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ओएनजीसी और केयर्न इंडिया को होगा फायदा
उज्ज्वल जौहरी /  December 04, 2016

पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ओपेक) द्वारा आठ वर्षों के लंबे अंतराल के बाद कच्चे तेल उत्पादन में कटौती किए जाने के निर्णय से कई तेल उत्पादन कंपनियों को राहत मिलेगी।
कच्चा तेल 50 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंचने से इस सेक्टर की अन्वेषण एवं उत्पादन कंपनियों के शेयरों में अच्छी तेजी दर्ज की गई है। तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) ने शुक्रवार को 298.65 रुपये पर पहुंच कर 52 सप्ताह की ऊंचाई का नया स्तर बनाया, वहीं ऑयल इंडिया भी सितंबर तिमाही के कमजोर नतीजों से आई कमजोरी की भरपाई करने में कामयाब रही। केयर्न इंडिया लगातार 52 सप्ताह की ऊंचाई के आसपास कारोबार कर रही है और सेलन एक्सप्लोरेशन ने अपने निचले स्तर से अच्छी बढ़त दर्ज की है।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से इन सभी कंपनियों की आय बढऩे का अनुमान है, हालांकि इसे लेकर भी आशंका बनी हुई है कि तेल कीमतों में तेजी इन्हीं स्तरों पर मध्यावधि में बरकरार रहेगी या नहीं। कोटक इंस्टीट्ïयूशनल इक्विटीज के विश्लेषकों का कहना है कि यदि ओपेक द्वारा 12 लाख बैरल प्रतिदिन की संभावित कटौती और गैर-ओपेक उत्पादकों द्वारा 6 लाख बैरल प्रतिदिन की कटौती पर सही तरीके से अमल होता है तो इससे कच्चे तेल की कीमतों में अल्पावधि तेजी बढ़ सकती है। फिर भी, अतिरिक्त इन्वेंट्री, अमेरिका में कीमत-केंद्रित रिकवरी और ब्राजील, कनाडा और कजाकस्तान से आपूर्ति में तेजी कच्चे तेल की कीमतों को मध्यावधि में 60-65 डॉलर के स्तर के पार जाने से रोक सकती है।
माना जा रहा है कि कच्चे तेल की औसत कीमतें पहली छमाही के औसत की तुलना में अधिक रह सकती हैं और इससे इन कंपनियों की आय मजबूत हो सकती है। इससे इन कंपनियों के शेयरों की कीमतें भी मजबूत बनी रह सकती हैं। अपस्ट्रीम कंपनियां प्रमुख लाभार्थी बनी हुई हैं। हालांकि जहां ओएनजीसी और ऑयल इंडिया को ईंधन कीमतों को नियंत्रण-मुक्त किए जाने के बाद अंडररिकवरी से राहत मिली है, वहीं उनकी प्राप्तियां कमजोर बनी हुई हैं। ऑयल इंडिया ने कच्चे तेल की प्राप्ति 44.6 डॉलर प्रति बैरल पर दर्ज की है। इसके अलावा गैस कीमतों में नरमी की वजह से भी उसे सितंबर तिमाही के दौरान परिचालन मुनाफे में 9 फीसदी की गिरावट का सामना करना पड़ा। इससे कंपनी के शेयर पर दबाव पड़ा। इसी तरह ओएनजीसी के शेयर को भी दबाव का सामना करना पड़ा था। इन दोनों कंपनियों को अब कच्चे तेल की कीमतें चढऩे से मजबूत लाभ दर्ज करने में मदद मिलेगी।
अन्य लाभार्थी केयर्न इंडिया होगी। वित्त वर्ष 2017 की दूसरी तिमाही में कंपनी का राजस्व 2,026 करोड़ रुपये था, जो 1950 करोड़ रुपये के पूर्व के अनुमान की तुलना में अधिक है और उसने प्राप्तियों में तिमाही आधार पर 10 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की है। कंपनी का परिचालन मुनाफा तिमाही आधार पर 31 फीसदी तक बढ़ा। हालांकि, वेदांत के साथ प्रस्तावित विलय को देखते हुए इसकी शेयर कीमत कंपनी के प्रदर्शन पर केंद्रित रहेगी जिसे धातु कीमतों में तेजी का लाभ हासिल हो रहा है।
हालांकि तेल विपणन कंपनियां (ओएमसी) कच्चे तेल कीमतों में तेजी का तटस्थ से लेकर नकारात्मक असर दर्ज कर सकती हैं, क्योंकि उन्हें मुक्त कीमत निर्धारण, मजबूत मांग और मजबूत क्षमता वृद्घि से लाभ मिलता है। सेंट्रम ब्रोकिंग के सचिन मेहता का मानना है कि ओएनजीसी और गेल समेत अपस्ट्रीम और रिफाइनिंग/पेट्रो रसायन कंपनियां ऊंची तेल कीमतों के परिदृश्य में प्रमुख लाभार्थी होंगी। उन्हें तेल विपणन कंपनियों पर इसका तटस्थ प्रभाव पडऩे और खासकर पेट्रोनेट एलएनजी पर कुछ हद तक नकारात्मक प्रभाव पडऩे की आशंका है, क्योंकि दीर्घावधि और हाजिर अनुबंधों के बीच कीमत अंतर बढ़ेगा, उठाव और विपणन मार्जिन पर दबाव पड़ेगा।

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