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प्रतिफल ज्यादा और जोखिम कम बैलेंस्ड फंड में लगाएं रकम
तिनेश भसीन /  09 18, 2016

लोकप्रिय 'बैलेंस्ड' फंड श्रेणी अक्सर निवेशकों को भ्रमित कर सकती है। कई म्युचुअल फंड कंपनियों ने इस श्रेणी में छह-छह योजनाएं चला रखी हैं, लेकिन सभी में निवेश की रणनीतियां अलग-अलग हैं। इतना ही नहीं, विभिन्न परिसंपत्ति प्रबंधन कंपनियों के कई फंड हैं, जिनके नाम तो कमोबेश एक जैसे हैं, लेकिन उनकी निवेश रणनीति में दूर-दूर तक कोई समानता नहीं है।

इक्विटी पर केंद्रित फंडों का फायदा उठाने के लिए ज्यादातर योजनाओं में 65 फीसदी या अधिक निवेश इक्विटी में ही रखने की कोशिश की जाती है। कंपनियां या तो 70 फीसदी से ज्यादा निवेश शेयरों में करते हैं या इसके लिए शेयर और डेरिवेटिव्स को चुनती हैं। लेकिन कुछ अन्य कंपनियां 25 से 50 फीसदी रकम ही शेयरों में लगाती हैं। फिर भी उन्हें डेट फंड माना जाता है और रकम निकासी पर निवेशकों को कर चुकाना पड़ता है।

बहरहाल निवेशक उनकी तरफ खिंचे आते हैं क्योंकि अनिश्चितता भरे बाजार में निवेशकों को आकर्षक प्रतिफल मिल रहा है। वैल्यू रिसर्च के आंंकड़ों के अनुसार लार्ज-कैप इक्विटी फंड श्रेणी से पिछले एक साल में 0.05 फीसदी प्रतिफल मिला है और मिड कैप श्रेण्ीा ने 2.47 फीसदी प्रतिफल दिया है। लेकिन इक्विटी केंद्रित हाइब्रिड फंडों से 4.57 फीसदी और डेट केंद्रित हाइब्रिड फंडों से 7.18 फीसदी प्रतिफल हासिल हुआ है। तीन और पांच साल की बात करें तो इक्विटी केंद्रित बैलेंस्ड फंडों ने लार्ज कैप फंडों से अच्छी रकम अपने निवेशकों को दिलाई है।

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर, इंडिया में निवेशक धवल कपाडिय़ा कहते हैं, '2014 में केंद्रीय बजट में डेट फंडों के लिए कराधान नियम जैसे ही बदले गए, निवेशकों ने इक्विटी पर केंद्रित बैलेंस्ड फंडों पर दुलार लुटाना शुरू कर दिया।' पहले निवेशक एक साल बाद गैर-इक्विटी फंडों पर दीर्घ अवधि के पूंजीगत लाभ का दावा कर सकते थे। अब यह अवधि बढ़ाकर तीन साल कर दी गई है। वैल्यू रिसर्च का कहना है कि 2014 में ही इक्विटी केंद्रित बैलेंस्ड फंडों में निवेश 9,950 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो साल भर पहले महज 25 करोड़ रुपये था।
लेकिन रणनीतियां अलग-अलग होने के कारण बैलेंस्ड फंडों का मूल्यांकन अधिक पेचीदा हो गया है। जानकारों का कहना है कि शेयरों में निवेश के साथ जो अनिश्चितता जुड़ी है, अगर आप उससे बचना चाहते हैं तो इक्विटी केंद्रित बैलेंस्ड फंड आपके काम आ सकते हैं।

लैडर7 फाइनैंशियल एडवाइजर्स के संस्थापक सुरेश सदगोपन कहते हैं, 'ऐसी योजनाओं में फंड प्रबंधक बाजार की परिस्थितियों पर नजर रखते हैं और उन्हीं के मुताबिक डेट और इक्विटी में आवंटन बदलते रहते हैं। इससे ऐसे निवेशकों को मदद मिलते हैं जो पोर्टफोलियो को बार-बार संतुलित करने में अपना वक्त खर्च नहीं करना चाहते। इसमें यह काम फंड प्रबंधक करते हैं और निवेशक झंझट से बच जाते हैं।'

आईसीआईसीआई पू्रडेंशियल के प्रवक्ता कहते हैं कि बाजार में उभार आने पर अक्सर निवेशक शेयरों में पैसा झोंक देते हैं। लेकिन जैसे ही गिरावट आती है, वे बिकवाली शुरू कर देते हैं। इस मनोदशा से पार पाने के लिए निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में संपत्ति का आवंटन करने वाले फंड शामिल करने चाहिए। जब शेयरों की कीमत कम होती है तो ये फंड उनमें रकम लगाते हैं और जब भाव चढ़ जाता है तो मुनाफावसूली करते हुए शेयर बेच देते हैं। इक्विटी केंद्रित बैलेंस्ड योजनाओं में अगर निवेशक एक साल से अधिक समय तक निवेश बनाए रखते हैं तो उन्हें कर भी नहीं चुकाना पड़ता। फंड्सइंडिया में म्युचुअल फंड रिसर्च प्रमुख विद्या बाला कहती हैं कि ये ऐसे निवेशकों के लिए अनुकूल होती हैं, जिनके पास विभिन्न फंडों में निवेश के लिए अतिरिक्त रकम नहीं होती है।

हालांकि इक्विटी केंद्रित बैलेंस्ड फंड उन लोगों के लिए बेहतर विकल्प नहीं हो सकते हैं, जो पहली बार शेयरों में निवेश करने जा रहे हैं। कई ऐसे निवेशक हैं, जो परंपरागत तौर पर फिक्स्ड डिपॉजिट में निवेश करते हैं और थोड़े अधिक प्रतिफल के लिए शेयरों में निवेश करना चाहते हैं। ऐसे निवेशकों को मासिक आय योजनाओं अथवा डेट केंद्रित बैलेंस्ड फंडों पर नजर दौड़ानी चाहिए। ये फंड शेयरों में 25-40 प्रतिशत तक निवेश रखते हैं। सेवानिवृत्त लोगों पर भी यही बात लागू होती है, जिन्हें इक्विटी में अधिक निवेश नहीं करना चाहिए।

अगर आपके पास जोखिम लेने की क्षमता के आधार पर पर्याप्त परिसंपत्ति आवंटन के लिए रकम है तो जानकार बैलेंस्ड फंड की जगह लार्ज-कैप इक्विटी फंड और प्योर डेट फंडों में निवेश की सलाह देते हैं। आउटलुक एशिया कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी मनोज नागपाल कहते हैं, 'हमेशा ऐसा निवेश करना चाहिए, जिसे आप अच्छी तरह समझते हैं।' नागपाल कहते हैं कि कराधान में बदलाव के बाद कई ऐसे बैलेंस्ड फंडों ने अपनी निवेश रणनीति बदल ली है। यह जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि यह दोबारा भी हो सकता है।
Keyword: प्रतिफल, जोखिम, बैलेंस्ड फंड, निवेशक, निवेश रणनीति, पोर्टफोलियो, प्रोफाइलिंग, वित्तीय योजना,
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