Search BS HindiWeb         Follow us on 
Business Standard
Monday, April 24, 2017 06:42 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|
 
होम मुद्रा खबर

बैंकों पर दबाव अच्छा खासा
बीएस संवाददाता / मुंबई 12 29, 2016

आरबीआई की रिपोर्ट : पटेल ने कहा, विमुद्रीकरण का होगा सकारात्मक असर

भारतीय रिजर्व बैंक की वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट में देश में बैंकिंग क्षेत्र की सेहत की चिंताजनक तस्वीर जताई गई है। बैंक इस समय कारोबार में कम वृद्धि के साथ साथ अपनी परिसंपत्तियों की गुणवत्ता में आई भारी गिरावट से जूझ रहे हैं। हालांकि भारत की वित्तीय प्रणाली कुल मिलाकर स्थिर है, लेकिन बैंकों, खासतौर पर सरकारी बैंकों पर दबाव कुछ ज्यादा ही है।

केंद्रीय बैंक ने अपनी द्वि-वार्षिक रिपोर्ट में कहा, 'परिसंपत्तियों की गुणवत्ता में लगातार गिरावट की वजह से बैंकिंग क्षेत्र के लिए जोखिम बढ़ गया है।' इस रिपोर्ट में सभी वित्तीय क्षेत्र के नियामकों से आंकड़े लिए गए। रिपोर्ट के अनुसार बैंकों की कारोबार वृद्धि कमजोर है, खासतौर से सरकारी बैंक निजी क्षेत्र के बैंकों से पीछे हैं। इस वित्त वर्ष की पहली छमाही में बैंकों के मुनाफे पर भी असर पड़ा है। 

बैंकों के फंसे हुए कर्ज का अनुपात भी बढ़ गया है। मार्च 2016 में यह 7.8 फीसदी था जो 6 महीने बाद बढ़कर 9.1 फीसदी हो गया। इस तरह सकल दबाव अग्रिम अनुपात 11.5 प्रतिशत से बढ़कर 12.3 प्रतिशत हो गया। इसकी वजह यह रही कि बड़े बैंकों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भारी गिरावट आई और कुल खराब कर्ज में उनका हिस्सा बढ़ गया। चिंता की बात यह है कि बड़े बैंकों में विशेष खातों की तादाद बढ़ गई। ये वे खाते होते हैं जिनमें 61 से 90 दिन के बीच बकाया का भुगतान नहीं आता है तो उनकी निगरानी की जाती है। अगर कर्ज की किस्त 91 दिन तक नहीं चुकाई जाए तो वह फंसा कर्ज बन जाता है। रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर अर्थव्यवस्था के हालात में और ज्यादा गिरावट आई तो बैंकों के फंसे कर्ज का अनुपात भी बढ़ सकता है। 

केंद्रीय बैंक के गवर्नर ऊर्जित पटेल ने रिपोर्ट के आमुख में कहा कि विमुद्रीकरण की प्रक्रिया से आगे चलकर अर्थव्यवस्था में व्यापक सुधार होंगे जिनका दूरगामी असर होगा। हालांकि निकट भविष्य में लोगों को परेशानी हो सकती है। उन्होंने कहा कि डिजिटल भुगतान बढऩे से फायदा होगा, जवाबदेही और पारदर्शिता बढ़ेगी। पटेल ने कहा कि अमेरिका में दरों में वृद्धि और कच्चे तेल के साथ अन्य जिंसों के बढ़ते दामों का असर दूसरे क्षेत्रों में भी हो सकता है। हालांकि घरेलू माहौल अभी स्थिर बना हुआ है और मुद्रास्फीति में खासी कमी आई है। जीएसटी, दिवालिया कानून और कालेधन पर सरकार की सख्ती काफी महत्त्वपूर्ण उपाय हैं और इनकी बदौलत अर्थव्यवस्था मजबूत होनी चाहिए। 

रिपोर्ट के अनुसार भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 11 महीने के आयात के लिए काफी है। रिपोर्ट में कंपनी क्षेत्र का जिक्र करते हुए कहा गया है कि कंपनियों पर दबाव बढ़ गया है जिसका संकेत प्रमोटरों द्वारा शेयर गिरवी रखने की घटनाओं से मिलता है। कालेधन पर नियंत्रण का सबसे अच्छा तरीका सेवाओं की गुणवत्ता और प्रशासनिक सुधार है। साथ ही सरकार को अत्यधिक नियमों से बचते हुए कड़े जुर्माने का प्रावधान करना चाहिए और अनुपालन योग्य कर ढांचा बनाया जाना चाहिए। 
Keyword: 1000, 500, note, ban, narendra modi, arun jaitley, black money,,
Advertisements
  Impact of Network performance on loyalty of smartphone users
   Impact of connected mobile devices on consumer video needs
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
Advertisements 
E-DINAR: The startup of the year 2016. Click to know more
E-DINAR - a new generation of P2P exchange
  आपका मत
 क्या रेरा के लागू होने से डेवलपरों पर कसेगी नकेल?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS General News   Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.