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जिंदगी के आखिरी पड़ाव पर.. सुकून और सुविधाओं भरा घर
संजय कुमार सिंह /  September 05, 2016

अभिमन्यु जैन को दिल्ली के नजदीक भिवाड़ी में रहते करीब आठ साल गुजर चुके हैं। वह 'आशियाना उत्सव' में रहते हैं, जो बुजुर्गों के लिए बनाई गई आवासीय परियोजा है। हालांकि जैन की दो पुत्रियां हैं मगर सॉफ्टवेयर सेवा प्रदाता कंपनी आईबीएम में कंप्यूटर इंजीनियर के तौर पर काम करने वाले जैन सेवानिवृत्त होने के बाद आजाद जिंदगी जीना चाहते थे। सेवानिवृत्त लोगों के लिए बनाया गया यह आशियाना उन्हें इसलिए पसंद है कि यहां एक अकेला आदमी भी आराम से रह सकता है। यहां न केवल खाने-पीने और चिकित्सा की सुविधाएं हैं बल्कि तमाम दूसरी तरह की ऐसी गतिविधियां हैं जिनमें यहां के निवासी मसरूफ रहते हैं। रखरखाव, कपड़ों की धुलाई या बिलों का भुगतान जैसी सुविधाओं का भी खयाल रखा जाता है।

 
बढ़ती मांग
 
जैन जैसे वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर वरिष्ठï नागरिकों के कारण ही उन जैसों के लिए खासतौर पर विकसित आवासीय परियोजनाओं की मांग बढ़ रही है। मिली-जुली आबादी और सामाजिक रुझान भी इसे बढ़ावा दे रहे हैं। भारत की जनगणना के अनुमानों के अनुसार कुल आबादी में बुजुर्गों का प्रतिशत 2001 के 7.4 फीसदी से बढ़कर 2026 तक 12.4 फीसदी हो जाने की संभावना है। भारत में वर्ष 2011 में लगभग 7.6 करोड़ बुजुर्ग थे। यह आंकड़ा वर्ष 2025 तक दोगुना होकर 17.3 करोड़ हो जाने की संभावना है।
 
लोग कई वजहों से इस तरह की परियोजनाओं के विकल्प को तरजीह दे रहे हैं। इसके सामाजिक कारण भी हैं। जैसे, संयुक्त परिवार टूट रहे हैं, बच्चे विदेश या दूसरे शहर में काम-धंधा कर रहे हैं, बच्चों पर बोझ नहीं बनने की इच्छा या अपनी उम्र के लोगों के साथ स्वतंत्र रुप से रहना। इसके अलावा, इन मौजूदा परियोजनाओं में आधुनिक स्तर की सुविधाएं होना और इनको लेकर बनी भ्रांतियों का टूटना भी इस रुझान में मददगार है। बढ़ती मांग के कारण इस तरह के घरों की आपूर्ति में भी इजाफा हुआ है। इस समय  कम से कम 30 कंपनियां इस क्षेत्र में आवासीय परियोजनाएं विकसित कर रही हैं। इनमें आशियाना हाउसिंग, मैक्स, टाटा हाउसिंग, मंत्री, ब्रिगेड और परांजपे स्कीम्स शामिल हैं।
 
खरीदें, किराये पर लें या लीज पर लें
 
खरीदें: यह विकल्प उनके लिए अच्छा है जिनके पास पैसा है। परांजपे स्कीम्स (कंस्ट्रक्शन) के प्रबंध निदेशक शशांक परांजपे कहते हैं, 'मकान की खरीदारी यह सुनिश्चित करती है कि आप ताउम्र उसमें रह सकते हैं। आपको यह चिंता करने की जरूरत नहीं होगी कि आपको यहां से निकाला जा सकता है।' जो लोग अपने घर को बेच देते हैं और इस रकम से रिटायरमेंट होम खरीदते हैं, उनको पूंजीगत लाभ पर भी कर की बचत होती है। संपत्ति में जो भी पूूंजी वृद्घि होगी, उसका लाभ खरीदार या उसके वारिसों को मिलेगा। इस विकल्प में एकमात्र जोखिम यह है कि बुजुर्ग को इसकी खरीदारी पर अपने सेवानिवृत्ति कोष का बड़ा हिस्सा खर्च करना पड़ सकता है। इसके अलावा उनके वारिस या आश्रित न्यूनतम उम्र सीमा पार करने के बाद ही इसमें रहने के हकदार होंगे।
 
लीज:  लीज लेने या पट्टïा लेने पर खरीदार को अग्रिम तौर पर एक निश्चित रकम जमा करनी होती है और उसके बाद उसे नियमित रूप से किराया और अन्य शुल्क देने पड़ते हैं। अगर आप किसी संपत्ति को पट्टïे पर लेते हैं तो आपके लिए खर्च अपेक्षाकृत कम पड़ता है। इसका एक व्यावहारिक फायदा यह भी है कि अगर बच्चे विदेश में रहते हैं तो माता-पिता के देहांत के बाद उन्हें संपत्ति बेचने का झंझट मोल नहीं लेना पड़ता। जब लीज अवधि पूरी हो जाती है तो एक निश्चित राशि काटकर शेष रकम लौटा दी जाती है। कोवाई प्रॉपर्टी सेंटर के प्रबंध निदेशक ए श्रीधरन कहते हैं, 'इस मॉडल का नुकसान यह है कि लीज से संपत्ति में होने वाली पूंजी बढ़ोतरी का लाभ नहीं मिलता है।' यदि आप लीज से जल्द निकलना चाहते हैं तो आप डेवलपर की सहमति पर ही निकल सकते हैं।
 
किराया: जिन लोगों को यह भरोसा नहीं कि वे ऐसी परियोजना में रह भी पाएंगे या नहीं, वे कुछ वर्षों तक इनमें किराये पर रह कर इसका अंदाजा लगा सकते हैं। यदि उनको यह पसंद आए तो फिर वे इन्हें खरीदने पर विचार कर सकते हैं। लेकिन किराये पर रहना लंबी अवधि के लिहाज से जोखिम भरा हो सकता है क्योंकि डेवलपर किसी भी वक्त आपको मकान खाली करने के लिए कह सकता है।
 
सोच-विचारकर फैसला
 
संभावित खरीदारों को यह ध्यान रखना चाहिए कि सेवानिवृत्ति वाली आवासीय परियोजना में सेवा एवं सुविधा एक अहम मसला होता है। आशियाना हाउसिंग के संयुक्त प्रबंध निदेशक अंकुर गुप्ता कहते हैं, 'उसी डेवलपर की परियोजना में रकम लगाएं जो ऊंची गुणवत्ता की सेवा मुहैया कराने में सक्षम हो।' आशियाना हाउसिंग की भिवाड़ी, जयपुर, लवासा और चेन्नई में बुजुर्गों के लिए आवासीय परियोजनाएं हैं। जोंस लैंग लसॉल में रणनीतिक परामर्श में परिचालन प्रमुख ए शंकर भी इससे सहमत हैं। वह कहते हैं, 'हालांकि पैसा लगाकर आप सुविधाएं जुटा सकते हैं, लेकिन यह देखने की जरूरत होगी कि किस तरह से इनका प्रबंधन किया जाता है और सेवाएं किस तरह मुहैया कराई जा रही हैं। इसी से परियोजना की लोकप्रियता तय होती है।' डेवलपर और उसकी परियोजना में ऐसी क्षमता होनी चाहिए जो वरिष्ठï नागरिकों के लिए उनके बाद के वर्षों में सहायक हों। श्रीधरन कहते हैं, 'जैसे जैसे बुजुर्गों की उम्र बढ़ती है, उनकी लंबी अवधि की या तुरंत ही सहायता और देखभाल की जरूरत बढ़ जाती है। इसलिए ऐसी परियोजनाओं में डॉक्टरों, नर्सों और सेवा परिचारकों से युक्त और प्रबंधित विशेष केंद्रों की जरूरत है जो इन बुजुर्गों की बढ़ती उम्र से जुड़ी देखभाल एवं पुनर्वास सेवा मुहैया करा सकें।'
 
ऐसी परियोजना का चयन करें जिसमें डेवलपर बिक्री और लीज/किराया मॉडल दोनों उपलब्ध करा रहा हो। शंकर कहते हैं, 'परियोजना में सभी इकाइयां बेचने वाला मॉडल अक्सर सटोरिया खरीदारी को बढ़ावा देता है। बिकने के बाद परियोजना का बड़ा हिस्सा खाली रह सकता है।' इस तरह की परियोजना में एक मेल-मिलाप भरा जीवंत समुदाय तैयार करना मुश्किल हो जाता है। लेकिन आपको अपनी सेवानिवृत्ति के बाद के लिए ऐसी परियोजना से बचना चाहिए, जिसमें डेवलपर ने सभी घर बेच दिए हों और सेवाओं को जिम्मा बाहरी एजेंसी या शख्स को दे दिया हो। परांजपे का कहना है, 'यदि सेवा प्रदाता को बढिय़ा मुनाफा नहीं मिलता है तो वह वहां से निकल सकता है। ऐसे में वरिष्ठï नागरिक भी अधर में लटक सकते हैं। इसलिए ऐसे डेवलपर का चयन करें जिसका अपनी परियोजनाएं चलाने का अच्छा रिकॉर्ड रहा हो।' जैन कहते हैं कि समय रहते सबसे पहले मौके पर जाकर देखिए कि वहां लोग रहते हैं या नहीं। यह भी देखिए कि बिल्डर की इस तरह की पुरानी परियोजनाएं कैसी चल रही हैं। 
 
क्या निवेश सही है?
 
वित्तीय योजनाकार मानते हैं कि रिटायरमेंट होम को निवेश योजना नहीं मानना चाहिए। निवेश तभी करें जब आपको इसकी जरूरत हो। कई डेवलपर आपको इस तरह का आश्वासन दे सकते हैं कि मांग अधिक है और सप्लाई कम और ऐसे में आप मुनाफा कमाकर निकल सकते हैं। लेकिन हो सकता है कि बाद में आपका अनुभव इससे अलग हो। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स में मुख्य वित्तीय योजनाकार विशाल धवन कहते हैं, 'आप इसे 50 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को ही बेचने में सक्षम होंगे। इस तरह की संपत्ति से प्रतिफल मांग-आपूर्ति और परियोजना की गुणवत्ता पर निर्भर करेगा। यदि भविष्य में आपूर्ति बढ़ती है तो आपका प्रतिफल कम हो सकता है। परियोजना की गुणवत्ता, उसके रखरखाव और वहां किस तरह की जिंदगी है, इससे आपका प्रतिफल तय होगा।'
Keyword: retirement, salary, fund,,
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