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गुमराह कर बेचा, जिम्मेदारी आपकी
संजय कुमार सिंह /  October 02, 2016

हालांकि नियामक अपनी तरफ से कोशिश कर रहे हैं, लेकिन म्यचुअल फंड बेचते वक्त आपको गुमराह किया गया, यह साबित करने की जिम्मेदारी आप पर ही

गलत तरीके से बिक्री का नमूना देखिए। सर, हम एक ओपन ऐंड म्युचुअल फंड की बिक्री कर रहे हैं, जिसमें आपको कर मुक्त प्रतिफल मिलेगा। इस योजना ने पिछले साल 15 फीसदी प्रतिफल दिया था। इस पर आपका आदर्श रूप में जवाब यह होना चाहिए- अगर कोई म्युचुअल फंड योजना मुझे कर मुक्त प्रतिफल दे सकती है तो वह इक्विटी लिंक्ड सेविंग्स स्कीम (ईएलएसएस) है, लेकिन इसमें निवेश तीन साल से पहले नहीं निकाला जा सकता। हममें से ज्यादातर लोग ये सवाल नहीं पूछते और उस चीज को तुरंत खरीद लेते हैं, जिसके बारे में हम ज्यादा नहीं जानते। इससे भी बुरी बात यह कि कई बार तो निवेशकों को म्युचुअल फंड योजनाओं के रूप में बीमा योजनाएं बेच दी जाती हैं। जाहिर है, इसे लेकर नियामक भी चिंतित हैं। भारतीय रिजïर्व बैंक (आरबीआई) की हाल में जारी सालाना रिपोर्ट की प्रस्तावना में गवर्नर ने बैंकों द्वारा बीमा योजनाओं की गलत तरीके से बिक्री पर ध्यान देने का वादा किया है।
भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने भी एजेंटों और बैंकाश्योरेंंस (बैंकों द्वारा बीमे की बिक्री) के लिए कमीशन का अलग-अलग ढांचा तय करने की योजना बनाई है। इससे अनुचित बिक्री करने पर बैंक कर्मचारियों को मिलने वाला कमीशन घटेगा। हालांकि नियामक इस समस्या से निपटने की लगातार कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब भी गुमराह करते हुए की गई बिक्री से खुद को बचाने की जिम्मेदारी खरीदार पर ही है।

बैंकों के जरिये गलत बेचान
गलत तरीके से बेचने के मामले में बैंक बड़े दोषी के रूप में उभरे हैं। बैंकों के सेल्स पर्सन लक्ष्य पूरे करने के भारी दबाव के कारण कम वित्तीय समझ रखने वाले निवेशकों को बीमा योजनाओं और म्युचुअल फंडों की अनुचित तरीके से बिक्री कर देते हैं। वे इस सबसे इसलिए बचे रहते हैं कि देश में बहुत से नियामक हैं। बैंकों के बीमा और म्युचुअल फंड बेचने को ऐसा क्षेत्र माना जाता है, जिसमें कोई निर्धारित नियामक नहीं है।
बैंकों का नियमन आरबीआई करता है, लेकिन उनके द्वारा बेची जाने वाली थर्ड पार्टी म्युचुअल फंड योजनाओं का नियमन भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड और बीमा का नियमन आईआरडीएआई द्वारा किया जाता है। आउटलुक एशिया कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी अधिकारी (सीईओ) मनोज नागपाल के मुताबिक 'बैंकों की अनुचित बिक्री तभी रुकेगी, जब आरबीआई बैंकों के उन वरिष्ठ स्तर के अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करेगा, जिनके निर्देशों पर कनिष्ठ कर्मचारी गलत तरीके से बिक्री करते हैं।'

कैसे किया जाता है गुमराह
वित्तीय क्षेत्र में यह कई तरह से की जा सकती है। बहुत से मामलों में गलत सलाह के जरिये अनुचित बिक्री की जाती है और इसलिए इसे साबित करना मुश्किल होता है।

बीमा
परंपरागत बीमा योजनाएं (जैसे एंडोमेंट) बेचते समय विक्रेता सालाना 8 फीसदी गारंटीशुदा प्रतिफल और बोनस का वादा कर सकता है। वेंटेज इंश्योरेंस ब्रोकर्स के सीईओ अरविंद लड्ढा कहते हैं, 'इन दिनों ज्यादातर खरीदार यह बात समझते हैं कि यूलिप (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान) योजनाएं गारंटीशुदा प्रतिफल नहीं देती हैं। लेकिन आज भी बहुत से लोग इस बात को लेकर बेवकूफ बन जाते हैं कि परंपरागत प्लान गारंटीशुदा प्रतिफल देते हैं।' आदर्श स्थिति तो यह है कि बीमा एजेंटों को आईआरडीएआई के आदेश के मुताबिक प्रतिफल के दो आंकड़े दिखाने चाहिए। यानी 4  फीसदी और 8 फीसदी प्रतिफल। लेकिन ज्यादातर एजेंट ऊंचे आंकड़े ही दिखाते हैं। एक और सामान्य रुझान यह भी है कि उन वरिष्ठ नागरिकों को ऊंची कीमत के टर्म कवर बेच दिए जाते हैं, जिन्हें मरने के जोखिम से सुरक्षा की कोई जरूरत नहीं होती है।

स्वास्थ्य बीमा
माना कि 15 लाख रुपये की एक योजना 20 से 30 साल की उम्र के एक जोड़े को बेच दी जाती है। सवाल उठता है कि क्या वास्तव में उसे इसकी जरूरत है? यहां गलत तरीके बिक्री यह है कि वह दंपत्ति 5 लाख रुपये का आधार कवर और 10 लाख रुपये का टॉप-अप खरीद सकता है, जो उसके लिए सस्ता पड़ेगा। कई बार ज्यादा राशि के स्वास्थ्य बीम में आउट पेशेंट और अस्पताल में भर्ती के खर्च का कवर होने का वादा किया जाता है, जबकि उन्हें अस्पताल में भर्ती होने का ही कवर मिलता है। वहीं एजेंट यह भी वादा कर सकता है कि आप विश्व में कहीं भी इलाज करवा सकते हैं जबकि आपको देश में ही इलाज कराने का कवर मिलता है।

म्युचुअल फंड
आपके निवेश की अवधि तीन साल या इससे कम है, लेकिन आपको 100 फीसदी इक्विटी पोर्टफोलियो बेच दिया जाता है क्योंकि इक्विटी फंडों में डेट फंडों के मुकाबले ज्यादा कमीशन मिलता है। कर बचत वाले फंडों में भी ज्यादा कमीशन के लालच में 5 से 10 लाख रुपये का निवेश करवा लिया जाता है, जबकि कर छूट की सीमा महज 1.5 लाख रुपये है। फंड्सइंडिया डॉट कॉम के संस्थापक निदेशक श्रीकांत मीनाक्षी कहते हैं, 'कर लाभ के फेर में ज्यादा ईएलएसएस की खरीद न करें। आप अपने निवेश की जरूरत ओपन-एंडेड डायवर्सिफाईड इक्विटी फंडों के जरिये पूरी करें।' वह क्लोज ऐंडेड फंड खरीदने के प्रति बी आगाह करते हैं। वह कहते हैं, 'ऐसे फंड में निवेश न करें, जिसके कमजोर प्रदर्शन करने पर आपके पास उससे निकलने की सुविधा ही न हो।'

आवास ऋण
जब कोई ग्राहक आवास ऋण लेता है तो उसे अपने इस बड़ी देनदारी के बचाव के लिए आदर्श रूप में मॉर्गेज कवर या टर्म कवर बीमा बेचा जाना चाहिए। दरअसल, आरबीआई योजनाओं के मिश्रण की इजाजत नहीं देता है, इसलिए आदर्श तो यह है कि आवास ऋण देने वाले बैंक या वित्तीय संस्थान साथ में कोई योजना नहीं बेचें। लेकिन आम स्थिति यह है कि उसे गलत जानकारी देकर बीमा सह निवेश योजना बेच दी जाती है, जिस पर प्रीमियम अधिक होता है और इस वजह से कमीशन भी ज्यादा मिलता है। कई बार यह शर्त लगा दी जाती है कि बीमा योजना खरीदने पर ही ऋण स्वीकृत होगा।

नियामकीय बदलाव जरूरी
आज स्थिति यह है कि अगर कोई खरीदार किसी आवेदन फॉर्म पर हस्ताक्षर कर चुका होता है तो उसके लिए गलत तरीके से बिक्री की बात साबित करना बहुत मुश्किल होता है और उनमें से ज्यादातर फॉर्म को पढ़े बिना ही उस पर हस्ताक्षर कर देते हैं। भारत में नियम कायदे अकेले खरीदार को ही खरीद से पहले सतर्क रहने के लिए उत्तरदायी ठहराते हैं, जबकि वैश्विक स्तर पर नियम कायदे यह बन रहे हैं कि विक्रेता को जांच-पड़तालकर ही माल की बिक्री करनी चाहिए। इस व्यवस्था के तहत अगर अनुचित बिक्री की कोई शिकायत आती है तो निर्दोष साबित करने की जिम्मेदारी विक्रेता पर होती है।
जब तक यह बदलाव नहीं आता तब तक जल्द से जल्द सुमित बोस समिति की सिफारिशों में से एक सिफारिश लागू की जानी चाहिए। प्राइम डाटाबेस के संस्थापक चेयरमैन और इस समिति के सदस्य पृथ्वी हल्दिया कहते हैं, 'हर वित्तीय योजना के साथ एक कागज दिया जाना चाहिए जिस पर बड़े और स्पष्ट अक्षरों में योजना के बारे में अहम खुलासे और सूचनाएं होनी चाहिए। इसमें यह लिखा जाना चाहिए कि यह योजना उस ग्राहक की उम्र, आय और जोखिम के आधार पर क्यों उपयुक्त है? इस कागज पर विक्रेता के हस्ताक्षर होने चाहिए।'

Keyword: misselling, mutual funds, insurance,
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