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निवेशकों की तलाश में निवेश बैंकरों का लंदन में डेरा
बीएस संवाददाता /  December 04, 2016

तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) और कोल इंडिया लिमिटेड के आला अफसर और उनके निवेश बैंकर अगले हफ्ते से लंदन में रोड शो करने जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार सरकार ने बैंकरों से कहा है कि वे इन दो फर्मों के बारे में विदेशी फंडों के सामने प्रस्तुतियां दें। केंद्र सरकार अगले साल इन दोनों कंपनियों का अच्छा-खासा हिस्सा बेचने की तैयारी कर रही है। बैंकरों का यह भी कहना है कि अगर इन दोनों कंपनियों की शेयर बिक्री कामयाब रहती है तो फिर सरकार को एक और विनिवेश की शायद जरूरत नहीं पड़ेगी। विनिवेश के जरिए सरकार अभी तक महज करीब 23,519 करोड़ रुपये ही जुटा पाई है जबकि केंद्रीय बजट में उसने विनिवेश के जरिए लगभग 56,500 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया था।     पवन बुरुगुला

ग्रे मार्केट में नकदी का टोटा, भुगतान में की चूक
सरकार ने नोटबंदी का जो ऐलान किया है, उसका अच्छा खासा असर आईपीओ के ग्रे बाजार में भी हुआ है। वहां भी धंधा ठप है। हाल में शीला फोम और लॉरस लैब्स समेत कुछ आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) आए मगर इनके कोई लिवाल नहीं थे। हालांकि नोटबंदी का असल असर इससे पहले के दो निर्गमों पीएनबी हाउसिंग फाइनैंस और एंडुरेंस टेक्नालॉजीज पर हुआ। वैसे ये दोनों आईपीओ नोटबंदी के ऐलान से पहले आए थे लेकिन सूत्रों का कहना है कि नकदी की तंगी के कारण ग्रे मार्केट के आपरेटर इन दोनों आईपीओ के निवेशकों को रकम नहीं दे पाए और डिफॉल्ट कर गए। उनका कहना है कि इस बाजार में अब लेन-देन इतना जल्दी तो लौटने वाला नहीं है।     समी मोडक

नोटबंदी की चोट सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान पर भी पड़ी
यह सही है कि सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिए म्युचुअल फंड उद्योग में भरपूर पैसा आ रहा है मगर नोटबंदी की चोट उन पर भी हुई है। नोटबंदी से बैंकों में कामकाज का दबाव बढ़ा तो उसका असर उन एसआईपी से धन की आवक पर पड़ा जिनमें ईसीएस यानी इलेक्ट्रॉनिक क्लीयरिंग का इस्तेमाल नहीं होता। एक फंड कंपनी ने कहा कि एसआईपी के कुछ आवेदन बैंकों के पास अटके पड़े हैं। शायद नोटबंदी के असर के कारण कुछ सरकारी बैंक इन निवेश आवेदनों को मंजूर नहीं कर पाए।     समी मोडक

Keyword: investment bankers, london, funds,
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