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हमें इस बारे में कोई पूर्व जानकारी नहीं थी : बैंक ऑफ इंडिया
अनूप रॉय /  November 13, 2016

बैंक इन दिनों युद्ध स्तर पर 500 और 1,000 रुपये के पुराने नोट को चलन से बाहर करने में जुटे हैं। बैंक ऑफ इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी एवं प्रबंध निदेशक मेल्विन रेगो और कार्यकारी अधिकारी आरए शंकर नारायणन ने अनूप रॉय से बातचीत में बताया कि उनका संगठन इन चुनौतियों से किस प्रकार निपट रहा है। पेश हैं मुख्य अंश:

 
आप मौजूदा परिस्थिति से निपटने के लिए अपने कर्मचारियों को किस प्रकार प्रोत्साहित कर रहे हैं?
 
रेगो: यह जाली मुद्रा के खिलाफ एक लड़ाई है। लड़ाई शुरू करने के लिए योजना बनाई जाती है और फिर उस पर अमल किया जाता है। बीच में आता है संचार। योजना बनाने की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है, संचार की प्रक्रिया भी शंकर नारायणन के जरिये अच्छे तरीके पूरी कर ली गई है। उसे शाखा स्तर पर प्रसारित कर दिया गया है। हां, यह थोड़ा कठिन जरूर होगा। लेकिन, हमें उसके लिए कहीं अधिक प्रयास करने की जरूरत होगी। हम सभी शाखाओं को निर्धारित समय से एक घंटा पहले खोलने के लिए निर्देश पहले ही दे चुके हैं और हमने बंद करने के समय का उल्लेख नहीं किया है। हमने कहा है कि अंतिम ग्राहक को निपटाने तक उसे बढ़ाया जा सकता है। शंकर नारायणन: हम पूरी तरह तैयार हैं। ग्राहकों से सही वर्ताव करने के लिए सभी शाखाओं को निर्देश दिए गए हैं। और, हमने उनसे आग्रह किया है कि यदि वरिष्ठï नागरिक, महिलाएं और बच्चे कतार में खड़े हैं तो उन्हें प्राथमिकता दी जाए। हमारे मुख्यालय के बाहर भी 7 बजे से ही लंबी लाइन लगी है। लेकिन हमें पूरा भरोसा है कि हमारे पास पर्याप्त संसाधन उपलब्ध हैं। इस परिस्थिति के प्रबंधन के लिए कर्मचारी पूरी तरह प्रेरित हैं।
 
आपने कहा कि सुबह सात बजे से लोग कतार में खड़े हैं। क्या उस समय आपकी शाखा खुली थी?
 
शंकर नारायणन: शाखा 10 बजे खुलती है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोगों से कहा है कि परेशान न हों क्योंकि ऐसा केवल एक ही दिन नहीं किया जाएगा। बैंकों में इसे 30 दिसंबर तक और भारतीय रिजर्व बैं में 31 मार्च तक किया जाएगा। ऐसे में यदि कोई तात्कालिक जरूरत न हो तो नोट बदलवाने के लिए अफरा-तफरी मचाने की कोई आवश्यकता नहीं है। अब एटीएम भी देशभर में काम करने लगेंगे और इसलिए परेशान होने की कोई जरूरत नहीं है।
 
क्या आपको इसके बारे में पहले से जानकारी थी?
 
रेगो: मुझे भी इसके बारे में तभी पता चला जब आपको इसकी जानकारी मिली थी।
 
बाद की घटनाक्रम के बारे में बताएं। आपको किस प्रकार जानकारी दी गई?
 
रेगो: मैं आपको केवल घटनाक्रम के बारे में बता सकता हूं। उस समय मैं आरबीआई में था। सबसे पहले शंकर नारायणन को फोन किया गया। उन्होंने सभी महाप्रबंधकों को तुरंत कार्यालय आने का निर्देश दिया। हम वहां मध्य रात्रि तक रहे और आगे की योजनाएं तैयार की। अगली सुबह- और रात में भी- हमने महाप्रबंधकों और क्षेत्रीय प्रबंधकों को सूचित किया कि सुबह में हमारी एक वीडियो कॉन्फ्रेंस होगी। उसमें करीब तीन घंटे तक बातचीत होती रही और परिचालन के सभी पहलुओं पर गौर किया गया। बाद में एक लिखित सूचना भी जारी की गई। हालांकि विस्तृत जानकारी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये दे दी गई थी।
 
क्या उस समय सभी बैंकों के चेयरमैन आरबीआई में मौजूद थे? क्या केंद्रीय बैंक ने आपको किसी खास उद्देश्य से बुलाया था?
 
रेगो: उन्होंने इस उद्देश्य से नहीं बुलाया था। मैं सभी बैंकों के चेयरमैन के बारे में बता नहीं सकता क्योंकि चेयरमैन देशभर में मौजूद थे। मैं यह भी नहीं बता सकता कि सभी बैंकों के प्रतिनिधि वहां मौजूद थे अथवा नहीं।
 
क्या आपको पर्याप्त नोट उपलब्ध कराए जा रहे हैं?
 
शंकर नारायणन: आरबीआई ने हमें आश्वस्त किया है। हम आरबीआई के क्षेत्रीय कार्यालय से लगातार संपर्क में हैं जहां करेंसी चेस्ट रखे जाते हैं। हमारे करेंसी चेस्ट पूरी तरह उपकरणों से लैश हैं। तात्कालिक प्रतिक्रिया अगले तीन से चार दिनों में मिल जाएगी। उसके बाद लोग जरूरत समझेंगे और सभी पुराने नोटों को नए नोट में बदलकर नकदी रखने में कोई चालाकी नहीं है। हमें 2,000 रुपये के नोटों का स्टॉक मिल गया है और आरबीआई ने जल्द ही 500 रुपये के नोटों की आपूर्ति करने का आश्वासन दिया है।
Keyword: bank, BOI, 1000, 500,,
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