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रेरा का इंतजार या करें घर का करार!
संजय कुमार सिंह /  October 16, 2016

रियल एस्टेट क्षेत्र में मंदी छाई हुई है। मकान बिक नहीं रहे हैं। कीमतें घट गई हैं। बिल्डरों के पास नकदी का टोटा है। लिहाजा, इस क्षेत्र में सक्रिय कई बिल्डरों ने अपनी आवास परियोजनाएं लटका दी हैं या फिर वे बंद पड़ी हैं। राष्टï्रीय राजधानी क्षेत्र जैसे बड़े बाजार में खरीदार निर्माणाधीन परियोजनाओं में निवेश करके फंसना नहीं करना चाहते हैं। रियल एस्टेट नियामक प्राधिकरण यानी रेरा (आरईआरए) 1 मई से देश भर में लागू हो जाना है। अब चूंकि इस नियामक के वजूद में आने महज 6 महीने ही बचे हैं, ऐसे में खरीदार ये भी सोच रहे हैं कि क्यों न नियामक के अस्तित्व में आने तक रुक जाएं और इसके गठन के बाद ही रियल एस्टेट में निवेश किया जाए।
इसमें कोई शक नहीं कि रियल एस्टेट नियामक के गठन के बाद जमीन जायदादा में निवेश करना सुरक्षित हो जाएगा। इस कानून में प्रावधान है कि डेवलपर या बिल्डर को खरीदारों से मिली रकम का 70 फीसदी हिस्सा एक खास खाते यानी एस्क्रॉ अकाउंट में रखना होगा। इससे किसी एक परियोजना की रकम को दूसरी परियोजना में इस्तेमाल करना मुश्किल हो जाएगा। कोई परियोजना मंजूर है या नहीं, इसकी समूची जानकारी नियामक की वेबसाइट पर उपलब्ध होगी। डेवलपरों को जायदाद की बिक्री कारपेट एरिया के आधार पर करनी होगी न कि सुपर एरिया आधार पर। अगर परियोजना में देरी होती है या डेवपलर अपने वादे पूरे नहीं करता है तो ग्राहक प्राधिकरण के पास शिकायत दर्ज करा सकेगा। दोषी पाए जाने पर डेवलपर को कठोर दंड का प्रावधान है और उसे इसमें जुर्माना और जेल दोनों भी हो सक ते हैं। बिल्डर-खरीदार समझौता अभी तक एकतरफा होता था मगर नियामक बनने के बाद यह बराबरी पर होगा।
हालांकि विशेषज्ञों को मानना है कि रियल एस्टेट प्राधिकरण के अस्तित्व में आने के बाद घरों की कीमतें बढ़ सकती हैं। स्क्वायर याड्र्स के सह-संस्थापक विवेक अग्रवाल कहते हैं, 'इन नियमों को लागू करने और इनके अनुसार चलने पर डेवलपरों की लागत भी बढ़ेगी। संभावना यही है कि वे इसका बोझ ग्राहकों पर डाल सकते हैं।' उनका मानना है कि प्राधिकरण बनने के बाद नई परियोजनाएं शुरू होने की रफ्तार घट सकती है। इस समय घर खरीदने के पक्ष में तर्क भी दिए जा रहे हैं। कुशमैन ऐंड वेकफील्ड की प्रबंध निदेशक (रेसिडेंशियल सर्विसेस-इंडिया) श्वेता जैन कहती हैं, 'रियल एस्टेट कारोबार में इस समय गिरावट देखी जा रही है। लिहाजा डेवलपर आकर्षक भुगतान योजना और अतिरिक्त खूबियों के साथ रियायतों की पेशकश करने को तैयार हैं।'
जोखिम से परहेज करने वाले लोगों को प्राधिकरण बनने तक इंतजार करना चाहिए। जिन लोगों में आवश्यक जोखिम लेने की क्षमता है, वे इस समय भी खरीद सकते हैं। दिल्ली और आसपास जैसे बाजार में खरीदारों और डेवलपरों के बीच विश्वास का अभाव है, इसलिए उन्हें अधिक सावधान रहने की जरूरत है।
जो लोग अभी खरीदारी करना चाह रहे हैं उन्हें पर्याप्त जांच-परख करने की दरकार है। जैन कहती हैं, 'रियल एस्टेट में निवेश करने से पहले यह जरूर देखें कि बिल्डर ने पहले बनाई अपनी परियोजनाओं को निर्धारित समय में पूरा किया है या नहीं। यह भी देखें कि उसने वादे के अनुसार गुणवत्ता और स्पेसिफिकेशन का ध्यान रखा है या नहीं।' जिन डेवलपरों की कंपनियां कर्ज के बोझ में दबी हैं, उनको टाल दें तो अच्छा है। कई डेवलपरों को क्रिसिल रेटिंग देती है। खरीदार उससे भी बिल्डर की साख के बारे में पता कर सकते हैं। परियोजना स्थल पर जाकर जरूर देखें कि काम चल रहा है या रुका हुआ है। अगर आप आवास ऋण ले रहे हैं तो आपका बैंक भी संबंधित परियोजना के बारे में कुछ न कुछ जांच करेगा, जैसे जमीन का मालिकाना बिल्डर के पास है या नहीं। जैन कहती हैं,'निवेश से पहले यह पक्का कर लें कि परियोजना को सभी आवश्यक मंजूरियां मिल चुकी हैं।' उन डेवलपरों से तौबा कर लें जिनकी ढेर सारी परियोजनाएं चल रही हैं क्योंकि उनमें से ज्यादातर समय से पीछे हैं। 
विशेषज्ञ सही कीमत पर सौदा करने पर जोर देते हैं। लायसे फोरास के प्रबंध निदेशक पंकज कपूर कहते हैं,'परियोजना में खरीदी गई प्रॉपर्टी से 3.5 फीसदी से अधिक किराया (पूंजी मूल्य के प्रतिशत के तौर पर किराया) मिलना चाहिए।' गुडग़ांव के जायदाद सलाहकार सैनिक  एस्टेट के प्रदीप मिश्रा के अनुसार खरीदार एकदम तैयार परियोजनाओं में निवेश करके अपनी जोखिम कम कर सकते हैं। बाजार में एकदम तैयार परियोजनाओं की कीमतें भी ग्राहकों के लिहाज से आकर्षक हो गई हैं। उनके अनुसार निवेशक रीसेल बाजार में उन संपत्तियों को भी देख सकते हैं जिनमें पैसे लगाने वाले लोग कम प्रीमियम पर बिकवाली करके निकलना चाहते हैं।

Keyword: Real estate, Flats, Property,
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