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कानून में आ गए नए पेच एलटीए में जरा रहिए सचेत
तिनेश भसीन /  January 29, 2017

अगर आपने इस साल अपने दफ्तर की छुट्टïी के दिनों में, जैसे सप्ताहांत पर सफर किया है और आप लीव ट्रैवल अलाउंस (एलटीए) का दावा करते हैं तो आपका दावा खारिज भी हो सकता है। आयकर कानून कहता है कि कर्मचारी को 'छुट्टïी लेकर भारत में किसी अन्य स्थान पर रहना ही होगा।' डेलॉयट हास्किंस के वरिष्ठï निदेशक आलोक अग्रवाल कहते हैं, 'आयकर कानून का सख्ती से पालन करने वाले संगठन अपने कर्मचारियों को एलटीए का दावा तभी करने देते हैं, जब उन्होंने छुट्टïी के लिए पहले से अर्जी डाली हो।'

 
वेतनभोगी तबके पर इस साल से नियोक्ताओं की ज्यादा सख्त नजर रह सकती है। एलटीए के साथ ही आवास किराया भत्ता (एचआरए) और आवास ऋण पर ब्याज जैसी सुविधाएं देने में संगठन कड़ी जांच कर सकते हैं। इसकी वजह यह है कि सरकार ने इस बात का पता लगाने की जिम्मेदारी अब नियोक्ता पर डाल दी है कि जो भी दावे किए गए हैं, वे कानून के मुताबिक किए गए हैं या नहीं। इससे पहले कंपनियां कर्मचारियों द्वारा की गई घोषणाओं को ही सही मान लेती थीं।
 
विशेषज्ञ मान रहे हैं कि नियमों में यह बदलाव उच्चतम न्यायालय के एक आदेश से हुई समस्या का समाधान करने के लिए किया गया है। न्यायालय ने कहा था कि कर्मचारियों ने यात्रा और उससे संबंधित खर्चों का दावा कर जो भी रकम प्राप्त की है, वास्तव में उतनी ही रकम का प्रयोग किया गया था अथवा नहीं, यह साबित करने के लिए बिल और दूसरा ब्योरा इक_ïा करना नियोक्ताओं के लिए कानूनन अनिवार्य नहीं है। विशेषज्ञ बताते हैं कि किसी भी तरह की छूट का दावा करने के लिए जरूरी सबूतों के मामले में अब और भी कड़ाई बरती जा सकती है। कर्मचारियों को निर्धारित आवेदन पत्र (12बीबी) का इस्तेमाल कर दावा करना होगा। हालांकि बाकी अन्य कटौती सीधी और अच्छी तरह परिभाषित हैं, लेकिन एलटीए का दावा करने संबंधी नियम और कड़े हो सकते हैं, जो इस बात पर निर्भर करेंगे कि आप गंतव्य तक कैसे पहुंचे थे और किसके साथ यात्रा की थी। छूट के ज्यादातर मामले सीधे-सादे होते हैं और अच्छी तरह से परिभाषित होते हैं। लेकिन एलटीए से जुड़े नियम पेचीदा हो सकते हैं और यह सब इस बात पर निर्भर करता है कि आप अपने गंतव्य तक कैसे पहुंचे और आपके साथ किस-किसने यात्रा की।
 
उड़ान अनेक, दावा एक
 
कोई भी शख्स केवल यात्रा के लिए ही एलटीए का दावा कर सकता है। घूमने या होटल में ठहरने आदि पर आए खर्च इसमें शामिल नहीं होंगे। अगर हवाई यात्रा है तो केवल इकनॉमी क्लास के किराये का दावा किया जा सकता है। इसमें भी पेच यह है कि टिकट की कीमत सरकारी विमानन कंपनी के टिकट के बराबर या उससे कम होनी चाहिए। अगर सफर रेलगाड़ी से किया जा रहा है तो किसी भी श्रेणी के किराये का दावा किया जा सकता है। लेकिन दोनों ही मामलों में आपको गंतव्य तक पहुंचने के लिए छोटे से छोटा यानी सबसे कम दूरी वाला रास्ता चुनना पड़ेगा। मिसाल के तौर पर अगर आप दिल्ली से गोवा जा रहे हैं तो तो आपको सीधी उड़ान या सीधी ट्रेन पकडऩी होगी। अगर आप कनेक्टिंग उड़ान लेते हैं तो किराया सीधी उड़ान के मुकाबले कम होना चाहिए।
 
लेकिन अगर आप किसी ऐसी जगह की यात्रा कर रहे हैं, जहां तक पहुंचने के लिए आपको एक से अधिक उड़ान लेनी पड़ती हैं तो आप क्या करेंगे? एचऐंडआर ब्लॉक के निदेशक वैभव सांकला कहते हैं, 'जहां से यात्रा शुरू हुई है, वहां से सबसे दूर के स्थान तक सबसे छोटे रास्ते से की गई यात्रा के खर्च का दावा ही एलटीए में किया जा सकता है। लेकिन कोई व्यक्ति एक स्थान से दूसरे तक जाने के लिए एलटीए ले सकता है। इसीलिए सीधी उड़ान नहीं होने पर कनेक्टिंग उड़ान का एलटीए मांगा जा सकता है। मगर याद रखिए कि अगर आप छुट्टिïयों के दौरान कई जगहों पर जा रहे हैं तो आप केवल एक यात्रा के लिए ही एलटीए का दावा कर पाएंगे। उदाहरण के लिए अगर आप दिल्ली से जयपुर, जोधपुर और उदयपुर जाते हैं और वहां से वापस आते हैं तो आप केवल दिल्ली से जयपुर जाने और आने का एलटीए ही ले सकते हैं।
 
केवल सार्वजनिक परिवहन
 
अगर अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए आपको परिवहन के एक से अधिक साधन लेने पड़ते हैं तो सरकार ने उसके बारे में भी नियम बना रखे हैं। मान लीजिए कि आप बेंगलूरु से उत्तराखंड में केदारनाथ की यात्रा करते हैं। उस सूरत में आपको पहले विमान यात्रा करनी पड़ती है और बाद में सड़क से केदारनाथ पहुंचना होता है। उस स्थिति में आप एलटीए का दावा तभी कर सकते हैं, जब आपने मान्यता प्राप्त सार्वजनिक परिवहन साधन यानी सरकारी बस का इस्तेमाल किया जो। आप एलटीए में टैक्सी का किराया तभी शामिल कर सकते हैं, जब आपके गंतव्य तक कोई बस नहीं चलती हो। आपको टैक्सी के जरिये तय की गई दूरी देखनी होगी और उतनी दूरी का रेलवे की प्रथम श्रेणी का किराया ही आप एलटीए में शामिल कर सकते हैं।
 
सहयात्री भी अहम
 
एलटीए का दावा करते समय परिवार के सदस्यों के टिकट का इस्तेमाल करना झंझट वाला काम हो सकता है। आपकी पत्नी/पति या बच्चे आप पर आश्रित नहीं हों तो भी आप उनके टिकट का इस्तेमाल कर सकते हैं। क्लियरटैक्स डॉट कॉम के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी अर्चित गुप्ता कहते हैं, 'अगर बच्चों का जन्म 1 अक्टूबर, 1998 के बाद हुआ है तो एलटीए में केवल दो बच्चों को शामिल किया जा सकता है। सौतेले बच्चे या गोद लिए बच्चे भी इन्हीं में शामिल होंगे।' इसका मतलब है कि अगर आपके तीन बच्चों का जन्म अक्टूबर, 1998 से पहले हुआ था तो आप उन तीनों के किराये को एलटीए में शामिल कर सकते हैं। लेकिन उस तारीख के बाद जन्मे केवल दो बच्चों का किराया लिया जा सकता है। अलबत्ता गुप्ता का कहना है, 'अगर आपके जुड़वां बच्चे हैं या एक साथ तीन संतान हुई हैं तो कर विभाग उन्हें एक ही बच्चे के रूप में गिनेगा।' वह यह भी कहते हैं कि माता-पिता या भाई/बहन के टिकट को एलटीए में केवल तभी शामिल किया जा सकता है, जब वे आप पर आश्रित हों। पुत्रवधू, दादा/नाना या नाती-पोते को एलटीए में शामिल नहीं किया जा सकता।
 
दावा नहीं तो आगे सही
 
अगर किसी कर्मचारी ने चार साल की अवधि में निश्चित एक या दो यात्राओं के लिए एलटीए का दावा नहीं किया है तो उसे एक यात्रा का एलटीए चार साल की अगली अवधि के दौरान लेने का अधिकार मिलता है। ऐसी सूरत में उसे अगले चार साल के दौरान तीन बार एलटीए लेने का मौका मिल जाएगा। लेकिन इसका फायदा उठाने के लिए उसे उन चार सालों में से पहले साल ही यात्रा करनी होगी। अग्रवाल कहते हैं, 'एलटीए इकलौती छूट है, जिसका दावा कैलेंडर वर्ष के दौरान करना होता है। बाकी सभी प्रकार की छूट वित्त वर्ष के मुताबिक चलती हैं।'
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