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डिजिटल लेनदेन बढ़ा तो शिकायतों में भी इजाफा
तिनेश भसीन /  January 15, 2017

सरकार की नोटबंदी की मुहिम के बाद लोग डिजिटल भुगतान का विकल्प अपनाने को बाध्य हुए हैं। लेकिन जिस रफ्तार से इलेक्ट्रॉनिक लेनदेन बढ़ रहे हैं, उसी तेजी से इनसे जुड़ी शिकायतें भी बढ़ रही हैं। ऑनलाइन खरीदारी करते समय दीपिका कोहली ने भुगतान के लिए एक मोबाइल वॉलेट इस्तेमाल किया। सेवा प्रदाता का उन्हेंं ईमेल आया कि उनका लेनदेन सफल रहा, लेकिन ऑनलाइन खुदरा विक्रेता ने दावा किया कि उसे कोई पैसा नहीं मिला। उन्हें खरीदारी किए एक सप्ताह बीत चुका है, लेकिन उनका पैसा कहां गायब हो गया, किसी को नहीं पता। 

 
पेयू इंडिया के प्रमुख (सेवा डिलिवरी) हरि वेलायुधन कहते हैं, 'लेनदेन में इस्तेमाल किए जाने वाले माध्यम के मुताबिक ही निपटान में कुछ सेकंड से लेकर सात कार्यदिवस तक का वक्त लग सकता है। अगर इसमें ज्यादा समय लगता है तो आमतौर पर यह पैसा एक पूल अकाउंट में रखा जाता है। वॉलेट या बैंक का यह अकाउंट भुगतान नेटवर्क प्रदाता के पास रहता है।' भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने असफल एटीएम (ऑटोमेटेड टेलर मशीन) लेनदेन के समाधान की समयसीमा तय की है, लेकिन वॉलेट या यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस जैसे नए माध्यमों के लिए ऐसा कोई दिशानिर्देश जारी नहीं किया गया है। ग्राहक द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद बैंकों को 7 कार्यदिवसों के भीतर असफल एटीएम लेनदेन का समाधान करना पड़ता है, अन्यथा प्रत्येक एक दिन की देरी पर 100 रुपये का जुर्माना वसूला जाता है।
 
कैसे वापस मिलेंगे पैसे 
 
अगर आपको या विक्रेता को लेनदेन के बाद 2 से 7 दिन में पैसा नहीं मिलता है तो आपको वॉलेट सेवा प्रदाता से संपर्क करना चाहिए। मोबिक्विक के उपाध्यक्ष (विपणन) आकाश गुप्ता कहते हैं, 'नोटबंदी के बाद लेनदेन की संख्या करीब 10 गुना बढ़ी है, लेकिन कर्मचारियों की संख्या में केवल डेढ़ से दोगुना बढ़ोतरी हुई है। इस वजह से कुछ वॉलेट कंपनियां असफल लेनदेन की शिकायतों के निपटारे में ज्यादा समय ले सकती हैं।'
 
हालांकि वॉलेट कंपनियां अपने कर्मचारियों की तादाद तेजी से बढ़ा रही हैं। नवंबर से पहले मोबिक्विक की टीम में 160 कर्मचारी थे, लेकिन मार्च के अंत तक यह आंकड़ा 1,000 तक पहुंच सकता है। अगर आपको प्रारंभिक स्तर पर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता है तो मामले को उच्च अधिकारियों के समक्ष उठाएं। दी मोबाइल वॉलेट के प्रबंध निदेशक विनय कलंत्री कहते हैं, 'हर वॉलेट कंपनी ने अपनी वेबसाइट पर शिकायत निवारण दिशानिर्देश दिए हुए हैं, जिनमें विभिन्न अधिकारियों के संपर्क नंबर दिए गए हैं।' दिक्कतों का निवारण करने वाला अंतिम अधिकारी शिकायत निवारण अधिकारी है। फ्रीचार्ज के प्रवक्ता ने कहा, 'अगर ग्राहक कंपनी के उच्च स्तरीय अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी संतुष्ट नहीं हैं तो वे आरबीआई के शिकायत निवारण प्रकोष्ठ से संपर्क कर सकते हैं।'
 
चिल्लर के सह-संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी सोनी जॉय कहते हैं कि कंपनी या बैंक के सोशल मीडिया पेज पर पोस्ट करने से भी त्वरित समाधान में मदद मिलती है। उन्होंने कहा, 'ब्रांड अपनी सामाजिक छवि को लेकर बहुत अधिक सजग होते हैं। अगर शिकायत करने के बाद 7 दिन से ज्यादा समय बीत चुका है तो यूजर ब्रांडों के सोशल मीडिया हैंडल के जरिये उनसे संपर्क कर सकता है।' सात दिन का समय आपको अपना धन मिलने में लगने वाला अधिकतम समय है, इसलिए आपको 48 घंटे बाद ही वॉलेट कंपनी से संपर्क करना चाहिए। 
 
नेट बैंकिंग के जरिये धन हस्तांतरण 
 
जब कोई व्यक्ति नेट बैंकिंग के जरिये बैंक खाते से वॉलेट में पैसा भेजता है तो यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होती है। इन दोनों के बीच एक पेमेंट गेटवे होता है, जो बैंक से पैसा लेता है और उसे वॉलेट में भेजता है। लेनदेन बैंक खाते से पैसा निकलने के बाद भी असफल हो सकता है, लेकिन यह पैसा खराब कनेक्टिविटी, सर्वर में दिक्कत आदि वजहों से पेमेंट गेटवे के पास नहीं पहुंचता है। पेमेंट गेटवे कंपनियां बैंकों के साथ भुगतान का निपटान रोजाना करती हैं। यूजर को दो कार्यदिवसों में अपना पैसा अपने खाते में मिल जाना चाहिए। अगर उसे पैसा नहीं मिलता है तो उसे संपर्क करना चाहिए। अगर पेमेंट गेटवे को पैसा मिलने के बाद लेनदेन असफल होता है तो यह पैसा दो कार्यदिवसों के भीतर पहुंचने की संभावना होती है। वेलायुधन कहते हैं, 'संबंधित व्यक्तियों को इस मसले के समाधान में मदद के लिए वॉलेट कंपनी से संपर्क करना चाहिए।'
 
पेटीएम मेंं वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक ऐबट कहते हैं कि देरी उन मामलों में होती है जब कोई ग्राहक वॉलेट से बैंक में पैसा भेजता है। आमतौर पर बैंक के पास रिफंड की लंबी फेहरिस्त रहने के कारण रकम मिलने में देर होती है। हम तुरंत ग्राहक को संदर्भ संख्या भेजते हैं, जिसे त्वरित समाधान के लिए पेश किया जा सकता है। ऐबट कहते हैं, 'पेटीएम का बैंक की प्रक्रिया पर कोई नियंत्रण नहीं है। हम केवल हमसे संपर्क करने वाले ग्राहकों को तरीका बता सकते हैं।'
 
कार्ड से हस्तांतरण
 
यह प्रक्रिया भी नेट बैंकिंग के जरिये हस्तांतरण के समान है। लेकिन इसमें यूजर के बैंक खाते या कार्ड में पैसा वापस आने में सात दिन तक का समय लग सकता है। यह उस व्यक्ति के बैंक द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करता है। कुछ बैंकों के पास सेंट्रल पूल है, जिसमें से पैसा ग्राहक के खाते में भेजा जाता है। वहीं कुछ बैंक हर शाखा के लिए अलग पूल खाते रखते हैं। ऐसे मामलों में लेनदेन असफल होने पर व्यक्ति को अपना पैसा वापस मिलने में ज्यादा समय लग सकता है। 
 
यदि व्यापारी के स्तर पर विफल हो जाए लेनदेन 
 
अगर आप किसी विक्रेता को वॉलेट से भुगतान करते हैं और दीपिका कोहली की ही तरह आपका लेनदेन भी पूरा नहीं होता है तो यह पैसा आपके  वॉलेट में फौरन लौट आना चाहिए। कोई विक्रेता तभी वॉलेट से भुगतान स्वीकार करता है जब वह उसी प्लेटफॉर्म पर होता है। इसमें अन्य कोई पक्ष शामिल नहीं होता है, इसलिए असफल लेनदेन का पैसा वापस आने में महज कुछ सकेंड लगेंगे। किसी भी व्यक्ति को इस तरह लेनदेन असफल होने पर अगले दिन अपने वॉलेट की मदद लेनी चाहिए। यह उस मामले में भी लागू होता है जब आपने वॉलेट का इस्तेमाल कर बस, ट्रेन या फ्लाइट बुक की हैं और बाद में टिकट रद्द करते हैं। विक्रेता के रिफंड जारी करने के बाद व्यक्ति के वॉलेट में यह पैसा दिखाई देने में कुछ मिनट से ज्यादा समय नहीं लगना चाहिए। मोबिक्विक के गुप्ता कहते हैं, 'डिजिटल क्षेत्र में व्यक्ति का सजग होना जरूरी है क्योंकि यह भुगतान का नया तरीका है। कंपनियां डिजिटल भुगतान की प्रणाली और प्रक्रिया विकसित कर रहे हैं।'
Keyword: digital payment, paytm,,
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