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आयकर रिटर्न में बड़े फेरबदल पर रहेगी सरकार की नजर
तिनेश भसीन /  January 29, 2017

यदि आप आयकर रिटर्न में संशोधन करते हैं तो इस बात की पूरी आशंका है कि आपको इस बदलाव के बारे में सफाई देने के लिए आयकर विभाग से नोटिस मिल जाएगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने अब करदाताओं को चेतावनी दी है कि यदि वे आयकर रिटर्न में संशोधन करते हैं तो पहले घोषित आय की प्रकृति या मात्रा में बहुत अधिक परिवर्तन नहीं होना चाहिए। 

 
हालांकि वेतनभोगी करदाताओं को चिंता करने की जरूरत नहीं है क्योंकि आयकर रिटर्न में उनके द्वारा किए जाने वाले संशोधन मामूली होते हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि ये बदलाव मामूली ही होते हैं। मसलन बचत खाते में जमा रकम पर मिले ब्याज जैसी कर मुक्त आय अथवा म्युचुअल फंड में अपना निवेश भुनाने पर मिली रकम का उल्लेख पहले रिटर्न में नहीं किया गया होगा।
 
दिक्कत कारोबारियों को हो सकती है। क्लियरटैक्स डॉट कॉम में चार्टर्ड अकाउंटेंट प्रीति खुराना कहती हैं, 'व्यवसाय मालिकों को सतर्क रहना चाहिए। अगर वे अपने पास रखी नकदी की मात्रा बदल रहे हैं या बिक्री और मुनाफे के आंकड़ों में तब्दीली कर रहे हैं तो सावधान रहें।' रिटर्न में संशोधन आयकर अधिनियम की धारा 139(5) के तहत किया जाता है और ऐसा तभी किया जाता है, जब रिटर्न भरते वक्त कोई बड़ी चूक हुई हो। कर आकलन अधिकारी को किसी कारण से लगता है कि संशोधन काले धन या अज्ञात परिसंपत्तियों के चक्कर में किया गया है तो वह करदाता को नोटिस भेजकर उससे पूछ सकता है कि अतिरिक्त आय या संशोधित रिटर्न में दिखाई गई परिसंपत्तियों का स्रोत क्या है।
 
सीएनके एंड एसोसिएट्ïस में पार्टनर गौतम नायक का कहना है, 'यदि व्यक्ति अपनी आय में संशोधन करता है तो उसे यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उसके पास इसका पुख्ता सबूत हो। मान लीजिए कि यदि व्यवसाय का मालिक अधिक बिक्री दिखाता है तो उसके पास बिक्री के एवज में चुकाए गए बिक्री कर, मूल्यवर्धित कर (वैट) जैसे सहायक दस्तावेज होने चाहिए।'
 
विश्लेषकों का कहना है कि यदि व्यक्ति के पास संशोधन के संबंध में कोई पुख्ता सबूत नहीं हो और बदलाव जरूरी हो तो उसके लिए बेहतर है कि वह आय घोषणा की नई योजना 'प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना (पीएमजीकेवाई), 2016' को अपनाए। बड़ा बदलाव तब कहलाएगा, जब व्यक्ति ने पहले की तुलना में 30-40 फीसदी अधिक नकदी दिखाई हो। सीबीडीटी ने चेतावनी दी है कि यदि कर अधिकारी कर रिटर्न में किसी तरह की छेडछाड़ पाता है तो संबद्घ व्यक्ति को जुर्माने/सजा का सामना करना पड़ सकता है। कर विश्लेषकों का कहना है कि ज्यादातर मामलों में व्यक्ति को कराधान कानून (द्वितीय संशोधन) विधेयक के अनुसार लगभग 85 फीसदी का भारी-भरकम जुर्माना चुकाना होगा। खुराना ने कहा, 'कर अधिकारी पिछले साल के रिटर्न की भी जांच कर सकता है और यह लंबी प्रक्रिया हो सकती है।'
 
साथ ही आयकर रिटर्न में संशोधन की अनुमति केवल उन लोगों के लिए है, जिन्होंने अपना रिटर्न तय तारीख तक भर दिया था। संशोधित रिटर्न दाखिल करने के लिए समय-सीमा संबद्घ आकलन वर्ष की समाप्ति के बाद एक वर्ष तक या कर विभाग द्वारा रिटर्न के आकलन से पहले तक रहती है। अक्सर आयकर विभाग आपको आपके रिटर्न के आकलन के बारे में सूचना भेजता है। यदि आपने आकलन वर्ष 2016-17 के लिए रिटर्न 5 अगस्त (उस साल तय की गई आखिरी तारीख) से पहले किया है तो आप कर रिटर्न को 31 मार्च, 2018 तक संशोधित कर सकते हैं। इसी तरह आकलन वर्ष 2015-16 के लिए व्यक्ति 31 मार्च, 2017 तक संशोधित रिटर्न दाखिल कर सकता है।
 
नोटबंदी के अपने कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए सरकार उन सभी खामियों को खत्म करने की कोशिश में जुटी है, जिनके जरिये काला धन रखने वाले लोग फायदा उठाते हैं और गलत तरीके से मिले फायदों पर कर देने से बच जाते हैं। आय में संशोधन पर करदाताओं को चेतावनी भेजने से पूर्व आयकर कानून में संशोधन किया गया। पिछले कानूनों में करदाताओं को चालू वित्त वर्ष में अपनी अज्ञात बेहिसाबी आय का स्वैच्छिक ढंग से खुलासा करने और इस पर कर चुकाने की अनुमति थी।
Keyword: income tax, return,,
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