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इतना कमाएं कि 60 के बाद 25 साल गुजर जाएं
संजय कुमार सिंह /  September 05, 2016

वेतन के तौर पर मिलने वाली नियमित रकम बंद होने, जीवन प्रत्याशा बढऩे और स्वास्थ्य एवं अन्य व्यय में बढ़ोतरी से सेवानिवृत्त व्यक्तियों को रिटायरमेंट के बाद अगले 25 सालों के लिए अपना सेवानिवृत्ति कोष तैयार करने में खासी चुनौती का सामना करना पड़ता है। सेवानिवृत्त व्यक्तियों को सेवानिवृत्ति पर कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), गैच्युटी आदि से एक मोटी रकम मिलती है। इनमें से कई व्यक्ति इनका एक बड़ा हिस्सा अपने बच्चों को दे देते हैं।

 
राइट होराइजन्स के मुख्य कार्याधिकारी अनिल रेगो कहते हैं, 'शुरुआत में ही रकम देकर सेवानिवृत्त व्यक्ति जोखिम मोल ले लेते हैं, क्योंकि महंगाई के मद्देनजर उनके जीवन पर्यंत खर्च के लिए बचा हुआ पैसा उनकी जरूरत के लिए पर्याप्त नहीं रह पाता। लिहाजा, रकम का स्थानांतरण केवल वसीयत के जरिये होना चाहिए।' कई सेवानिवृत्त व्यक्ति फिक्स्ड-इनकम योजनाओं में अधिक निवेश करते हैं। अंकुर कपूर एडवाइजरी के अंकुर कपूर कहते हैं,'अगर आप कुछ हद तक जोखिम लेने के लिए तैयार हैं तो आपको कुछ रकम शेयरों में भी आवंटित करनी चाहिए। इससे आपको लंबे समय के लिए महंगाई से निपटने में मदद मिलेगी।'
 
कई लोगों का अपनी संपत्ति का बड़ा हिस्सा आवासीय क्षेत्र में होता है जहां किराये से प्राप्त रकम महज 2-3 प्रतिशत होती है। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य वित्तीय अधिकारी विशाल धवन कहते हैं, 'चूंकि, सेवानिवृत्त व्यक्तियों को अब अधिक रकम सृजित करने की आवश्यकता होती है, इसलिए उन्हें इस बात पर अच्छी तरह विचार कर लेना चाहिए कि घर बेचकर वित्तीय योजनाओं में रकम लगाना उनके लिए अच्छा है या नहीं।' अपार्टमेंट गैर-तरल परिसंपत्ति होते हैं यानी उनसे फौरन नकदी हासिल करना आसान नहीं होता, इसलिए आपात स्थिति में आप उन्हें जल्दी नहीं बेच पाएंगे।
 
कई सेवानिवृत्त लोगों के पास स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी भी नहीं होती है। अधिक प्रीमियम के बावजूद वरिष्ठï नागरिकों को स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदनी चाहिए। रेगो कहते हैं, 'पॉलिसी खरीदते वक्त जो बीमारियां इस पॉलिसी के तहत नहीं आती हैं, उन पर जरूर गौर करें और पहले से मौजूद किसी बीमारी और साथ में अपना भुगतान करने संबंधी प्रावधान आदि से जुड़ीं शर्तों पर विचार जरूर करें।'
 
इसके बाद सेवानिवृत्त व्यक्तियों को अपने पोर्टफोलियो में कुछ बदलाव भी करना चाहिए। इसके लिए सबसे पहले अपने खर्च को निश्चित एवं ऐच्छिक श्रेणियों में बांट लें। अपने निश्चित खर्च के लिए रकम सृजित करने के लिए निश्चित आय योजनाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। कर देनदारी कम करने के लिए उतनी ही रकम अर्जित करें, जितनी आपको आवश्यकता होती है। बाकी रकम शेयरों में निवेश की जा सकती है।  
 
सेवानिवृत्त व्यक्ति जिन नियत आय योजनाओं में निवेश कर सकते हैं, उनमें कई तरह के विकल्प हैं। उनके लिए वरिष्ठ नागरिक बचत योजना (एससीएसएस) काफी मुफीद साबित हो सकती है। इसके अलावा डाकघर मासिक आय योजना (पीओएमआईएस), बैंक और कंपनियों की फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी), ऋण म्युचुअल फंड आदि भी उनके लिए बचत के लिहाज से व्यावहारिक हो सकती हैं। 8.6 प्रतिशत यानी खासी ऊंची ब्याज दर देने वाली एससीएसएस और तकीबन 7.8 प्रतिशत की दर से ब्याज देने वाली पीओएमआईएस का इस्तेमाल नियमित आय अर्जित करने में हो सकता है।
 
आय के कर योग्य दायरे में आने के बाद कर बचत के लिहाज से बेहतर समझी जाने वाली योजनाओं जैसे ऋण म्युचुअल फंड खासकर, छोटी अवधि के ऋण फंडों का इस्तेमाल कर सकते हैं। इसके लिए तीन साल बाद सिस्टमेटिक विदड्राल प्लान यानी एसडब्ल्यूपी का इस्तेमाल कर सकते हैं। दूसरे विकल्प के तौर पर सेवानिवृत्ति से तीन साल पहले शेयरों से रकम निकालकर ऋण फंडों में निवेश कर सकते हैं। इससे एसडब्ल्यूपी विकल्प तुरंत इस्तेमाल करने में मदद मिलेगी। अगर आप निश्चित आय योजनाओं का चयन करने जा रहे हैं तो आपको तरलता पर ध्यान देने की जरूरत पड़ेगी। जिन लोगों के पास मोटी रकम पड़ी है, उन्हें किसी भी तरह की देर किए बगैर एन्युइटी में निवेश करना चाहिए। इसमें मूलधन को हाथ लगाना आपके लिए आसान नहीं होता। लेकिन एन्युइटी का फायदा यह है कि वे जीवन भर के लिए निश्चित प्रतिफल देती हैं और पुनर्निवेश का कोई जोखिम भी नहीं होता है। आपकी उम्र के लिहाज से आपको एक एन्युइटी से 6.0-7.5 प्रतिशत के बीच प्रतिफल मिल सकता है। 
 
एफडी में निवेश करते वक्त बैंकों के टू-इन-वन खाते का इस्तेमाल करें, जिनसे आसानी से रकम निकाली जा सकती है। केवल ब्याज दरें देखकर ही निवेश न करें। यह भी सुनिश्चित करें कि बैंक मजबूत हालत में है। धवन कहते हैं, 'एफडी कुछ इस तरह बनवाएं कि वे विभिन्न समय पर परिपक्व होती रहें जिससे कि पुनर्निवेश का जोखिम कम हो जाए।' जिन लोगों के पास पांच साल या उससे अधिक समय के लिए रकम छोडऩे की क्षमता है, वे शेयरों में निवेश कर सकते हैं। इसके लिए डाइवर्सिफाइड-इक्विटी फंडों जैसे लार्ज-कैप और मल्टी-कैप फंडों का इस्तेमाल करें। शेयरों में निवेश के लिए एकमुश्त निवेश न कर सिप या एसटीपी का इस्तेमाल करें।
Keyword: retirement, salary, fund,,
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