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एफडी से आगे बढ़ाइए गाड़ी
संजय कुमार सिंह /  December 04, 2016

नकदी प्रवाह तेज होने के  साथ ही बैंकों ने जमा दरों में कटौती करनी शुरू कर दी है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई), आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक आदि ने दरों में 15 से 25 आधार अंक कमी की है। एसबीआई ने पिछले हफ्ते 1 करोड़ रुपये की जमा पर ब्याज में 125 से 190 आधार अंक की कमी की है। नोटबंदी के कारण बैंकों में नकदी का प्रवाह तेज हो गया है, जिसे देखते हुए जमा दरें फिलहाल कम रह सकती हैं। जो निवेशक इन बैंक जमाओं पर निर्भर नहीं हैं, उन्हें उनके फिक्स्ड-इनकम बास्केट में विविधता लानी चाहिए ताकि उनके पोर्टफोलियो पर असर न पड़े।

डेट एमएफ पर करें विचार
निवेशक डेट म्युचुअल फंडों पर विचार कर सकते हैं। इनमें गारंटीशुदा प्रतिफल नहीं होता, लेकिन बैंक एफडी से अधिक प्रतिफल मिलता है। कुछ डेट फंड श्रेणियों में लिक्विड, अल्टा-शॉर्ट टर्म, शॉर्ट टर्म, इनकम एवं डायनामिक बॉन्ड फंड पर अधिक जोखिम होता है। वित्तीय योजनाकार अर्णव पांड्या कहते हैं, 'निवेश की अवधि के लिहाज से एक श्रेणी चुनें।' निवेश की अवधि कम से कम फंड श्रेणी की औसत परिपक्वता अवधि के बराबर होनी चाहिए।
पांड्या कहते हैं कि अगर आप एक महीने के लिए निवेश करना चाहते हैं तो लिक्विड फंड में रकम लगाएं और 1 से 3 महीने के लिए अल्ट्रा शॉर्ट फंड पर विचार करें। कम से कम 1 साल के  लिए शॉर्ट टर्म फंड में निवेश करें। 3 साल या इससे अधिक अवधि के लिए इंटरेस्ट इनकम फंड में निवेश कर सकते हैं। पहली तीन श्रेणियां कुछ सुरक्षित हैं और इनकम फंड एवं दीर्घ अवधि के दूसरे फंडों के साथ जोखिम जरूर होते हैं।
निवेश सलाहकार अपने ग्राहकों को दीर्घ अवधि के फंडों पर दांव लगाने के लिए कह रहे हैं। टीबीएनजी कैपिटल एडवाइजर्स के संस्थापक एवं मुख्य कार्याधिकारी तरुण बिरानी कहते हैं, 'ब्याज दर कम होने के साथ निवेशकों को अधिक औसत प्रतिफल वाले डेट फंडों में निवेश करना चाहिए।' यह वाजिब रणनीति है, लेकिन उन्हीं निवेशकों के लिए हैं, जो जोखिम लेने की क्षमता रखते हैं। राइट होराइजंस के सीईओ अनिल रेगो कहते हैं, 'जब तक ब्याज दरें कम रहेंगी तब तक इनकम फंडों का प्रदर्शन बेहतर रहेगा। अगले एक साल तक ऐसा हो सकता है। इसके बाद ब्याज दरें बढऩे के साथ ही ये नकारात्मक प्रतिफल देना शुरू कर सकते हैं।' आपको पता होना चाहिए कि इन फंडों से कब बाहर निकलें या इस बारे में किसी सलाहकार की मदद लें। इनकम फंडों के साथ जोखिम कम करने के लिए निवेशक इनमें तीन साल या अधिक अवधि के लिए निवेश करें। इसके साथ ही इनमें निवेश भी सीमित रखें।
एक अन्य विकल्प डायनामिक बॉन्ड फंड हैं। पीयरलेस म्युचुअल फंड के फिक्स्ड इनकम प्रमुख किल्लोल पांड्या कहते हैं, 'इन फंडों से फंड प्रबंधकों को ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव से निपटने में आसानी होगी। ये फंड निवेशकों को निश्चित समय में स्थिर प्रतिफल पाने में मदद करेंगे। इन फंडों में प्रबंधक ब्याज दरों को ध्यान में रखते हुए औसत परिपक्वता में बदलाव कर सकते हैं। हालांकि पांड्या के अनुसार काफी कुछ फंड प्रबंधक की इच्छा पर निर्भर करेगा, जो जोखिम भरा है। वह कहते हैं, 'हम उम्मीद कर सकते हैं कि फंड प्रबंधक ब्याज दरों पर उनकी राय के मुताबिक सही निर्णय लेंगे, लेकिन निर्णय गलत हुआ तो क्या होगा?
छोटी अवधि के फंड के मामले में सुविधा के आधार पर फंड चुनें क्योंकि उनके प्रतिफल में अंतर बहुत अधिक नहीं हो सकता है। इनकम या ड्यूरेशन फंड की स्थिति में बिरानी उस फंड को जांचने के लिए कहते हैं, जिसका 7 से 10 साल का लेखाजोखा रहता है। यह भी जानने की कोशिश करें कि फंड प्रबंधक कितने समय (कम से कम सात साल का अनुभव) से फंड संभाल रहा है। निवेशकों की रकम का एक हिस्सा अक्रु अल फंडों में भी जाना चाहिए। ये फंड ड्यूरेशन रिस्क लेने से बचते हैं और ज्यादातर उनके पोर्टफोलियो में बॉन्ड द्वारा भुगतान किए जाने वाले ब्याज पर निर्भर रहते हैं। उन फंडों में निवेश से दूर रहें जिन्होंने निम्न गुणवत्ता वाले बॉन्ड में निवेश किए हैं।
फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (एफएमपी) भी निवेश के लोकप्रिय साधन हैं। रेगो कहते हैं, 'एफएमपी समान अवधि के लिए एफडी के मुकाबले 50-100 आधार अंक अधिक प्रतिफल दे सकते हैं।' चूंकि निवेशक ये फंड परिपक्वता अवधि तक रखते हैं, इसलिए वे ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव से बच सकते हैं। हालांकि इनमें कुछ दिक्कतें हैं। जब आपके पास अतिरिक्त रकम होती है तब एफएमपी ऐसा हो, जिसकी अवधि आपकी निवेश अवधि से मेल खाए। यह भी पता नहीं होता कि एफएमपी कितना जोखिम भरा होगा क्योंकि निवेश से पहले इनका मूल्यांकन करने का कोई पोर्टफोलियो नहीं होता।

डाकघर योजनाएं
डाक घर जमा योजनाओं पर ब्याज दर अभी भी आकर्षक हैं। सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) पर कर-मुक्त प्रतिफल भी लुभाने वाले हैं। वरिष्ठï नागरिक बचत योजना और सुकन्या समृद्धि योजना भी आकर्षक ब्याज दे रहे हैं। याद रखें कि डाकघर मासिक आय योजना, वरिष्ठï नागरिक बचत योजना और राष्टï्रीय बचत पत्र इन योजनाओं द्वारा ब्याज दरों की पेशकश इनकी परिपक्वता अवधि के दौरान निश्चित होती है, जबकि पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना पर दरें संशोधित होती रहती हैं।
गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर
उन गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) पर भी विचार किया जा सकता है, जो आकर्षक प्रतिफल दे रहे हैं। निवेश से पहले कंपनी की वित्तीय हालत और बहीखाते जांचें। उन एनसीडी से दूर रहने की कोशिश करें, जिनकी  रेटिंग डबल-ए से कम है या जिनकी अवधि दो-तीन साल से अधिक है। पांड्या कहते हैं, 'अगर कंपनी की कारोबारी संभावनाएं कमजोर होती हैं तो आप दीर्घ अवधि के लिए निवेश कर फंस सकते हैं।'

कर-मुक्त बॉन्ड
ये बॉन्ड साल के आखिरी तीन से चार महीने में बाजार में आते हैं। ऊंचे कर दायरे में आने वाले लोगों के लिए ये बॉन्ड उपयुक्त होते हैं। हालांकि इनकी अवधि 10-20 साल के लिए होती है। अगर ये 7 प्रतिशत से अधिक प्रतिफल देते हैं तो ही इन पर विचार करें। अगर आप इनकी परिपक्वता पर  प्राप्ति को ठीक से समझते हैं तो द्वितीयक बाजार से इन्हें खरीदें। जो धनाढ्य निवेशक अधिक मात्रा में ये बॉन्ड चाहते हैं, उनके लिए तरलता एक समस्या हो सकती है लेकिन 10-15 लाख रुपये तक के बॉन्ड बिना किसी झंझट के बेचे या खरीदे जा सकते हैं।

Keyword: FD, Mutual fund, post office,
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