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नोटबंदी: एमएफआई शेयरों में खरीदारी का मौका
शीतल अग्रवाल /  November 20, 2016

नोटबंदी की मौजूदा प्रक्रिया से भारत फाइनैंशियल इनक्लूजन (बीएफआईएल, पूर्ववर्ती एसकेएस माइक्रोफाइनैंस), इक्विटास होल्डिंग्स और उज्जीवन फाइनैंशियल सर्विसेज का व्यवसाय प्रभावित होगा क्योंकि इनके उधारी और वसूली में नकदी का अहम (कुछ मामलों में पूरी तरह नकद लेनदेन) योगदान है।
इसी तरह अन्य एमएफआई भी सरकार के इस निर्णय से प्रभावित हो रहे हैं। कुछ नए बैंकों में से एक बंधन ने 19 नवंबर तक अपने सूक्ष्म ऋण वितरण को टाल दिया है। इक्विटास और उज्जीवन (जिन्होंने स्मॉल फाइनैंस बैंक का लाइसेंस हासिल किया है) जैसे बैंक एमएफआई सेक्टर में दबदबा बनाए रखेंगे, लेकिन उन्हें नोटबंदी के प्रभाव से जूझना पड़ेगा क्योंकि इस सेगमेंट के लिए उगाही और वितरण काफी हद तक प्रभावित हुआ है।
एमएफआई गैर-बैंकिंग सेगमेंट की जरूरतें पूरी करते हैं और इनमें हर तिमाही में 40-50 फीसदी की मजबूत दर से इजाफा हुआ था। विश्लेषकों का मानना है कि यह वृद्घि मौजूदा तिमाही में सपाट रह सकती है या इसमें कुछ गिरावट भी देखी जा सकती है।
इसलिए, इसे लेकर कोई आश्चर्य नहीं है कि 500 और 1000 रुपये के नोट बंद होने के बाद से ये शेयर प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स की तुलना में कमजोर साबित हुए हैं। बीएफआईएल, इक्विटास और उज्जीवन के शेयरों में इस अवधि में 17 फीसदी, 8 फीसदी और 20 फीसदी की गिरावट आई है जबकि सेंसेक्स में 5 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। दिलचस्प बात यह है कि इक्विटास अपने दो अन्य प्रतिस्पर्धियों को मात देने में सफल रहा है। इसकी वजह यह है कि यह अब जमाओं को स्वीकार कर मजबूत (इसका एसएफबी परिचालन शुरू हुआ है) हो सकता है जबकि उसके प्रतिस्पर्धी इसमें सक्षम नहीं हो सकते हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि इससे इक्विटास को अपेक्षाकृत अधिक आसानी से जमाओं को स्वीकार करने में मदद मिलेगी। उज्जीवन को एसएफबी परिचालन शुरू करने के लिए इस सप्ताह लाइसेंस मिला है और वह जल्द ही जमाओं को स्वीकार करने में सक्षम होगा।
विश्लेषकों का कहना है कि इस सकारात्मक बदलाव के बावजूद नोटबंदी का प्रभाव चालू और अगली तिमाही में इन कंपनियों की वितरण, संग्रहण और परिसंपत्ति गुणवत्ता पर दिखेगा। हालांकि ज्यादातर विश्लेषकों का मानना है कि यह एक अल्पावधि संकट है और इन कंपनियों का दीर्घावधि परिदृश्य मजबूत बना हुआ है।
मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषकों ने कंपनी के बारे में एक ताजा रिपोर्ट में कहा है, 'हालांकि बीएफआईएल का शेयर अल्पावधि में अस्थिर बना रह सकता है, लेकिन हम मौजूदा हालात को बिजनेस मॉडल के लिए ढांचागत जोखिम की तुलना में प्रशासनिक समस्या (जैसा कि कुछ साल पहले आंध्र प्रदेश संकट के रूप में देखने को मिला) के तौर पर अधिक देख रहे हैं।'
हालांकि अल्पावधि में इन कंपनियों के लिए चिंताएं बढ़ सकती हैं, लेकिन इनके लिए एक स्थायी या ढांचागत समस्या पैदा होने की आशंका नहीं दिख रही है।
दरअसल, यह सेक्टर दीर्घावधि में बढ़त दर्ज करने के लिए तैयार है जबकि कई असंगठित कंपनियों को संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज में शोध प्रमुख गौतम दुग्गड कहते हैं, 'मध्यावधि से दीर्घावधि के दौरान संगठित एमएफआई कंपनियां लाभ हासिल करने की स्थिति में रहेंगी क्योंकि अनौपचारिक चैनलों को आसानी से व्यवसाय करने में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।' माइक्रोफाइनैंस इंस्टीट्ïयूशंस नेटवर्क ने एमएफआई को पुराने नोट स्वीकार करने के लिए आरबीआई से अनुरोध किया है। इस संबंध में सकारात्मक घटनाक्रम एमएफआई के बोझ में कमी ला सकता है।
कुल मिलाकर, ताजा गिरावट के बाद ये तीन शेयर अपने ऐतिहासिक औसत मूल्यांकन से नीचे कारोबार कर रहे हैं और ये निवेश के लिहाज से आकर्षक हो गए हैं। जहां बीएफआईएल वित्त वर्ष 2018 की अनुमानित बुक वैल्यू के 2.6 गुना पर कारोबार कर रहा है वहीं इक्विटास और उज्जीवन के लिए यह आंकड़ा 2.2 और 2.1 गुना पर है। बीएफआईएल का मजबूत मूल्यांकन उचित है क्योंकि यह पूरी तरह अधिक मार्जिन और अधिक वृद्घि की संभावना वाले एमएफआई सेगमेंट पर केंद्रित है। वहीं अन्य दो कंपनियों का परिदृश्य भी मजबूत है, लेकिन इनका अल्पावधि वृद्घि, लाभ और प्रतिफल अनुपात नीचे आ सकता है क्योंकि उन्होंने एसएफबी बिजनेस मॉडल अपनाया है।

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