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इस साल हालात भापें फिर रकम लगाएं
तिनेश भसीन /  January 08, 2017

इस साल खुद को निवेश पर कम प्रतिफल के लिए तैयार कर लीजिए क्योंकि नोटबंदी का असर सभी संपत्ति वर्गों पर बरकरार रहेगा। लेकिन अच्छी बात यह है कि अगर महंगाई गिरकर 5 फीसदी से नीचे आई तो आपका असल प्रतिफल ठीक रह सकता है।
ऐक्सिस म्युचुअल फंड के प्रमुख (इक्विटीज) जिनेश गोपानी कहते हैं, 'इस साल निवेशकों को बहुत अधिक प्रतिफल नहीं मिलने जा रहा है। मांग घटने की वजह से अगली तिमाही कमजोर रहने के आसार हैं। अब भी हर कोई यही समझने की कोशिश कर रहा है कि नोटबंदी का अर्थव्यवस्था पर कितना असर पड़ेगा।'
नोटबंदी के अलावा नए साल में कुछ और अवसर और चुनौतियां हैं। फंड प्रबंधकों का मानना है कि अगर निवेशक अपने पोर्टफोलियो में परिस्थितियों के हिसाब से बदलाव करें तो वे बेहतर प्रतिफल अर्जित कर सकते हैं।

फिर वापस आ जाएगी पहले जैसी मांग
वित्त मंत्री अरुण जेटली बजट में कुछ प्रोत्साहनों की घोषणा कर सकते हैं, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ेगी। पिछले साल के बजट भाषण के आधार पर कॉरपोरेट टैक्स की दर में कमी किए जाने के आसार हैं। जेटली ने कहा था कि सरकार अगले पांच साल में किसानों की आमदनी दोगुनी करना चाहती है और अगले चार साल में कॉरपोरेट टैक्स की दर घटाकर 25 फीसदी करने का इरादा रखती है। निवेश प्र्रबंधकों का मानना है कि अगर ये कदम उठाए गए तो उपभोक्ता वस्तुओं की मांग फिर बढ़ेगी।
बीएनपी पारिबा म्युचुअल फंड में मुख्य निवेश अधिकारी आनंद शाह कहते हैं, 'कर की दर में मामूली कमी से भी कंपनियों के मुनाफे में इजाफा होगा और उनके प्राइस टू अर्निंग रेश्यो पर सकारात्मक असर पड़ेगा।' गोपानी को लगता है कि उपभोक्ता क्षेत्र में शेयरों का मूल्यांकन ज्यादा है, लेकिन इनमें निवेश करना अच्छा मौका होगा।

वित्तीय क्षेत्र का आकर्षण रहेगा बरकरार
पिछले साल निजी बैंक निवेशकों के पसंदीदा बने रहे और इस साल भी ऐसा ही रुझान बना रहेगा। सरकार आर्थिक वृद्धि बढ़ाने के लिए कदम उठा रही है, इसलिए निवेशक बड़े सरकारी बैंकों में निवेश को भी तरजीह देंगे। खपत में बढ़ोतरी होने से ऋण की मांग भी तेजी से बढ़ेगी क्योंकि कंपनियों को मांग पूरी करने के लिए ज्यादा से ज्यादा उत्पादन करना होगा और इसके लिए उन्हें ज्यादा पूंजी की दरकार होगी।
फंड प्रबंधकों का मानना है कि ऋण की मांग दूसरी छमाही में बढ़ेगी। ऋणदाता कंपनियों को भी फायदा होगा क्योंकि सरकार लगातार बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर खर्च कर रही है। सरकार किफायती आवास को बढ़ावा दे रही है, जिसका फायदा निवेशकों को भी मिल सकता है। इसका फायदा लेेने के लिए निवेशकों को हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों में निवेश के मौके तलााशने होंगे। हालांकि सूचीबद्ध डेवलपर कंपनियों में निवेश से बचें क्योंकि उनमें से ज्यादातर की किसी एक ही भौगोलिक क्षेत्र में पकड़ है और वे किफायती आवास से नहीं जुड़ी हैं।

उद्योग और सेवाओं पर जीएसटी का असर
सरकार ने कहा है कि वह 2017-18 में वस्तु एïवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करना चाहती है। उसके लागू होने पर आरंभ में कुछ दिक्कतें आएंगी। इसके लागू होने को लेकर स्थिति साफ होने तक वितरक और थोक विक्रेता सामान का स्टॉक करने से बच सकते हैं। इससे मांग में अस्थायी सुस्ती आएगी। इसके बावजूद जीएसटी से कुछ क्षेत्रों को फौरन फायदा होगा। इनमें एफएमसीजी, ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स कंपनियां और वाहन विनिर्माता कंपनियां शामिल हैं।

संचय आधारित डेट फंड करेंगे बेहतर प्रदर्शन
डेट निवेशकों को उन फंडों में निवेश से बचना होगा, जो केवल सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं और जिन्होंने 2016 में दो अंकों में प्रतिफल दिया है। इसके बजाय उन फंडों पर ध्यान दिया जाना चाहिए, जो परिपक्वता तक प्रतिभूतियों को अपने पास रखते हैं। क्वांटम एएमसी के प्रमुख (फिक्स्ड इनकम) मूर्ति नागराजन कहते हैं, 'सरकारी प्रतिभूतियों में उतार-चढ़ाव रहने के आसार हैं। नोटबंदी के बाद बैंकों के पास अथाह पैसा आ गया है और उन्हें सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करना होगा। इससे ब्याज दरों में कमी आएगी। महंगाई गिरने पर आरबीआई भी दरों में कटौती कर सकता है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने यह संकेत दिया है कि वह इस साल तीन बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी करेगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय निवेशक सरकारी प्रतिभूतियों की बिक्री कर रहे हैं।'एसबीआई म्युचुअल फंड के प्रमुख (फिक्स्ड इनकम) राजीव राधाकृष्णन ने इससे सहमति जताते हुए कहा, 'पिछले एक साल के दौरान सरकारी बॉन्डों के प्रतिफल पर विदेशी बाजारों का असर खत्म हो गया है और इनमें विशेष रूप से वर्ष की दूसरी छमाही में भारी तेजी देेखने को मिली है। लेकिन 2017 चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।' ऐसे माहौल में निवेशक उन संचयी फंडों से जुड़े रहकर भी फायदा कमा सकते हैं, जो लघु अवधि की प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं। निवेशक इनमें 7 से 8 फीसदी प्रतिफल की उम्मीद कर सकते हैं।

रीट्स के जरिये रियल्टी में निवेश
सुस्त बिक्री की वजह से रियल एस्टेट बाजार पहले ही मुश्किल दौर से गुजर रहा है, इसलिए निवेशकों के लिए सीधे प्रॉपर्टी में निवेश कर पैसा कमाना मुश्किल होगा। जेएलएल इंडिया के चेयरमैन और कंट्री हेड अनुज पुरी कहते हैं, 'लक्जरी प्रॉपर्टी की कीमतों में गिरावट के आसार हैं। किफायती मकान महानगरों के बाहरी इलाकों मेंं बनाए जा रहे हैं, जहां नोटबंदी की वजह से एक साल या इसके बाद जमीन के दाम गिरने की संभावना है।'
इस वजह से निवेशकों को रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (रीट्स) में निवेश करना चाहिए, जो जल्द ही पेश किए जाने के आसार हैं। पुरी कहते हैं, 'रीट्स के लिए भारी संभावनाएं हैं। इस समय दफ्तरों का तकरीबन 22.9 करोड़ वर्ग फुट क्षेत्र रीट के मानकों पर खरा उतरता है। अगर इसके 50 फीसदी भी सूचीबद्ध हुए तो हम 18.5 अरब डॉलर की रीट सूचीबद्धता की उम्मीद कर रहे हैं।' आकार और प्रतिफल की संभावना का अभी कुछ पता नहीं चला है। कुछ सूचीबद्धताओं के बाद इस पर स्थिति साफ होगी।

कागजों पर सोना खरीदने में निवेशकों की सहजता बढ़ेगी
सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड (एसजीबी) योजना लोगों का सोने में निवेश का तरीका बदल देगी। अब तक भारतीय लोग भौतिक सोने को पसंद करते रहे हैं, भले ही यह खरीदारी कुछ की जरूरत के लिए हो या निवेश के लिए। इस प्रवृत्ति को गोल्ड ईटीएफ बदल सकते हैं। केडिया कमोडिटी के निदेशक अजय केडिया कहते हैं, 'हमारा अनुमान है कि निवेशकों द्वारा सोने की खरीद में इलेक्ट्रॉनिक तरीका अपनाए जाने से 2017 में भौतिक सोने की मांग कम से कम 30 फीसदी घटेगी।'
एक सराफा विशेषज्ञ भार्गव वैद्य इससे सहमति जताते हुए कहते हैं, 'लोगों को सॉवरिन गोल्ड बॉन्ड योजना आकर्षक नजर आ रही है क्योंकि इसमें सरकारी गारंटी मिल रही है और बेहतर प्रतिफल की संभावना भी दिखाई दे रही है।' एसजीबी के अलावा इस साल एमसीएक्स पर सोने की नीलामी शुरू होगी, जिससे सोने की भौतिक मांग और घटेगी।

Keyword: investment, return, inflation,
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