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डेट फंड देंगे प्रतिफल दमदार अगर निवेश में आप रहे खबरदार
प्रिया नायर /  January 22, 2017

गुडग़ांव के रोहित सेठ की बतौर निवेशक धारणा ही 2016 में बदल गई। सावधि जमाओं और पीपीएफ में प्रमुख निवेशक होते हुए उन्होंने 70:30 के डेट-इक्विटी आवंटन पर जोर दिया। इसे लेकर उन्हें निराशा भी नहीं हुई। उनके डेट फंड 12-14 फीसदी का प्रतिफल अर्जित कर रहे हैं, जो सावधि जमाओं के 8-8.5 फीसदी के प्रतिफल से ज्यादा है। वह कहते हैं, 'मैं समझता हूं कि डेट फंड में प्रतिफल अनिश्चित हो सकता है। लेकिन मैंने कम से कम 5-6 साल के लिए इनमें निवेश किया और उस अवधि में प्रतिफल खराब नहीं रहेगा। साथ ही मैंने किसी एक योजना में भी पूरी रकम निवेश नहीं की। मैंने सिस्टमैटिक ट्रांसफर प्लांस (एसटीपी) और सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये निवेश किया।'

 
वेल्दबीइंग एडवाइजर्स के संस्थापक अमित कुकरेजा निवेश के मामलों में सेठी के सलाहकार हैं। वह डेट फंड में संभावना तलाशने वाले निवेशकों के लिए सलाह देते हैं। उनका कहना है, 'डेट फंड गारंटी के साथ प्रतिफल वाले उत्पाद नहीं हैं। ऐसा भी समय आता है जब ये फंड सावधि जमाओं से कम प्रतिफल दे सकते हैं। हालांकि प्रतिफल की संभावना वृहद-आर्थिक हालात, ऋण जोखिम और ब्याज दर परिदृश्य के आधार पर अलग अलग होती है।'
 
फ्रैंकलिन टेंपलटन इन्वेस्टमेंट्ïस में लोकल ऐसेट मैनेजमेंट फिक्स्ड इनकम के प्रबंध निदेशक संतोष कामत कहते हैं कि ऐसे तीन प्रमुख जोखिम हैं जिन पर निवेशकों को डेट फंडों के चयन के वक्त ध्यान में रखने की जरूरत होती है। ये हैं ब्याज दर जोखिम  (ब्याज दर में बदलाव संबद्घ बॉन्डों की कीमतें प्रभावित करता है, क्योंकि ब्याज दर और बॉन्ड कीमतों के बीच विपरीत संबंध है), ऋण जोखिम (कम ऋण गुणवत्ता पोर्टफोलियो अधिक प्रतिफल की पेशकश करते हैं, पर इससे ऋण जोखिम बढ़ता है) और तरलता का जोखिम। इक्विटी की तरह किसी डेट फंड योजना के चयन में भी इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि निवेशक कितना जोखिम उठाने की क्षमता रखता है।
 
निवेश की अवधि
 
कामत का कहना है कि ज्यादातर डेट फंड निवेश अवधि से जुड़े होते हैं जिसमें निवेशकों को उचित जोखिम-समायोजित प्रतिफल प्राप्त करने में मदद मिलती है। उदाहरण के लिए, अल्पावधि में अतिरिक्त निवेश की संभावना तलाश रहे निवेशक मनी मार्केट फंडों पर विचार कर सकते हैं जबकि अल्पावधि से मध्यावधि में निवेश करने वाले निवेशक शॉर्ट टर्म/मीडियम-टर्म फंडों में निवेश कर सकते हैं। इसी तरह दीर्घावधि के लिए निवेशक गिल्ट फंडों या इनकम फंडों में निवेश कर सकते हैं जिनका निवेश अधिक परिपक्वता वाली योजनाओं से जुड़ा होता है। रिसर्च मॉर्निंगस्टार के निदेशक कौस्तुभ बेलापुरकर का कहना है, 'संक्षिप्त अवधि के निवेश के लिए, आपको ऐसी योजनाओं की जरूरत है जो कम अस्थिर हों और अल्ट्रा-शॉर्ट टर्म इसके लिए अनुकूल हैं।'
 
सेबी में पंजीकृत निवेश सलाहकार अभिनव गुलेचा का कहना है, 'मैं वित्तीय लक्ष्य की समय-सीमा के अनुसार डेट फंड योजनाओं का चयन नहीं करता हूं। इसके बजाय मैं वित्तीय लक्ष्य की समय-सीमा की चिंता किए बगैर सिर्फ लिक्विड योजनाओं का सुझाव देता हूं। हर समय निवेश पोर्टफोलियो में निर्धारित आय के प्रतिफल पर जोर नहीं देना चाहिए जिसके बजाय न्यूनतम ऋण क्रेडिट और अवधि जोखिम पर भी विचार करना चाहिए।'
 
ब्याज दर का जोखिम
 
डेट फंडों में, प्रतिफल ब्याज दर चक्र के हिसाब से अलग अलग होगा। शॉर्ट-टर्म फंडों के मामले में प्रतिफल आरबीआई की नीतिगत दरों पर निर्भर है। ऐक्सिस म्युचुअल फंड में फिक्स्ड इनकम के प्रमुख आर शिवकुमार का कहना है कि हालांकि गिल्ट फंड जैसे लंबी अवधि के फंडों के मामले में प्रतिफल वृहद-आर्थिक मानकों पर निर्भर करता है। 
 
क्रेडिट दर का जोखिम
 
म्युचुअल फंड जिन प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं, उनको अलग-अललग क्रेडिट रेटिंग हासिल होती हैं। इन रेटिंग से पता चलता है कि कर्ज मांगने वाला कितना अधिक कर्ज पाने का हकदार है। कम रेटिंग वाले बॉन्ड अधिक प्रतिफल देने के लिए अहम समझे जाते हैं। शिवकुमार का कहना है, 'अक्सर लंबी अवधि के फंडों में निवेश कम रेटिंग वाली प्रतिभूतियों में नहीं लगाया जाएगा क्योंकि इसका मतलब होगा कि ब्याज दर जोखिम और ऋण जोखिम दोनों से जुडऩा।'
 
पिछला प्रदर्शन कितना अहम
 
शिवकुमार का कहना है कि यह जरूरी नहीं है कि किसी फंड का पिछला प्रदर्शन भविष्य के प्रदर्शन का संकेत हो। उदाहरण के लिए पिछले एक साल की की अवधि में फंडों ने अच्छा प्रतिफल दिया। लेकिन अब आरबीआई ने दरों में कटौती कर दी है तो ऐसे में आपको इन फंडों से समान प्रतिफल की उम्मीद नहीं करनी चाहिए। यह देखना जरूरी है कि फंड ने कितनी बार संबद्घ सूचकांक को मात दी। इससे फंड प्रबंधकों की शानदार प्रतिफल देने की क्षमता का पता चलता है।
 
कराधान
 
डेट फंडों को यदि तीन साल से अधिक समय तक बनाए रखा जाए तो ये कराधान के साथ दीर्घावधि पूंजीगत लाभ मुहैया कराते हैं। कुकरेजा का कहना है कि इस स्थिति में ये एफडी की तुलना में बेहतर निवेश हो सकते हैं।
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