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शादी-ब्याह रहेंगे नोटबंदी से बेअसर अगर साथ में है ई-वेडिंग प्लानर
तिनेश भसीन /  December 04, 2016

नकदी की किल्लत वाले इस दौर में ऑनलाइन वेडिंग प्लानर आपको 30 फीसदी तक छूट तो दिलाएंगे ही, सेवा प्रदाताओं को ऑनलाइन भुगतान करने में मदद भी करेंगे

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने शादियों के लिए नकदी निकालने की कड़ी शर्तों का ऐलान क्या किया, शादियों के जश्न का माहौल ही फीका हो गया। लेकिन ऑनलाइन वेडिंग प्लानर की सेवाएं लेने से आपको नकदी की किल्लत से निपटने और आसानी से शादी करने में मदद मिल सकती है।
केंद्रीय बैंक ने कहा कि एक ही पक्ष (वर या वधू का कोई एक परिजन या जिसकी शादी हो रही है, वह) अधिकतम 2.5 लाख रुपये निकाल सकता है। इसके साथ ही नियामक ने लोगों से कहा है कि वे इस धन का जिसे भुगतान करेंगे, उनसे यह घोषणापत्र लेंगे कि उनके पास कोई बैंक खाता नहीं है।
सबसे बड़ी समस्या यह है कि निकासी की बढ़ाई गई सीमा 30 दिसंबर तक होने वाली शादियों के लिए है। जिनकी शादियां इसके बाद होंगी, उन्हें यह विकल्प नहीं मिलेगा।
वेडमीगुड के सह-संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी आनंद साहनी कहते हैं, 'आम तौर पर शादियों में 70 से 75 फीसदी भुगतान नकदी में होता है। नोटबंदी की वजह से बहुत से लोगों ने अपनी शादियां जनवरी या फरवरी तक स्थगित कर दी हैं। जो लोग अपनी शादी की तारीख आगे नहीं खिसका सकते, उन्होंने अपना बजट कम कर दिया है।'
नकद रहित और कम लागत
ई-वेडिंग प्लानर आपको जगह, मेक-अप आर्टिस्ट, बैंड, फूल वाले आदि की बुकिंग ऑनलाइन करने की सुविधा देते हैं। इन सभी वेंडरों को भुगतान एक वेबसाइट से किया जा सकता है। 7वचन की संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी मिन्नत लालपुरिया कहती हैं, 'हम बिना नकदी के पूरा काम करते हैं। व्यक्ति को सेवा प्रदाता को नियुक्त करने के लिए बुकिंग राशि देनी होती है। उसके बाद एक हिस्सा शादी के एक महीने पहले देना पड़ता है और शेष राशि कार्यक्रम के दौरान देनी होती है।'
परंपरागत वेडिंग प्लानर ऐसी शादियों का जिम्मा लेते हैं, जिनका बजट 50 लाख रुपये या इससे अधिक होता है, लेकिन ऑनलाइन प्लानर उन परिवारों को अपनी सेवाएं देते हैं, जिनका बजट 10 से 15 लाख रुपये से शुरू होता है।
वेडिंगप्लीज डॉट कॉम के सह-संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी मानस वाधवा कहते हैं कि  अगर मेजबान कोई कस्टमाइज्ड सेवा नहीं लेता है तो ज्यादातर ई-प्लानर ग्राहकों से कोई फीस वसूल नहीं करते हैं।
वेडिंग प्लानर कई तरह से आपकी लागत कम करने में मदद कर सकते हैं। शादी मेंं सबसे ज्यादा पैसा आयोजन स्थल, खानपान (केटरिंग) और साज-सज्जा पर होता है। इन तीनों का कुल बजट में 30 से 60 फीसदी हिस्सा होता है।
ऑनलाइन प्लानर इन सब पर आपको छूट दिलाने में मदद कर सकता है क्योंकि वे यह जानते हैं कि कोई सेवा प्रदाता पीक और ऑफ-पीक सीजन में कितने कम दाम ले सकता है और कब बुकिंग ज्यादा और कम होती हैं।
इन सब कारकों के आधार पर प्लानर आयोजन स्थल के मालिक, फोटोग्राफर और मेक-अप आर्टिस्ट सहित सभी सेवा प्रदाताओं के साथ 10 से 30 फीसदी छूट के लिए सौदेबाजी कर सकता है। वे आपको ऐसे इलाकों का सुझाव दे सकते हैं, जहां आप सुविधाओं से समझौता किए बिना लागत में कटौती कर सकते हैं। वे आपको ऐसे इलाकों का भी सुझाव दे सकते हैं, जहां आप अपने बजट में शादी कर सकते हैं।

शादी पर कर का असर
कर बचाने के लिए पहले आयोजन स्थल के मालिक और मेजबान परिवार एक करार करते थे, जिसमें एक हिस्से का चेक से और शेष नकदी में भुगतान का प्रावधान होता था। कर पर खर्च 14 से 30 फीसदी तक आ सकता है, जो उस शहर और इस बात पर निर्भर करता है कि वह आयोजन स्थल अकेला है या होटल का हिस्सा है। नोटबंदी के बाद बहुत से बैंक्वेट मालिकों ने मेजबान परिवारों को ज्यादा पैसा चुकाने को कहा है क्योंकि बैंकिंग माध्यमों से भुगतान स्वीकार करने का मतलब है कि उन्हें करों के रूप में ज्यादा पैसा चुकाना होगा। इसलिए उन्होंने ग्राहकों से लागत वहन करने को कहा है। मेजबानों को बुकिंग राशि अग्रिम देनी होती है, इसलिए ऐसे मामलों में आयोजन स्थल के मालिक ऐसे मामलों में उन पर दबाव बना सकते हैं।
एक ऑनलाइन वेडिंग कंपनी के सीईओ कहते हैं, 'कुछ मामलों में हम छूट लेने में सफल रहे, जबकि कुछ में हम आयोजन स्थल के मालिक को इस बात के लिए राजी करने में सफल रहे कि अतिरिक्त ज्यादातर लागत वे खुद वहन करें।'

नोटबंदी में नई जुगत
नोटबंदी के बाद वेडमीगुड डॉट कॉम ने शादियों के दौरान परिवहन सेवाएं देने के लिए उबर के साथ करार किया है। साहनी कहते हैं, 'मेजबान हमारी वेबसाइट पर निर्धारित कीमत की उबर राइड खरीद सकती हैं और वे प्रोमो कोड हासिल कर सकती हैं। वे इन्हें अपने अतिथियों और परिवार के सदस्यों से साझा कर सकते हैं।'
बिना नकदी के अलावा मेजबान इसके जरिये अपने परिवहन खर्च पर नियंत्रण रख सकते हैं। उन्हें लोगों को लाने और छोडऩे के लिए कारों के फेरों के बारे में कोई चिंता नहीं करनी पड़ेगी।  वेडिंग प्लानरों ने गिफ्ट रजिस्ट्री स्टार्टअप के साथ भी करार किया है, ताकि अतिथि विवाह होने वाले जोड़े को नकदी के बजाय उनकी जरूरत की चीजें उपहार में दे सकें। जोड़ा गिफ्ट रजिस्ट्री वेबसाइट पर उन चीजों की सूची बना सकता है, जिनकी उन्हें जरूरत है। इनमें रसाई के सामान से लेकर फर्नीचर और हनीमून पैकेज तक शामिल होते हैं। उसके बाद वे इसे अतिथियों को ई-मेल पर भेजते हैं और अतिथि ये चीजें ऑनलाइन खरीद सकते हैं। अगर उपहार महंगा है तो वे आंशिक भुगतान कर सकते हैं।
फॉरमाईशादी डॉट कॉम की संस्थापक-सीईओ सुधा माहेश्वरी कहती हैं, 'नोटबंदी की घोषणा के बाद हमारी वेबसाइट पर आने वालों की संख्या 50 फीसदी बढ़ी है। दिसंबर और जनवरी के पंजीकरणों की संख्या दोगुनी हो गई है।'

Keyword: e-wedding planner, marriage, Cashless,
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