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दुरुस्त रखिए अपने सोने का हिसाब-किताब
तिनेश भसीन, प्रिया नायर और संजय कुमार सिंह /  December 11, 2016

सोना रखने की सीमा के बारे में वित्त मंत्रालय स्पष्टïीकरण दे चुका है फिर भी ज्यादातर लोगों को इस बात की चिंता है कि वह कितना सोना अपने पास रख सकते हैं। वजह: या तो उन्होंने इतने साल में खरीदे गए सोने की रसीदें अपने पास नहीं रखी हैं या उन्हें सोना विरासत में मिला है, लेकिन उसका जिक्र किसी वसीयत या ट्रस्ट में नहीं है। इसलिए उन्हें यह साबित करने में मुश्किल हो सकती है कि उनके पास पूरी तरह वैध सोना है।

 
आपकी सभी संपत्तियों के स्रोत ज्ञात और ठीक हों, यह तो जरूरी है, लेकिन जो लोग ठीक तरीके से कर जमा करते हैं, उन्हें अपने पास मौजूद सोने की फिक्र करने की कोई जरूरत ही नहीं है। सरकार ने कहा है, 'यह स्पष्टï किया जाता है कि यदि सोना घोषित आय अथवा कृषि आय जैसी कर मुक्त आय अथवा घरेलू बचत से खरीदा गया है अथवा कानूनी तौर पर विरासत में मिला ऐसा सोना है, जिसे ज्ञात स्रोतों से खरीदा गया है तो मौजूदा प्रावधानों के अंतर्गत उस सोने पर किसी तरह का कर नहीं वसूला जाएगा।'
 
इस बात का कोई निश्चित नियम नहीं है कि कोई व्यक्ति कितना सोना रख सकता है, लेकिन कर विशेषज्ञों का कहना है कि सोना आय के अनुपात में ही होना चाहिए। कर परामर्श फर्म नांगिया ऐंड कंपनी की कार्यकारी निदेशक नेहा मल्होत्रा कहती हैं, 'अगर कोई व्यक्ति साल में 12 लाख रुपये कमाता है और 1 साल में 50,000 या 60,000 रुपये के गहने खरीद लेता है तो बात समझ में आती है। लेकिन अगर उसी व्यक्ति के पास 1 करोड़ रुपये का सोना है तो इसका साफ मतलब है कि कहीं कुछ गड़बड़ है।'
 
कर चोरों के लिए सख्ती
 
जब कराधान कानून (द्वितीय संशोधन) विधेयक संसद में पेश किया गया तो ऐसी अफवाहें फैलने लगीं कि सरकार एक निश्चित सीमा से ऊपर रखे सोने पर कर वसूलेगी। इसीलिए सरकार को स्पष्टïीकरण जारी करना पड़ा। जो लोग अपने काले धन का खुलासा स्वेच्छा से करेंगे या जिन लोगों के पास कर विभाग को अघोषित आय मिलेगी, उन पर लगने वाले जुर्मानों को भी इस विधेयक में बढ़ा दिया गया है। अगर कर अधिकारी ऐसी अघोषित आय की तलाश कर लेते हैं तो उस पर मौजूदा 30 फीसदी के बजाय 60 फीसदी जुर्माना वसूला जाएगा। इसके ऊपर 25 फीसदी अधिभार और सबसे आखिर में उपकर भी लिया जाएगा। बीएन वैद्य एसोसिएट्स के सराफा विश्लेषक भार्गव वैद्य कहते हैं, 'जुर्मानों के अलावा कुछ भी नया नहीं किया गया है। विवाहिताओं तथा अविवाहिताओं के लिए जिन सीमाओं का जिक्र किया गया है, वे तो कानूनों में पहले से मौजूद हैं और इस सीमा का इस्तेमाल तभी किया जाता है, जब कर अधिकारी कहीं छापा मारते हैं।'
 
यदि कर अधिकारी किसी व्यक्ति के घर या दफ्तर पर छापा मारते हैं और उन्हें सोना तथा जेवरात मिलते हैं तो वे परिवार की सभी विवाहित महिलाओं के लिए 500-500 ग्राम सोना, अविवाहिताओं के लिए 250-250 ग्राम और पुरुष सदस्यों के लिए 100-100 ग्राम सोना छोड़ेंगे। बाकी सारा सोना जब्त कर लिया जाएगा। छापा मारने या तलाशी लेने वाले अधिकारी के पास यह अधिकार होता है कि अधिक मात्रा में सोना मिलने पर भी वह परिवार की रीतियों और परंपराओं का ध्यान रखते हुए उसको जब्त नहीं करने का फैसला कर सकता है। लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि आयकर विभाग उस परिवार से किसी तरह का सवाल नहीं करेगा। परिवार के लोगों को उस सोने या गहनों का हिसाब-किताब तो देना ही पड़ेगा, जिन्हें जब्त नहीं किया गया है।
 
सोने का दीजिए हिसाब
 
कर विशेषज्ञ कहते हैं कि चूंकि सरकार काले धन पर लगाम कसर रही है, इसलिए अच्छा यही है कि नियम से कर भरने वाला करदाता भी अपनी सभी संपत्तियों का पूरा हिसाब-किताब देने की हालत में रहे। इसमें सोना और जेवरात भी शामिल हैं। पिछले साल के आम बजट में वित्त मंत्री ने संपदा कर खत्म कर दिया था। अगर आपके पास 30 लाख रुपये से अधिक का सोना अथवा जेवरात होते तो आपको अपने कर रिटर्न में उनका खुलासा करना पड़ता था और उनकी पूरी कीमत के 1 फीसदी के बराबर कर भी देना पड़ता था। अगर आप संपदा कर चुका देते थे तो आपके पास मौजूद संपदा को घोषित मान लिया जाता था।
 
पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर एवं लीडर (व्यक्तिगत कर) कुलदीप कुमार समझाते हैं कि वित्त मंत्री ने संपदा कर खत्म करने के साथ-साथ यह प्रावधान भी कर दिया कि जिन करदाताओं की आय 50 लाख रुपये या उससे अधिक है, उन्हें वर्ष 2016-17 से आयकर रिटर्न फॉर्म की अनुसूची एएल में अपनी सभी संपदाओं और बकायों की घोषणा अनिवार्य रूप से करनी है। अगर चालू आकलन वर्ष में रिटर्न दाखिल करते समय आपके सोने का खुलासा कर दिया है और उस रिटर्न की प्रोसेसिंग हो चुकी है तो आपको अपनी संपत्ति के बारे में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।
 
अगर आप इनमें से भी किसी भी श्रेणी में नहीं आते हैं तो आपने जो भी सोना और जेवरात खरीदे हैं, पिछली पीढ़ी से प्राप्त किए हैं और तोहफे के तौर पर हासिल किए हैं, उन्हें अलग-अलग कर लीजिए। अगर आपके पास खरीदे गए सोने या जेवरात की रसीदें नहीं हैं, लेकिन आपने चेक या कार्ड के जरिये उनकी कीमत अदा की है तो अपने बैंक से पुराने स्टेटमेंट के लिए दरख्वास्त कीजिए और उन्हें सबूत के तौर पर अपने पास रखिए। अगर आपने किसी ऐसे जौहरी से यह सामान खरीदा हे, जिससे आपका अच्छा परिचय है तो आपको उससे पुरानी रसीद मांग लेनी चाहिए।
 
अगर किसी व्यक्ति को किसी साल में 50,000 रुपये या उससे अधिक के तोहफे हासिल हुए हैं तो उन पर उसे आयकर देना होगा। लेकिन अगर उसे तोहफे किसी करीबी परिजन से मिले हैं अथवा विवाह में मिले हैं तो कर देने के झंझट से वह बच जाएगा। अगर आपको अपने माता-पिता, भाई-बहन या उनके पति अथवा पत्नी से, सास अथवा ससुर या पति के भाई-बहन से सोना मिला है तो आपको उस पर किसी भी तरह के उपहार कर के फेर में नहीं पडऩा पड़ेगा।
 
अगर किसी वसीयत में यह नहीं लिखा है कि आपको सोना दिया जा रहा है या आपको किसी पारिवारिक ट्रस्ट से सोना नहीं मिला है या सोना देने वाला व्यक्ति जीवित नहीं है तो आपके लिए यह साबित करना बहुत मुश्किल होगा कि सोना विरासत में मिला है। विरासत वाले अपने दावे को साबित करने के लिए आप तस्वीरें दिखा सकते हैं, जिनमें आपको जेवरात देने वाला व्यक्ति उन्हें पहना दिख रहा हो।
 
क्या आपके पास रखे सोने पर लगेगा कर?
 
सरकार को कैसे पता चलेगा कि मेरे पास कितना सोना है?
 
अगर आयकर विभाग को सूचना मिलती है या वह मानता है कि किसी व्यक्ति के पास अघोषित धन, सोना-चांदी, गहने आदि हैं तो उसे छापा मारने का पूरा अधिकार है। अगर सोना या जेवरात मिले और वह व्यक्ति उनके स्रोत के बारे में नहीं बता पाया तो उस पर कर वसूला जाएगा।
 
क्या मेरे सोने पर कर लगेगा?
 
आपने सोने को जिस आय से खरीदा है, अगर आप उसका स्रोत नहीं बता पाते हैं तो उस सोने पर कर लगेगा। लेकिन अगर आप साबित कर देते हैं कि इसे घोषित आय, छूट वाली आय या घरेलू बचत से खरीदा गया है तो इस पर कर नहीं लगना चाहिए।
 
मुझे कितना कर देना होगा?
 
प्रस्तावित संशोधन के मुताबिक अघोषित आय पर 60 फीसदी कर लगाया जाना है। उस कर पर 25 फीसदी अधिभार और तीन फीसदी उपकर भी वसूला जाएगा। ये मिलाकर 77.25 फीसदी होते हैं। इनके बाद परिस्थितियों के मुताबिक 10 से 60 फीसदी तक जुर्माना भी लिया जाएगा।
 
अपने सोने का स्रोत बताने के लिए मुझे कौन से कागज दिखाने चाहिए?
 
आपको निवेश का मूल्य बताने के लिए खरीद की रसीद दिखानी होगी। इसके साथ ही आपके पास निवेश वाली आय के स्रोत का सबूत भी होना चाहिए।
 
अगर मैं सोने का स्रोत बताने की हालत में हूं तो मैं कर की चिंता किए बगैर कितना भी सोना रख सकता हूंï?
 
जी हां, अगर आप आय के स्रोत का संतोषजनक खुलासा कर सकते हैं तो आप कर की फिक्र किए बगैर कितना भी सोना रख सकते हैं।
 
क्या 500 ग्राम से ऊपर का मेरा सारा सोना जब्त कर लिया जाएगा?
 
तलाशी के दौरान प्रत्येक विवाहित महिला के पास मौजूद 500 ग्राम सोने, अविवाहिता के 250 ग्राम सोने और पुरुष के 100 ग्राम सोने को छुआ भी नहीं जाएगा। वैध गहने भी पूरी तरह महफूज रहेंगे। अगर इस सीमा से अधिक सोना किसी के पास है और आय का स्रोत ज्ञात तथा वैध है तो सोना जब्त नहीं किया जाएगा।
 
अगर सोना विरासत में नहीं मिला हो और यह साबित करने के लिए रसीद भी न हों कि उसे खरीदा गया है तो क्या होगा?
 
ऐसी सूरत में भी वह सोना तो बचा रहेगा, जो आपकी बचत या घोषित आय के अनुपात में होगा। लेकिन जो सोना आपकी आय के घोषित स्रोत से मेल नहीं खाएगा, उस पर कर वसूला जाएगा।
 
अगर मेरी दो अविवाहित बेटियां हैं तो क्या मैं दोनों के नाम पर 250-250 ग्राम सोना दिखा सकता हूं?
 
250 ग्राम सोने की सीमा या दूसरी सीमा निर्देश संख्या 1916 से निकाली गई हैं, जो कर अधिकारियों को तलाशी के दौरान एक निश्चित सीमा तक सोना जब्त करने से मना करता है। किंतु अगर आप इस सोने को खरीदने में इस्तेमाल की गई रकम का स्रोत नहीं बता पाए तो निर्धारित सीमा के भीतर होने पर भी सोने पर कर वसूला जाएगा।
 
अमरपाल चड्ढा, टैक्स पार्टनर एवं इंडिया मोबिलिटी लीडर, ईवाई
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