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बड़े नोट बंद करने का जीडीपी पर होगा मामूली असर
इंदिवजल धस्माना /  November 21, 2016

बड़े नोट बंद करने के सरकार के फैसले को लेकर तरह तरह के अनुमान सामने आ रहे हैं। अर्थशास्त्री और नीति आयोग के सदस्य विवेक देवराय ने इंदिवजल धस्माना से बातचीत में कहा कि इसका असर चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही से लेकर जनवरी के मध्य तक महसूस होगा, लेकिन उसके बाद चौथी तिमाही में इसके मध्यावधि के हिसाब से फायदे नजर आने लगेंगे। प्रमुख अंश...

यह डर है कि नोटबंदी  से व्यवस्था में नकदी का प्रïवाह कम होगा और इससे कम से कम तीसरी और चौथी तिमाही में आर्थिक विकास प्रभावित होगा। आपके मुताबिक क्या इस डर का कोई आधार है?
जब हम नकदी पर आते हैं तो हमें निश्चित रूप से बदलाव की अवधि और उसके बाद होने वाली गतिविधियों में भेद करना चाहिए। मोटे तौर पर 500 और 1,000 की करीब 14 लाख करोड़ रुपये मूल्य के नोट हैं, मैं जाली नोटों की गणना नहींं कर रहा हूं। आइए इसका ब्रेकअप देखते हैं। रिजर्व बैंक के 14 करोड़ रुपये के आंकड़े में मेरा अनुमान, आपके अनुमान से अलग हो सकता है।
14 लाख करोड़ रुपये में संभवत: करीब 4 लाख करोड़ रुपये काला धन है। इसमें 2 प्रकार का काला धन है। एक तरह के काले को मैं दोहरा काला कहूंगा, जहां अवैध गतिविधियों जैसे अपराध तस्करी आदि से धन जुटाया गया है। एकल काला धन ऐसा है, जो अवैध कमाई नहीं है बल्कि उस पर कर का भुगतान नहीं किया गया। कल्पना करें कि 4 लाख करोड़ रुपये में से 2.5 लाख करोड़ रुपये एकल काला है और 1.5 करोड़ रुपये दोहरा काला है। इस तरह से 1.5 लाख करोड़ रुपये मोटे तौर पर 14 लाख करोड़ रुपये का 10 प्रतिशत है। यह पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। एकल काला 2.5 लाख करोड़ रुपये है और मेरा मानना है कि इसका बड़ा हिस्सा व्यवस्था में वापस आएगा। शेष 10 लाख करोड़ रुपये मेंं से 8 लाख करोड़ रुपये शायद लेन देन से जुड़ा हुआ है। यह नकदी अस्थाई रूप से व्यवस्था के बाहर जाता है, लेकिन बीच बीच में व्यवस्था में वापस आता रहता है। शेष 2 लाख करोड़ रुपये ऐसे हैं, जिसे लोग ऐसे ही दाबकर बैठे हैं। यह अवैध नहीं है। यह 2 लाख करोड़ रुपये लोगों के लिए अनुत्पादक है, जो रुका हुआ है। यह व्यवस्था में आएगा।
कम अवधि के हिसाब से देखें तो निश्चित रूप से असर होगा। लेकिन थोड़ा मध्यावधि के हिसाब से देखें तो कुछ सकारात्मक होगा। रिजर्व बैंक, रिजर्व बैंक के बाहर, सरकार के पास ज्यादा संसाधन होगा और लोगों के ज्यादा उधारी दी जा सकेगी, सरकार ज्यादा धन खर्च कर सकेगी। इस धन का इस्तेमाल तुलनात्मक रूप से गरीब तबके की बेहतरी और उनकी सेवाओं व बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए किया जा सकेगा।

यह कम अवधि कितना होगा?
गोपनीयता की वजह से कुछ ऐसी चीजें हैं तो आप नहीं कर सकते। इसमें नोटों की छपाई, बैंको व शाखाओं को नोट दिया जाना शामिल है। इन्हें एटीएम में डालना भी एक कदम है। ध्यान रखें कि एटीएम से संचालन के लिए बैंक बड़े पैमाने पर आउटसोर्सिंग पर निर्भर हैं। ऐसे में यह बैंकों के नियंत्रण से बाहर है। हां, तीसरी तिमाही पर असर होगा, लेकिन चौथी तिमाही पर पूरा असर नहीं होगा। जनवरी के मध्य तक चीजें पटरी पर आने लगेंगी।

तीसरी व चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि कितनी रहने की संभावना है? पहली तिमाही में जीडीपी वृद्धि पिछली 5 तिमाही के निम्न स्तर 7.1 प्रतिशत पर थी। दूसरी तिमाही के आंकड़े अभी आने हैं?
नहीं। पुरानी और नई जीडीपी सिरीज का मसला है। दोनोंं सिरीज में दो मुख्य अंतर है। पुरानी सिरीज उत्पादन पर आधारित थी और नई खपत पर आधारित है। मैं अलग तर्क दे सकता हूं कि सरकार के इस कदम के बाद लोग ज्यादा खर्च करने जा रहे हैं। मुझे नहीं पता कि मात्रा के हिसाब से कितना असर होगा। दूसरे जीडीपी आंकड़ों को लेकर कोई बड़ा मतभेद नहीं है। मुझे नहींं लगता कि विमुद्रीकरण का अतिरिक्त असर होगा।

Keyword: demonetization, Currency, GDP,
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