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बगैर इंटरनेट मोबाइल बैंकिंग से खतरा
तिनेश भसीन /  December 11, 2016

सरकार 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को चलन से बाहर करने के बाद अब सस्ते डिजिटल ट्रांजेक्शन चैनलों को बढ़ावा देने के लिए नए रास्ते तलाश रही है। उसने दूरसंचार ऑपरेटरों से अनस्ट्रक्चर्ड सप्लीमेंटरी सर्विस डेटा (यूएसएसडी) आधारित बैंकिंग जैसी पहल का समर्थन करने को कहा है जिनका इस्तेमाल  बैंक बैलेंस मालूम करने, मिनी स्टेटमेंट हासिल करने और खाता संख्या, आधार नंबर (यदि प्राप्तकर्ता के बैंक खाते से जुड़ा हुआ हो) डालकर रकम स्थानांतरित करने में किया जा सकेगा। यह सस्ती मोबाइल बैंकिंग टेक्नोलॉजी फीचर्स फोन पर बगैर इंटरनेट कनेक्शन के ट्रांजेक्शन में मददगार है। 

 
सरकार द्वारा बढ़ावा दिए जाने के बाद कई सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी इस सेवा के लिए स्मार्टफोन ऐप लॉन्च करने शुरू कर दिए हैं। इनमें पंजाब नैशनल बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा, आंध्रा बैंक, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया और देना बैंक शामिल हैं। जब यह ऐप एक बार डाउनलोड हो जाता है तो आप इस ऐप का इस्तेमाल फोन पर डेटा के इस्तेमाल के बगैर ट्रांजेक्शन कर सकते हैं। वर्ष 2013 में शुरुआत के बाद से नैशनल पेमेंट्ïस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के साथ इस सुविधा के लिए 53 बैंकों द्वारा पंजीकरण कराए जाने के बावजूद यह कई वजहों से पूरी तरह सफल नहीं हो पाई है।
 
भुगतान सॉल्युशन कंपनी 'पेमेंट' के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक अजय आदिशेसन ने कहा, 'हालांकि यूएसएसडी सभी फोन पर काम करता है, लेकिन उपयोगकर्ताओं को यह पता होना चाहिए कि यह एक सुरक्षित ट्रांजेक्शन नहीं है। मोबाइल या इंटरनेट बैंकिंग ट्रांजेक्शन में इनक्रिप्शन का इस्तेमाल होता है जो यूएसएसडी के मामले में संभव नहीं है।' येस बैंक के वरिष्ठï अध्यक्ष एवं कंट्री हेड (डिजिटल बैंकिंग) रितेश पई ने कहा, 'भारत में वर्ष 2020 तक मोबाइल फोन की संख्या एक अरब हो जाने का अनुमान है और इसमें लगभग आधे फीचर फोन होंगे। यूएसएसडी-आधारित बैंकिंग जैसे प्लेटफॉर्मों की सख्त जरूरत है। लेकिन कई लोग इसका इस्तेमाल नहीं करते हैं क्योंकि इसमें प्रत्येक सेशन के लिए एक निर्धारित शुल्क लगता है और नियामक ने दैनिक ट्रांजेक्शन की लिमिट 5,000 रुपये पर तय कर रखी है।'
 
चूंकि यूएसएसडी एसएमएस से संबद्घ है, इसलिए उपयोगकर्ता को पहले प्रत्येक सेशन के लिए 1.50 रुपये का शुल्क चुकाना पड़ता था। लेकिन नोटबंदी की वजह से यह शुल्क 30 दिसंबर तक माफ कर दिया गया है। दूरसंचार नियामक ने अधिसूचना जारी की है कि अगले साल से प्रत्येक सेशन के लिए यह शुल्क 50 पैसे होगा। चाहे आपका ट्रांजेक्शन पूरा हो या न हो, यह शुल्क वसूला जाएगा।
 
लेकिन कुछ बैंक इसके लिए विकल्प तलाश रहे हैं। येस बैंक ने ताइवान स्थित टेक फर्म ताइसिस के साथ करार किया है। उपयोगकर्ता को ताइसिस द्वारा दिए गए स्टिकर को अपने सिम कार्ड पर डालने की जरूरत होगी जिससे बैंकिंग ट्रांजेक्शन के लिए मीनू तैयार होगा जिसमें भुगतान और फंड ट्रांसफर शामिल हैं। स्टिकर संबद्घ डेटा को एनक्रिप्ट करता है और शॉर्ट मैसेज सर्विस (एसएमएस) का इस्तेमाल कर बैंकिंग की जा सकती है। इसलिए इसमें फंड ट्रांसफर की कोई सीमा नहीं है। पई के अनुसार यदि व्यक्ति एसएमएस पैक खरीदता है तो शुल्क 0.12 पैसे के साथ काफी कम है। येस बैंक इस प्लेटफॉर्म को उन सहकारी बैंकों और सूक्ष्म-वित्त संस्थानों के साथ साझा करता है जिन्होंने उसके साथ समझौता कर रखा है।
 
यूएसएसडी सेवा का इस्तेमाल शुरू करने के लिए उपयोगकर्ता को मोबाइल बैंकिंग सेवा के लिए पंजीकृत होने की जरूरत है। लेकिन फंड प्राप्त करने वाले के लिए यह जरूरी नहीं है। आप सभी को अपने फोन से *99हैश डायल करने और निर्देशों का पालन करने की जरूरत है। यह उसी तरह का कार्य है जैसा कि आप अपने प्रीपेड मोबाइल का बैलेंस चेक करते हैं। यह सेवा 11 क्षेत्रीय भाषाओं में भी उपलब्ध है। अन्य भाषाओं के लिए कोड अलग अलग हैं। इस उत्पाद को लॉन्च करने वाली एनपीसीआई इसे लेकर उत्साहित है। एनपीसीआई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी ए पी होता का कहना है, 'इसे बैलेंस पूछताछ और सभी फोन के जरिये (फीचर फोन के साथ साथ स्मार्टफोन) फंड ट्रांसफर जैसी सेवाओं के लिए इस्तेमाल किए जाने के साथ साथ देश में इसका एक व्यापक ई-पेमेंट प्रणाली के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकेगा।' 
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