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संपत्ति बेचने से पहले तैयार रखिए अपने कर का लेखाजोखा
तिनेश भसीन /  December 18, 2016

अगली बार जब आप कोई संपत्ति बेचते हैं तो आपको आयकर विभाग से चि_ïी भी मिल सकती है, जिसमें आपसे पूछा जा सकता है कि आपने वह संपत्ति कब खरीदी थी और उसे खरीदने के लिए रकम आपने कहां से जुटाई थी। बेनामी संपत्ति के मालिकों का पता लगाने के लिए सरकार जो कवायद कर रही है, यह भी उसका एक हिस्सा हो सकता है। वकीलों का कहना है कि खरीदार से पूछताछ करना पहले आयकर विभाग का आम तरीका था। उस समय अगर कोई मकान खरीदता था तो उसे बुलाकर खरीदारी के लिए जुटाई गई रकम का स्रोत आदि पूछा जाता था। लेकिन मुमकिन है कि विभाग अब मकान बेचने वाले को भी बुलाए और तफ्तीश करे। 

 
आय घोषणा योजना (आईडीएस), 2016, विमुद्रीकरण और काला धन इक_ïा करने वालों को नकदी जमा करने तथा जुर्माना अदा करने का एक और मौका दिए जाने के बाद अब यही लगता है कि सरकार कई संपत्तियां रखने वाले लोगों को निशाना बनाएगी। गोवा में 13 नवंबर को अपने भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भ्रष्टïाचार तथा काले धन का सफाया करने के लिए इसके बाद बेनामी संपत्तियां ही उनके निशाने पर होंगी।
 
संभलकर करें औरों की मदद
 
बेनामी संपत्ति वे संपत्तियां होती हैं, जो किसी एक व्यक्ति के नाम होती हैं, लेकिन उन्हें खरीदने के लिए रकम किसी और ने अदा की होती है। हालांकि इसमें कुछ अपवाद भी हैं। उदाहरण के लिए आप किसी ऐसी संपत्ति की कीमत अदा कर सकते हैं, जो पूरी तरह से आपके पति/पत्नी अथवा बच्चों के नाम हो। लेकिन आप किसी ऐसी संपत्ति के लिए रकम अदा नहीं कर सकते हैं, जो आपके भाई अथवा बहन, माता-पिता अथवा किसी अन्य परिजन के नाम हो। ऐसी संपत्ति आप कानूनी तौर पर तभी खरीद सकते हैं, जब आप भी उसके मालिक हों। आप पूरी तरह कानूनी और मेहनत से कमाई गर्ह रकम से ही संपत्ति क्यों न खरीद रहे हों, ये नियम हर हाल में लागू होंगे।
 
लेकिन अगर इस नियम से आपको परेशानी हो रही है तो राहत का एक रास्ता है। कर विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी व्यक्ति अपने नाम पर कोई संपत्ति खरीद सकता है और बाद में उसी संपत्ति को वह बतौर उपहार अपने किसी संबंधी के नाम कर सकता है। लेकिन इसमें खर्च अधिक हो जाएगा क्योंकि उस व्यक्ति को गिफ्ट डीड के जरिये मालिकाना हक का तबादला करना होगा और स्टांप शुल्क भी अदा करना होगा। अगर संपत्ति हिंदू अविभाजित परिवार के 'कर्ता' के नाम है अथवा ऐसे व्यक्तियों के नाम है, जिनके पास विश्वास भरी जिम्मेदारी है मसलन न्यासी, निर्वाहक, साझेदार, कंपनियों के निदेशक अथवा अन्य तो उस संपत्ति को बेनामी नहीं माना जाएगा। बेनामी लेनदेन (निषेध) अधिनियम के अंतर्गत 'संपत्ति' की जो व्यापक परिभाषा दी गई है, उसमें जमीन, फ्लैट या मकान जैसी अचल संपत्तियां ही नहीं हैं बल्कि सोने, शेयर, म्युचुअल फंड और बैंक जमा जैसी चल संपत्तियां भी शामिल हैं। एक अहम बदलाव यह है कि इसमें वे संपत्तियां भी शामिल हैं, जिनकी शक्ल बदल दी गई है। इसका मतलब है कि यदि कोई संपत्ति बेच दी गई है तो उससे जो भी रकम या उसकी जो भी कीमत हासिल हुई है, उसे भी बेनामी ही माना जाएगा। पुराने कानून में ऐसा नहीं था।
 
सरकार सब जानती है
 
रियल एस्टेट कई लोगों के लिए काले धन को ठिकाने लगाने का सबसे बड़ा अड्डïा हो सकता है। इसके लिए कई तरीके आजमाए जाते हैं। आयकर अधिकारियों को भनक न लगने पाए, इसके लिए संपत्ति करीबी रिश्तेदारों के नाम खरीदी जाती है और कई बार तो नौकरों या ड्राइवरों के नाम भी खरीद ली जाती है। कॉलियर्स इंटरनैशनल (इंडिया) के राष्टï्रीय निदेशक, नॉलेज सिस्टम्स अमित ओबेरॉय कहते हैं, 'आम तौर पर काले धन वाले लोग बड़ी-बड़ी जमीनें ही खरीदते हैं, जिन पर बाद में कुछ बनाया जा सकता है या वे ऊंची कीमत वाली आलीशान संपत्ति में पैसा लगाते हैं।' हालांकि इस बात का निश्चित आंकड़ा किसी के भी पास नहीं है कि कितने बेनामी सौदे हुए या होते हैं, लेकिन विशेषज्ञों को लगता है कि आलीशान संपत्तियों की बिक्री में 25 से 30 फीसदी हिस्सा बेनामी सौदों का ही होता होगा। अगर बात जमीन की है तो बेनामी सौदों की हिस्सेदारी ज्यादा भी हो सकती है।
 
ऐसे सौदों पर लगाम कसने के लिए सरकार ने कई तरह के कदम उठाए हैं और उसके पास इससे जुड़ी ढेर सारी जानकारी है। नांगिया ऐंड कंपनी में कार्यकारी निदेशक नेहा मल्होत्रा कहती हैं: केंद्र ने नियमों में बदलाव किया है और मोटी रकम वाले विभिन्न सौदों या लेनदेन में स्थायी खाता संख्या (पैन) का उल्लेख अनिवार्य कर दिया है, वित्तीय संस्थानों को वार्षिक सूचना दाखिल करनी पड़ती है और संपत्ति रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया काफी सख्त कर दी गई है। दूसरे देशों के साथ वित्तीय जानकारी को साझा करने की संधियां भी कर ली गई हैं। मल्होत्रा मानती हैं कि अब मुमकिन ही नहीं है कि बड़े सौदे या लेनदेन हों और उन पर सरकार की नजर न पड़े। आयकर विभाग तो जल्द ही लोगों के सोशल मीडिया पोस्ट की पड़ताल भी शुरू कर देगा। यह विभाग के 'प्रोजेक्ट इनसाइट' कार्यक्रम का ही हिस्सा है। उपलब्ध जानकारी और आंकड़ों के आधार पर सरकार बेहद आसानी के साथ मोटी रकम वाले लेनदेन को पकड़ सकती है। मान लीजिए, किसी ने अपने नौकर के नाम पर 5 करोड़ रुपये की संपत्ति खरीदी है और जांच-पड़ताल के दौरान वह संपत्ति भी चुन ली जाती है। अब कर अधिकारी बेनामीदार (यानी नौकर) की आय के स्रोतों को खंगालेंगे ताकि पता चल सके कि वह इतनी महंगी संपत्ति खरीदने में सक्षम है भी या नहीं। जब तय हो जाएगा कि वह ऐसी संपत्ति नहीं खरीद सकता तब अधिकारी उस संपत्ति के असली मालिक की खोजबीन शुरू कर देंगे।
 
विभिन्न कर एवं कानूनी विशेषज्ञों को लगता है कि विमुद्रीकरण का अभियान खत्म होने के बाद आयकर विभाग अपने पास मौजूद जानकारी पर नजर डालेगा और बेनामी संपत्ति वालों को नोटिस भेजना शुरू कर देगा। आईडीएस बंद होने के साथ ही बेनामी संपत्तियों और अन्य अघोषित संपत्तियों का खुलासा करने का मौका भी खत्म हो गया है। ऐसी संपत्तियों के मालिकों के पास अब एक ही तरीका रह गया है और वह है जुर्माना भरना। अगर वे ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें जेल भी जाना पड़ सकता है। संपत्ति के असली मालिक और उसके बेनामीदार को तो सात साल तक की सजा मिल ही सकती है, सौदे में शामिल दूसरे लोगों को भी बख्शा नहीं जाएगा। सभी पक्षों से संपत्ति के बाजार मूल्य की एक चौथाई तक रकम बतौर जुर्माना वसूली जा सकती है।
 
कानून को मिली धार
 
कानून के पिछले प्रारूप में यह प्रावधान था कि केंद्र अधिकारियों को अलग से अधिसूचना जारी करेगा, जिसके बाद कार्रवाई शुरू हो जाएगी और यह भी बताया जाएगा कि विभिन्न पक्षों के साथ क्या किया जाए। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार ऐसा नहीं हो सका। अद्वय लीगल में पार्टनर शरण्या रेड्डïी बताती हैं: संशोधित कानून में पूरी प्रक्रिया दी गई है, जिसके जरिये बेनामी संपत्ति से जुड़े विभिन्न पक्षों को सजा दी जा सकती है। इसमें विभिन्न अधिकारियों के नाम दिए गए हैं, जो मामलों को संभालेंगे। उनमें कार्रवाई शुरू करने वाला अधिकारी है, मंजूरी देने वाला अधिकारी है, प्रशासक है और न्याय करने वाला अधिकारी भी है। आयकर विभाग के अधिकारी बेनामी संपत्ति के मामलों को देखने वाले प्रमुख अधिकारी होंगे। इस कानून में बेनामी संपत्ति का लाभ उठाने वालों यानी उसके असली मालिकों को सजा देने का प्रावधान ही नहीं है बल्कि उस व्यक्ति को भी सजा देने की बात है, जिसके नाम पर वह संपत्ति ली गई है। इसके अलावा सौदे से जुड़े दूसरे पक्षों को भी सजा देने की बात है।
Keyword: real estate, home, house, tax,,
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