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बैंक एफडी हो जाएंगी फिसड्डी?
प्रिया नायर /  September 25, 2016

अगर सरकारी प्रतिभूतियों पर कूपन रेट के नए बेंचमार्क को कोई संकेत माना जाए तो अब आगे चलकर बैंकों की सावधि जमाओं पर ब्याज दर और बॉन्डों पर प्रतिफल घटने के आसार बढ़ गए हैं। पिछले सप्ताह घोषित कूपन दर 7 फीसदी से कम थी। इस समय एक से तीन साल की बैंक सावधि जमाओं (एफडी) पर ब्याज दरें 7 से 7.5 फीसदी के बीच हैं और इस बात के प्रबल आसार हैं कि ये आने वाले महीनों में और कम होंगी। 

 
5नैंस डॉट कॉम के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी दिनेश रोहिरा कहते हैं, 'आगे चलकर बैंक एफडी का आकर्षण घटेगा। अगर आप महंगाई (इस समय करीब 5.5 फीसदी) और कर का हिसाब लगाएं तो बैंक जमाओं पर प्रतिफल ऋणात्मक हो सकता है। अगर आपके पास कोई बैंक एफडी है और उसके नवीनीकरण का समय नजदीक आ रहा है तो आपको कंपनी एफडी या डेट फंड जैसे निश्चित आय के अन्य विकल्पों पर विचार करना चाहिए। अलग-अलग अवधि के इन निवेश साधनों और बैंक एफडी के बीच प्रतिफल में अंतर 1 से 1.5 फीसदी है।' अच्छी रेटिंग वाली कंपनियों की सावधि जमा 8 से 9 फीसदी प्रतिफल देती हैं, जबकि छोटी अवधि के डेट फंडों में प्रतिफल 10 से 10.5 फीसदी है। हालांकि कंपनियों की एफडी में निवेश करते समय निवेशकों को हमेशा कंपनी का ट्रैक रिकॉर्ड या रेटिंग देखनी चाहिए। यह सलाह दी जाती है कि 'ए' रेटिंग वाली कंपनियों की एफडी में निवेश करें। अगर आप थोड़ा जोखिम ले सकते हैं तो आप 'बी' रेटिंग वाली कंपनियों में भी निवेश के बारे में विचार कर सकते हैं क्योंकि इनमें भी अच्छा प्रतिफल मिलता है और इन्हें जारी करने वाली कंपनियों का अच्छा ट्रैक रिकॉर्ड होता है। 
 
हाल में कुछ कंपनियों विशेष रूप से गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की ओर से जारी गैर-परिवर्तनीय डिबेंचर (एनसीडी) भी अच्छे विकल्प हैं। लेकिन आपको निवेश से पहले कंपनी के ट्रैक रिकॉर्ड और उसकी वित्तीय स्थिति पर नजर जरूर डालनी चाहिए। रोहिरा ने कहा, 'आम तौर पर खुदरा निवेशक ऐसी योजनाओं से दूर रहते हैं क्योंकि उन्हें इनके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं होती है। हालांकि अब ऑनलाइन भी निवेश करना संभव हो गया है, इसलिए उनमें निवेश करना कोई मुश्किल काम नहीं है।' निश्चित आय चाहने वाले निवेशक बढ़ोतरी की रणनीति पर या अवधि की रणनीति पर विचार कर सकते हैं। बढ़ोतरी की रणनीति में आय पर और अवधि की रणनीति में ब्याज दरों के उतार-चढ़ाव के कारण पूंजी में बढ़ोतरी पर ध्यान देता है। रकम बढ़ाने की रणनीति रखने वालों के लिए सावधि जमा, फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान (एफएमपी), एनसीडी और लघु या मध्यम अवधि के फंड ज्यादा उपयुक्त हैं। अवधि वाली रणनीति में ब्याज दरों में उतार-चढ़ाव के कारण पूंजी में बढ़ोतरी पर ध्यान दिया जाता है। इस रणनीति के लिए लंबी अवधि के फंड और डायनामिक बॉन्ड फंड सबसे ज्यादा उपयुक्त हैं। ब्याज दरें घटने की प्रबल संभावना के बीच दरों में उतार-चढ़ाव का फायदा उठाने के लिए फंडों की कुछ राशि अवधि फंडों में निवेश की जा सकती है। 
 
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज में निवेश सलाह सेवाओं के प्रमुख अभिषेक माथुर कहते हैं कि सेवानिवृत्त हो चुके जो खुदरा निवेशक ब्याज की आमदनी पर ही निर्भर हैं, उन्हें अपने मूल पोर्टफोलियो के लिए बढ़ोतरी अथवा संचय की रणनीति पर टिका रहना चाहिए। वह कहते हैं, 'सेवानिवृत्त लोगों के पोर्टफोलियो को निश्चित आय योजनाएं स्थिरता देंगी। इसलिए अगर आपको पैसे की जरूरत है या आय पर निर्भर हैं तो एफएमपी, अल्प से मध्यम अवधि के फंडों और सावधि जमाओं में निवेश करना बेहतर रहेगा।' निवेशक मध्यम अवधि के निवेश के लिए गिल्ट फंडों के बारे में विचार कर सकते हैं, भले ही ये इनकम फंड या शॉर्ट टर्म फंडों की तुलना में ज्यादा अस्थिर हों। इसमें ब्याज दर में बहुत ज्यादा गिरावट का असर नहीं होगा। इसलिए उतार-चढ़ाव भी ज्यादा नहीं होगा।
Keyword: bank, loan, debt,,
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