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ब्याज दर घटती जाएं तो किस निवेश से आय बढ़ाई जाए
संजय कुमार सिंह /  October 16, 2016

भारतीय रिजर्व बैंक का गवर्नर बनने के बाद अपनी पहली मौद्रिक समीक्षा में ऊर्जित पटेल ने रीपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर इसे 6.25 फीसदी पर ला दिया है। रिजर्व बैंक के इस फैसले से जहां निश्चित आय वाले निवेशकों को ब्याज दरों में गिरावट से चपत लगेगी, वहीं कर्ज लेने वाले लोगों को इससे राहत मिलेगी। दोनों ही तरह के लोगों को कम ब्याज दर के माहौल में खुद को ढालने के लिए अपनी रणनीतियों में बदलाव करना पड़ेगा।

एक और कटौती मुमकिन
विश्लेषकों का अनुमान है कि निकट भविष्य में ब्याज दरों में एक और कटौती हो सकती है। आईडीएफसी म्युचुअल फंड में प्रमुख (फिक्स्ड इनकम) सुयश चौधरी का कहना है कि रिजर्व बैंक महंगाई दर के 4 से 6 फीसदी के बीच रहने से काफी सहज स्थिति में रहेगा। खासकर दालों की कीमतों में गिरावट आने से आगे चलकर देश में अवस्फीति के हालात बन रहे हैं। हाल में आए खुदरा महंगाई के आंकड़े रिजर्व बैंक के अनुमान के न्यूनतम स्तर करीब ही हैं।  ऐसी सूरत में दिसंबर या मार्च में होने वाली मौद्रिक समीक्षा में 25 आधार अंक की कटौती फिर हो सकती है। लेकिन अगर वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में ज्यादा उतार-चढ़ाव हुआ तो रिजर्व बैंक दरों में कटौती नहीं भी कर सकता है।
हालांकि अधिकांश लोगों का यही मानना है कि भारत अब उस स्थिति के करीब पहुंच रहा है जहां ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला थम जाएगा। केवल कुछ लोग ही ऐसा मानते हैं कि ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला लगातार नीचे की तरफ जाएगा। उनकी राय में तो अगले 18 महीनों में रीपो दर में 100 से लेकर 125 आधार अंक तक की कटौती हो सकती है।
सावधि जमा
निश्चित आय वाले निवेशकों को उन्हीं वित्तीय योजनाओं में निवेश करना चाहिए जो उनकी जोखिम उठा सकने की उनकी क्षमता के अनुरूप हों। चौधरी का कहना है कि जब ब्याज दरें गिरने लगती हैं तो निवेशक आम तौर पर अपनी जेब की क्षमता को नजरअंदाज करते हुए अधिक जोखिम वाली योजनाओं में निवेश शुरू कर देते हैं। उनको केवल जोखिम उठा सकने की अपनी क्षमता के अनुकूल योजनाओं में ही निवेश करना चाहिए, भले ही उन्हें कुछ समय के लिए कम रिटर्न ही क्यों न मिले?
मौजूदा ब्याज दरों पर ही अपने निवेश को लॉक कर देना भी समझदारी भरा कदम हो सकता है। आउटलुक एशिया कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी मनोज नागपाल का कहना है कि निवेशक अक्सर पिछली ब्याज दरों से मौजूदा दर की तुलना करना शुरू कर देते हैं और मौजूदा दरों का भी लाभ उठाने से चूक जाते हैं। वह कहते हैं कि वर्तमान मौका भी हाथ से चला जाएगा और अगले 6 से 9 महीनों में आज जो दरें मिल रही हैं, वे भी घट जाएंगी।
सबसे ऊंचे कर दायरे में शामिल निवेशक अगर मौजूदा दरों पर ही लंबे समय के लिए निवेश की सोच रहे हैं तो वे सेकंडरी बाजार से कर-मुक्त बॉन्ड खरीद सकते हैं। इन बॉन्ड की परिपक्वता पर 6.25-6.35 फीसदी का रिटर्न मिल जाता है। वहीं कर दायरे की निचली श्रेणी वाले निवेशक ऊंची रेटिंग वाली कंपनी जमाओं पर दांव लगा सकते हैं।
छोटी बचत योजनाओं को देखें तो ये अब भी अलग-अलग तरीके से अच्छा रिटर्न दे रही  हैं। वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) और सुकन्या समृद्धि योजना दोनों ही सालाना 8.5 फीसदी का रिटर्न दे रही हैं। ये दोनों योजनाएं क्रम से वरिष्ठ नागरिकों और बेटियों के लिए अच्छी हैं।  सार्वजनिक भविष्य निधि (पीपीएफ) पर मिलने वाला रिटर्न कर-मुक्त होता है। लिहाजा 8 फीसदी की दर पर यह अब भी आकर्षक है।

डेट फंड
ज्यादा कर श्रेणी वाले निवेशकों के लिए तीन साल से अधिक अवधि के डेट फंड कारगर साबित हो रहे हैं क्योंकि तीन साल से ज्यादा पर इनमें इंडेक्सेशन का लाभ मिलता है। निश्चित अवधि में परिपक्व होने वाली योजनाएं (एफएमपी) भी मौजूदा आय के लिहाज से निवेशकों को लाभ के अच्छे मौके उपलब्ध करा रही हैं। हालांकि वित्तीय सलाहकार फर्म प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्तीय योजनाकार विशाल धवन आगाह करते हैं कि जब आप एफएमपी में पैसा डालते हैं तो आप एक अनजान पोर्टपोलियो में निवेश करते हैं। ज्यादा रिटर्न के चक्कर में आपको क्रेडिट क्वालिटी से समझौता नहीं करना चाहिए। छोटी और मध्य अवधि के बॉन्ड (संशोधित अवधि 2 से 5 साल) खरीदते समय भी इसी तरह की सावधानी बरतनी चाहिए। चूंकि इस समय रिटर्न कम है, लिहाजा बेहतर यही होगा कि कम लागत अनुपात वाले फंड का ही चयन किया जाए। 
नागपाल डायनैमिक बॉन्ड फंडों में निवेश की सलाह देते हैं क्योंकि उनका मानना है कि अगले डेढ़ वर्षों में रीपो दर में एक फीसदी से लेकर सवा फीसदी तक की और कटौती हो सकती है। चौधरी भी इन फंडों में निवेश का सुझाव देते हैं। उनका तर्क है कि इन फंडों का प्रबंधन अच्छी तरह किया जाता है और सभी तरह के हालात में, चाहे ब्याज दरें कम हों या ज्यादा हों, इनका प्रदर्शन अच्छा रहता है। वहीं धवन निवेशक को आगाह करते हुए कहते हैं कि अब जबकि ब्याज दरें गिर रही हैं तो दूसरे ऋण फंडों की तुलना में डायनैमिक बॉन्ड फंडों में संभावित बेहतर रिटर्न के नाम पर क्या ज्यादा लागत अनुपात देना कहां तक जायाज है?
चौधरी के मुताबिक निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो का एक हिस्सा क्रेडिट फंडों में भी लगाना चाहिए पर उनको यह देख लेना चाहिए कि क्रेडिट फंडों के पोर्टफोलियो में शामिल प्रतिभूतियां ठीक हैं या नहीं।
इसके साथ ही वह आर्बिट्राज फंडों और आर्बिट्राज प्लस फंडों (इनमें आर्बिट्राज और निश्चित आय वाली रणनीतियां शामिल होती हैं) का भी सुझाव देते हैं, बशर्ते कि निवेशक के पास एक-दो साल का समय हो। वह कहते हैं कि कम ब्याज वाले दौर में भी ये फंड कर अदायगी के बाद बेहतर रिटर्न देने में सक्षम हैं।  
कम ब्याज दर की ओर
इस साल की शुरुआत से अब तक होम लोन की ब्याज दर में करीब 50 आधार अंकों की कटौती हो चुकी है। इस समय 9.25 फीसदी की सबसे अच्छी दर उपलब्ध है। अगर बैंक रिजर्व बैंक से मिली राहत का लाभ सीधे कर्जदारों को पहुंचाने का फैसला करते हैं तो होम लोन की दर में और भी कमी आ सकती है। इसका एक और पेच यह है कि नया कर्ज लेने वालों को तो कम ब्याज पर होम लोन मिल रहा है लेकिन पुराने कर्जदारों को कटौती का लाभ नहीं दिया जा रहा है। खास तौर पर आधार अंक से जुड़ी ब्याज दर पर कर्ज लेने वाले लोगों का इसका ज्यादा नुकसान झेलना पड़ रहा है। इन कर्जदारों के लिए एक विकल्प तो यह है कि वो अपने कर्ज की बकाया राशि को दूसरी जगह ट्रांसफर करा लें।
फाइनैंस बुद्धा के सह-संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी पार्थ पांडे कहते हैं कि रिजर्व बैंक के नियमों के अनुसार बैंकों को होम लोन के अग्रिम भुगतान पर किसी तरह का शुल्क लगाने की अनुमति नहीं है। लेकिन कुछ मामलों में पुराना कर्ज जल्दी चुकाने पर कुछ शुल्क लगाया जा सकता है।
नए बैंक में आपको नए कर्ज पर प्रोसेसिंग शुल्क देना पड़ेगा। ऐसी स्थिति में आपको कुल खर्च और बचत का आकलन करने के बाद ही होम लोन ट्रांसफर कराने के बारे में सोचना चाहिए। अगर आपकी प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ गई है तो अपने होम लोन पर अतिरिक्त रकम भी ले सकते हैं। तमाम परिस्थितियों पर गौर करने के बाद अगर आप होम लोन दूसरे बैंक में स्थानांतरित कर रहे हैं तो बेहतर कर्ज ही लें।
आज होम लोन या क्रेडिट लोन आसानी से उपलब्ध हैं। होम लोन लेने वालों को एक चालू खाता खोलना पड़ता है। पांडे कहते हैं कि इस चालू खाते में जितनी रकम रखी गई है, उतनी पर होम लोन का कोई ब्याज नहीं देना पड़ेगा। इससे भी ग्राहक को अच्छी खासी बचत हो सकती है।

Keyword: RBI, interest rates, repo rate,
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