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यह अफरातफरी भी है मौकों से भरी
संजय कुमार सिंह और तिनेश भसीन /  November 20, 2016

आकर्षक कीमत वाले शेयरों की खरीद से न केवल आपके पोर्टफोलियो पर नोट बंद करने का असर कम होगा बल्कि आपको इससे फायदा भी मिलेगा

काले धन पर अंकुश के लिए सरकार ने बड़े नोट बंद करने सहित कई कदम उठाए हैं, जिससे औपचारिक बैंकिंग तंत्र में और ज्यादा धन आने के आसार हैं। इससे एक सकारात्मक दीर्घकालिक बदलाव यह आ सकता है कि लोग शेयर बाजारों और म्युचुअल फंडों में निवेश बढ़ाने के लिए प्रेरित होंगे। पहले लोग अपना ज्यादातर पैसा सोने और रियल एस्टेट जैसी भौतिक संपत्तियों में लगा रहे थे क्योंकि वे इन संपत्तियों के जरिये अपने काले धन को छिपाना चाहते थे। अब यह लाभप्रद स्थिति धीरे-धीरे खत्म होती जा रही है, इसलिए वित्तीय आस्तियों में निवेश बढ़ सकता है। हम यहां इस बात पर विचार करेंगे कि नोट बंद करने का विभिन्न आस्ति वर्गों पर क्या असर होगा और आप इसका कैसे फायदा उठा सकते हैं।

गिरावट में खरीद के मौके
सरकार द्वारा बड़े नोट बंद किए जाने की घोषणा के बाद शेयर बाजारों में 5 फीसदी गिरावट आई है। तब से सभी इक्विटी म्युचुअल फंडों का प्रतिफल ऋणात्मक है। मिड कैप फंड 7 फीसदी और स्मॉल कैप फंड 7.94 फीसदी नीचे हैं, जबकि लार्ज कैप फंडों में 5.29 फीसदी गिरावट आई है। रियल एस्टेट और वाहन जैसे क्षेत्र सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं, जिनके सूचकांक क्रमश: 20.23 फीसदी और 11.5 फीसदी गिर चुके हैं।
निवेश प्रबंधकों का कहना है कि बाजार इस घटना पर अति प्रतिक्रिया दे रहे हैं। हालांकि कुछ कुछ क्षेत्रों पर नोट बंद करने का असर बरकरार रहेगा, लेकिन बाजार में गिरावट से अन्य लोगों के लिए आकर्षक कीमतों पर अच्छे शेयर खरीदने के मौके आए हैं। इक्विनोमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक जी चोक्कालिंगम कहते हैं, 'बड़े नोट बंद किए जाने से कीमतों में गिरावट आई है, लेकिन आपको यह भी देखना चाहिए कि मिड और स्मॉल कैप शेयर काफी चढ़ चुके थे और इन्हें गिरावट के लिए किसी घटना का इंतजार था।'
विश्लेषकों का कहना है कि शेयरों में सीधे निवेश करने वाले निवेशकों को नोटबंदी से सीधे प्रभावित होने वाले सेक्टरों से दूर रहना चाहिए। इन सेक्टरों में रियल एस्टेट, निर्माण, रत्न एवं आभूषण, सीमेंट और हाउसिंग फाइनैंस कंपनियां भी शामिल हैं। इन सेक्टरों की हालत आगे भी खस्ता रह सकती है क्योंकि ये काफी हद तक काले धन पर निर्भर हैं।  नोट बंद किए जाने के कदम से खपत आधारित क्षेत्रों पर भी बुरा असर पड़ा है। आईआईएफएल में कार्यकारी उपाध्यक्ष (बाजार और कंपनी मामले) संजीव भसीन कहते हैं, 'वाहन और एफएमसीजी क्षेत्र कुछ समय के लिए ही प्रभावित होंगे। वे जनवरी या फरवरी के अंत तक पटरी पर लौट आएंगे। इन शेयरों में संभावनाएं तलाशने का यह सही वक्त है।'
इस समय सरकारी बैंकों पर दांव लगाना भी अच्छा है। निफ्टी पीएसयू बैंक सूचकांक पिछले एक सप्ताह मेंं 9.75 फीसदी चढ़ चुका है। निवेश प्रबंधकों का कहना है कि नोट बंद करने के कदम से दरों में कटौती हो सकती है और उनका चालूू खाता और बचत खाता (कासा) अनुपात सुधर सकता है। हालांकि बेहतर सरकारी बैंकों के शेयरों की खरीदारी करनी चाहिए और भारी एनपीए वाले बैंकों के शेयरों से बचना चाहिए।
संपत्ति प्रबंधकों का कहना है कि म्युचुअल फंड निवेशकों को बाजार में गिरावट के बारे में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है और उन्हेंं किसी भी स्थिति में अपने सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) बंद नहीं करने चाहिए। उन्हें अपने पोर्टफोलियो में बड़ा हिस्सा लार्ज कैप फंडों का रखना चाहिए और मिड और स्मॉल कैप फंडों का हिस्सा केवल 20 से 30 फीसदी रखना चाहिए।

दर घटीं तो फलेंगे डेट फंड
बड़े नोट बंद किए जाने के बाद इस बात के प्रबल आसार जताए जा रहे हैं कि ब्याज दरों में गिरावट आएगी। क्वांटम म्युचुअल फंड के प्रमुख (फिक्स्ड इनकम) मूर्ति नागराजन कहते हैं, 'इससे कर अनुपालना सुधर सकती है और सरकार का कर संग्रहण बढ़ सकता है। इससे कीमतें भी नियंत्रित होंगी क्योंकि जिंसों और अन्य संपत्तियों के संग्रहण की क्षमता मेंं काफी कमी आएगी। इससे लंबी अवधि में डेट मार्केट को फायदा मिलेगा और रीपो दर में 50 आधार अंक की कटौती की जा सकती है।'
मध्यम से लंबी अवधि के डेट फंडों को आगे दरों में और कटौती की संभावना से फायदा मिलेगा। मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर इंडिया के निदेशक (प्रबंध अनुसंधान) कौस्तुभ बेलापुरकर कहते हैं, 'पिछले 6 महीनों के दौरान लंबी अवधि के डेट फंडों से काफी बड़ी राशि की निकासी हुई है। निवेशक फिर इन फंडों में कुछ राशि लगाने के बारे में विचार कर सकते हैं।'
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह पक्का नहीं है कि ब्याज दरों में गिरावट आएगी। आउटलुक एशिया कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी मनोज नागपाल कहते हैं, 'निकासी पर सीमा हटाए जाने के बाद बैंकिंग तंत्र में आ रहे पैसे का एक बड़ा हिस्सा बाहर निकल जाएगा क्योंकि यह कार्यशील पूंजी है जिसकी कारोबारों को जरूरत है।'
उन्होंने कहा कि चलन से बाहर किए गए 500 और 1,000 रुपये के नोटों को बदलने में सरकारी टकसाल जूझ रही हैं। नागपाल ने कहा, 'अगर नकदी की वर्तमान किल्लत आगे भी बनी रही तो लोग केवल आवश्यक चीजों पर ही खर्च करेंगे। इससे मुख्य मुद्रास्फीति में तेजी आ सकती है। अगर ऐसा हुआ तो लघु अवधि में दरों में कटौती नहीं होगी।' उनका मानना है कि फिलहाल इसकी 25 फीसदी संभावना है।
इन विरोधाभासी नजरियों को देखते हुए निवेशकों को अपना ज्यादातर पैसा तरल एवं अल्पावधि डेट फंड में लगाना चाहिए। जो लोग जोखिम लेना चाहते हैं, उन्हेें लंबी अवधि के फंडों में निवेश करना चाहिए। इन फंडों में निवेश डायनमिक बॉन्ड फंड के जरिये किया जा सकता है।
वर्तमान दरों पर अन्य फिक्स्ड इनकम योजनाओं में भी निवेश पर विचार किया जा सकता है। द्वितीयक बाजार से कर मुक्त बॉन्ड खरीद, सार्वजनिक भविष्य निधि, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना, सुकन्या समृद्धि योजना और लंबी अवधि की बैंक और कंपनी सावधि जमा (तीन साल से अधिक अवधि वाली) आदि ऐसे कुछ विकल्प हैं, जो फिलहाल आकर्षक हैं। 

प्रॉपर्टी खरीद के मौके
नोटबंदी से निकट भविष्य में कम सौदे होने के आसार हैं क्योंकि खरीदारों ने कीमतों में और गिरावट की उम्मीद में खरीद के फैसले को फिलहाल स्थगित कर दिया है। सैंक्टम वेल्थ मैनेजमेंट रियल एस्टेट सेवाओं के प्रमुख तेजस पाटिल ने कहा, 'डेवलपरों में वे ही डेवलपर अपनी कीमतों को स्थिर रख पाएंगे, जो अच्छे ब्रांड हैं, जिनके पास अच्छी खासी मात्रा में पैसा है और जिन्हें संस्थागत पैसा मिल रहा है और जिनकी परियोजनाएं पूरी होने जा रही हैं।'
कर्जदार डेवलपरों की स्थिति खराब हो सकती है। उन्होंने कहा, 'उन्हें अपनी बिक्री की रफ्तार  बनाए रखने के लिए कीमतें घटाने को बाध्य होना पड़ सकता है क्योंकि उन्हें अपना ऋण लौटाना होगा।'
उन श्रेणियों पर सबसे ज्यादा असर पडऩे के आसार हैं, जिनमें बिक्री कीमत और सर्कल कीमत (रेडी रेकनर दर) के बीच बड़ा अंतर है और इस अंतर को पाटने के लिए नकदी का इस्तेमाल किया जा रहा है। जमीन और लक्जरी प्रॉपर्टी ऐसी ही दो श्रेणियां हैं। पाटिल कहते हैं, 'डेवलपरों को लक्जरी प्रॉपर्टी की कीमतें घटानी होंगी या उन्हें ऐसे खरीदारों का इंतजार करना होगा जो वह प्रॉपर्टी खरीदने के लिए बड़ी राशि का ऋण ले सकते हैं।'
स्क्वायर याड्र्स की मुख्य परिचालन अधिकारी और सह-संस्थापक कनिका गुप्ता शौरी ने कहा, 'द्वितीयक बाजारों और छोटे शहरों में नकदी में लेनदेन आम हैं और सौदों की संख्या घटने के आसार हैं।'
मध्यम अवधि में तकलीफ कम हो सकती हैं। बैंकों के पास जमा के रूप में ज्यादा पैसा आ रहा है, जिससे होम लोन की दरें घट सकती हैं। इससे और कीमतों में गिरावट से बिक्री को बढ़ावा मिलेगा।
हाल में सरकार द्वारा उठाए गए कदम लंबी अवधि में इस क्षेत्र के लिए सकारात्मक साबित हो सकते हैं। आरईआरए के नियमन लागू होने से खरीदारों को ज्यादा सुरक्षा मिलेगी। काले धन की कम उपलब्धता का मतलब होगा कि कीमतें वास्तविक मांग से तय होंगी। कीमतें कृत्रिम रूप से ऊंची नहीं रहेंगी। ऐसे डेवलपरों से प्रॉपर्टी खरीदें, जिनका परियोजना का निर्माण पूरा करने का ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा हो। ऐसी प्रॉपर्टी खरीदने को तरजीह दें, जिनका निर्माण कार्य पूरा हो चुका है। वित्तीय रूप से कमजोर डेवलपरों से प्रॉपर्टी खरीदने से बचें। एक दृष्टिकोण यह है कि अगर आपने कोई सौदा नहीं किया है तो कीमतों पर स्थिति साफ होने का इंतजार करें। हालांकि इसमें तीन महीने लग सकते हैं।
हालांकि शौरी कहती हैं, 'आप खरीद करें, लेकिन सावधानी और काफी छानबीन करने के साथ। वर्तमान अनिश्चितता के कारण आपको अच्छे सौदे मिल सकते हैं। अगर प्रॉपर्टी कीमत के मुताबिक है तो इसे खरीदें। अगर आप अस्थिरता खत्म होने का इंतजार करेंगे तो कीमतेंं बढ़ भी सकती हैं विशेष रूप से अंतिम उपभोक्ता की खरीद वाले बाजारों में।'

सोने पर लगेगा ग्रहण
सोने की कीमतें काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम से तय होती हैं। आगामी महीनों के दौरान कई अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं, जिससे पीली धातु की कीमतों मेंं गिरावट आ सकती है। इनमें से प्रमुख घटनाक्रम अमेरिकी फेडरल रिजïर्व के दिसंबर में ब्याज दरें बढ़ाने के आसार हैं। कॉमट्रेंड्ज रिसर्च के निदेशक ज्ञानशेखर त्यागराजन कहते हैं कि हालांकि यह रुपये के उतार-चढ़ाव पर निर्भर करेगा, लेकिन सोने के दाम अल्पावधि में गिरकर 26,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ सकते हैं। सोना पोर्टफोलियो में एक हेज यानी सुरक्षा घेरे का काम करता है। इस समय सोना केवल तभी खरीदें, जब यह आपके पोर्टफोलियो में शामिल न हो। आदर्श स्थिति यह है कि व्यक्ति को अपने पोर्टफोलियो में 10 से 15 फीसदी आवंटन सोने के लिए करना चाहिए। इस धातु में निवेश का सबसे बेहतर तरीका सॉवरिन गोल्ड बॉन्डों की खरीद है। इसमें आपको एक ग्राम सोना भी थोक कीमतों पर मिलता है और हर साल 2.5 से 2.75 फीसदी ब्याज भी मिलता है।

Keyword: demonetization, Share, debt fund,
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