोबाइल विनिर्माताओं का मार्जिन और सिकुड़ जाएगा। पीसीबी का आयात मोटे तौर पर ताइवान व चीन से होता है और इस कदम से कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है क्योंकि ज्यादातर कंपनियां पहले से दबाव में हैं और लागत बढऩे पर उसका भार उठाना मुश्किल होगा।
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