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कंज्यूमर शेयरों पर पड़ रहा दबाव
हंसिनी कार्तिक /  November 27, 2016

हाल के समय में बाजार में सबसे बड़ी गिरावट के दौरान कंज्यूमर शेयर कमजोरी का शिकार हुए हैं। बीएसई ऑटो, बीएसई कंज्यूमर और बीएसई एफएमसीजी सूचकांकों के कुल बाजार पूंजीकरण में लगभग 9-13 फीसदी की कमी आई है जबकि बीएसई के सेंसेक्स के लिए यह गिरावट 8 नवंबर के बाद से 6 फीसदी की है। विश्लेषकों का मानना है कि अल्पावधि में गिरावट समाप्त होने या स्थिति में बदलाव के आसार नहीं दिख रहे हैं।
सरकार द्वारा नोटबंदी की घोषणा के बाद से शेयरों में गिरावट का सिलसिला बरकरार है और गुरुवार को टाटा मोटर्स, बाटा इंडिया, जुबिलैंट फूडवक्र्स, पेज इंडस्ट्रीज, आयशर मोटर्स और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा जैसे शेयरों 2.4-4 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इनमें टाटा मोटर्स और एमऐंडएम सेंसेक्स के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में शामिल रहे। एक विदेशी ब्रोकरेज फर्म के शोध प्रमुख ने कहा, 'बाजार धारणा को प्रभावित करने वाले दो प्रमुख घटनाक्रम एक साथ सामने आए हैं और घरेलू तथा संस्थागत निवेशक दोनों ही उन शेयरों पर मुनाफावसूली पर ध्यान दे रहे हैं जिनमें पिछले एक साल के दौरान अच्छी तेजी आई थी। दिसंबर तिमाही के वित्तीय परिणामों से यह संकेत मिलेगा कि नोटबंदी की वजह से भारतीय उद्योग जगत और खासकर खपत केंद्रित शेयरों के लिए दबाव बना हुआ है।'
विदेशी निवेशक भारत समेत उभरते बाजारों पर सतर्कता बरत रहे हैं। शोध प्रमुख ने कहा, 'मुझे खासकर ऑटो और कंज्यूमर जैसे सेगमेंट में लंबे समय तक बिकवाली बरकरार रहने का अनुमान है। इन सेगमेंट में पिछले दो वर्षों में शेयरों ने प्रमुख सूचकांकों को मात दी है।'
डाल्टन कैपिटल एडवाइजर्स के प्रबंध निदेशक यू आर भट का मानना है कि निदेशकों द्वारा कुछ बिकवाली खपत केंद्रित शेयरों में और अधिक गिरावट की आशंका को देखते हुए की जा रही है जिसे लेकर स्थिति दिसंबर तिमाही की आय के बाद ही स्पष्टï होगी। भट ने कहा, 'निवेशकों यह मानना है कि शेयरों में तेजी की गुंजाइश अभी भी बची हुई है तो वे बिकवाली करना और निचले स्तर पर खरीदारी करना पसंद करेंगे'
अन्य विश्लेषकों ने भी इसी तरह की राय जाहिर की है। ऑटोमोबाइल सेक्टर पर नजर रखने वाले आईडीबीआई कैपिटल के विश्लेषक प्रणय कुरियन ने कहा कि निवेशकों ने नोटबंदी के प्रभाव के बीच खपत केंद्रित शेयरों के बारे में पूछताछ शुरू कर दी है। उन्होंने कहा, 'यह अनिश्चितता बना हुई है कि वित्त वर्ष 2018 और वित्त वर्ष 2019 की आय पर कितना प्रभाव पड़ेगा और इससे निवेशकों को अपना पोर्टफोलियो किस हद तक फिर से संतुलित बनाने की जरूरत होगी।'एक घरेलू ब्रोकरेज फर्म के प्रमुख ने कहा कि खुदरा एचएनआई भी मौजूदा गिरावट में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। उन्होंने कहा, 'फिलहाल घरेलू संस्थागत निवेशकों से बाजार को कुछ हद तक मजबूत बनाए रखने में मदद मिल रही है, लेकिन यदि वे अपना नुकसान दूर करने का निर्णय लेते हैं और बिकवाली करते हैं तो मैं सभी शेयरों में भारी गिरावट की उम्मीद कर सकता हूं और खपत केंद्रित शेयरों पर इसका अधिक दबाव पड़ेगा।'
दिलचस्प बात यह है कि जहां खपत सेगमेंट में गिरावट आ रही है, वहीं अन्य थीमों पर विश्लेषक निवेशकों को सलाह दे रहे हैं। कुरियन ने कहा कि मौजूदा बिकवाली से जुड़ी गतिविधियों के लाभार्थी निर्यात-केंद्रित व्यवसाय हो सकते हैं जिन्हें रुपये में कमजोरी का लाभ मिलेगा। इसके अलावा इसमें औद्योगिक शेयर और व्यवसाय भी फायदे की स्थिति में आ सकते हैं क्योंकि वे उद्योग या सरकारी ऑर्डरों की पूर्ति करते हैं।

Keyword: Consumer, shares, FMCG,
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