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रीसेल बाजार में घर की खरीदारी में होगी आपकी समझदारी
संजय कुमार सिंह /  October 16, 2016

अधिकतर बड़े बाजारों में आवासीय परियोजनाएं जिस तरह अधूरी पड़ी हुई हैं और उनका काम पूरा नहीं हो पा रहा है, लिहाजा आजकल ज्यादातर खरीदार ऐसे घर खरीदना पसंद करते हैं जो एकदम तैयार हों और जिनमें तुरंत रहने के लिए जाया जा सके। कई निर्माणाधीन संपत्तियों में फंसे निवेशक उनसे निकलने को तैयार बैठे हैं क्योंकि उनके दाम बढ़ नहीं रहे हैं। इन दोनों बातों के कारण सेकंडरी बाजार में होशियार खरीदारों के लिए अवसर बन रहे हैं।
जो देखा है, वहीं खरीदें
हाल के समय में सबसे बड़ा जोखिम यह बनता जा रहा है कि डेवलपर की परियोजना में देर हो सकती है या फिर डेवलपर अपने वादे के अनुरूप गुणवत्ता और अन्य सुविधाएं देने में नाकाम रहे। आशियाना हाउसिंग के संयुक्त प्रबंध निदेशक अंकुर गुप्ता कहते हैं, 'रेडी-टू-मूव-इन प्रोजेक्ट में खरीदारी का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको वही मिलता है जो आपके सामने होता है।' चूंकि डेवलपर तब तक अपने सभी फ्लैट बेच चुका होता है, इसलिए खरीदारों को निवेशकों या सेकंडरी बाजार में अन्य बिकवालों पर ध्यान देना पड़ता है। याद रखें कि रहने के लिए तैयार किसी किसी रेडी-टू-मूव प्रॉपर्टी के लिए आपको सेकंडरी बाजार में कम छूट मिल सकती है जबकि किसी निर्माणाधीन परियोजना में यही छूट ज्यादा हो सकती है यानी आपको थोड़ा ज्यादा पैसा देना पड़ सकता है।
सेकंडरी बाजार से तैयार प्रॉपर्टी खरीदने के दूसरे फायदे भी होते हैं। गुडग़ांव के एक रियल एस्टेट सलाहकार प्रदीप मिश्रा कहते हैं, 'तैयार प्रॉपर्टी के मामले में पहले दिन से ही आपकी किराये की आय शुरू हो जाती है, खासकर तब जब कनेक्टिविटी भी अच्छी हो। आपको अपने आवास ऋण पर कर छूट के फायदे भी मिलने लगते हैं।' भारी छूट की तलाश करने वाले खरीदारों को निर्माणाधीन परियोजनाओं में किस्मत आजमानी चाहिए। जब बिल्डर और शुरुआती निवेशक दोनों ही अपनी इकाइयां बेचने की कोशिश कर रहे होते हैं तो निवेशक को खरीदार आकर्षित करने के लिए छूट की पेशकश करनी चाहिए। प्रॉपटाइगर में सेकंडरी सेल्स के मुख्य व्यापार अधिकारी अंकुर धवन कहते हैं, 'छूट का स्तर इस पर निर्भर करता है कि कितने निवेशक हैं जो उस परियोजना से अपना निवेश निकालना चाहते हैं। जब बाजार में आपूर्ति अधिक हो और कीमतें स्थिर हों तो तो बिकवालों की संख्या बढऩे पर छूट भी बढ़ जाती है।
लगता है ज्यादा समय
जब आप किसी बिल्डर से निर्माणाधीन परियोजना में संपत्ति खरीदते हैं तो आपको एक ही जगह पर कई विकल्प मिलते हैं। सेकंडरी बाजार में आपको कई विक्रेताओं के साथ अलग अलग बात करनी होती है। इसमें यह आकलन करने में काफी समय लगता है कि संपत्ति कैसी है और कहीं दाम ज्यादा तो नहीं हैं। हर विक्रेता अलग अलग दाम मांग सकता है। इसलिए सेकंडरी बाजार में सौदा करने में समय अधिक लगता है। कभी कभी विक्रेता नकदी में भुगतान चाहते हैं जो वेतनभोगी वर्ग के लिए जुटा पाना मुश्किल होता है। सेकंडरी बाजार में खरीदार को ब्रोकर की दलाली भी देनी होती है जो संपत्ति की कीमत का एक या दो प्रतिशत तक कुछ भी हो सकती है। किसी डेवलपर से सीधे सौदा करने के अपने फायदे हैं जिनका भी खरीदार को ध्यान रखनाचाहिए। आज मंदी के बाजार में डेवलपर भी निवेशक जितनी ही कीमत में यूनिट बेच सकता है बशर्ते उसके पास नकदी की किल्लत हो या उसके पास बेचने के लिए ज्यादा इकाइयां बची हों। वह कई चीजें साथ में मुफ्त भी दे सकता है। इतना ही नहीं, डेवलपर पुनर्भुगतान के लिए आकर्षक विकल्प की भी पेशकश कर सकता है।

कानूनी छानबीन करें
अगर आप कोई पुरानी संपत्ति खरीद रहे हैं तो उसकी टाइटल की अच्छी तरह से छानबीन कर लें। यदि संपत्ति कई बार बिकी है और उसका मालिकाना हक कई बार बदला है तो उसके बहुत सारे कागजात हो जाते हैं। लिहाजा, किसी वकील की मदद लेनी चाहिए। टाइटल की जांच से यह सुनिश्चित होगा कि संपत्ति बेचने वाला वाकई उसका मालिक है।
जब किसी डेवलपर को अपनी परियोजनाओं के लिए निवेशक मिलते हैं तो वह उनके साथ यह समझौता करता है कि लॉक-इन अवधि के दौरान निवेशक कम कीमत पर इस संपत्ति की बिक्री नहीं कर सकता। समझौते की शर्तों को अच्छी तरह से पढ़ लें। कोलियर्स इंटरनैशनल इंडिया के राष्टï्रीय निदेशक (रेजीडेंशियल सर्विसेज) सुमित जैन कहते हैं, 'अगर निवेशक लॉक-इन अवधि खत्म होने से पहले ही फ्लैट की बिक्री करता है तो डेवलपर नए खरीदार के नाम पर फ्लैट ट्रांसफर करने से इनकार कर सकता है।' इसके अलावा डेवलपर के दफ्तर में जाकर यह भी पता कर लें कि विक्रेता ने अपने सभी बकाया का भुगतान किया है या नहीं। खरीदारों को ट्रांसफर फीस को भी जेहन में रखना चाहिए क्योंकि कई डेवलपर निवेशकों से फ्लैट बेचते वक्त रकम वसूलते हैं और ऐसे में उसका बोझ खरीदार को उठाना पड़ सकता है। जैन कहते हैं, 'इस तरह के खर्च खरीदार को मिलने वाली छूट को बेकार कर गंवा सकते हैं।' यह भी हो सकता है कि बेचने वाले ने किसी बैंक से होम लोन लिया हो। अगर आप किसी और बैंक से ऋण लेना चाहते हैं तो एक बैंक से दूसरे में इस ऋण को हस्तांतरित कराना भी टेढ़ा काम होता है।

Keyword: real estate, housing projects, resale,
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