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आय पर दबाव, पर मौके हैं बरकरार
शीतल अग्रवाल /  August 28, 2016

भारतीय उद्योग जगत की आय वृद्घि ने पिछली कुछ तिमाहियों के साथ साथ पिछले दो वर्षों के दौरान निवेशकों को निराश किया है। हालांकि मार्च तिमाही अपेक्षाकृत बेहतर रही थी। राजस्व वृद्घि बाजार अनुमान और इससे पहले की कुछ तिमाहियों की तुलना में बेहतर थी। जून तिमाही में रुझान अब तक मिश्रित रहा है। धीमी आर्थिक वृद्घि, भारी कर्ज और निजी कंपनियों द्वारा किए जाने वाले नए पूंजीगत खर्च में सुस्ती उन कारकों में शामिल हैं जिनकी वजह से भारतीय उद्योग जगत के वित्तीय नतीजे प्रभावित हुए हैं। इसलिए, इसमें आश्चर्य नहीं है कि बीएसई-100 शेयरों की सूची में शामिल ज्यादातर कंपनियों ने अब आय अनुमान में कटौती दर्ज की है। 

 
हालांकि, 6 ऐसे शेयर हैं जिनके एक वर्ष आगे (वित्त वर्ष 2017) के आय अनुमानों में (30 जून तक के आंकड़े के आधार पर) लगातार तीन तिमाहियों से वृद्घि देखी गई है। इन आठ कंपनियों में भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, जेएसडब्ल्यू स्टील, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा फाइनैंशियल सर्विसेज, यूपीएल और वेदांत शामिल हैं। ग्रासिम और टाटा स्टील भी सूची में शामिल हैं। लेकिन ग्रासिम के साथ आदित्य बिड़ला के ताजा विलय को देखते हुए निवेशक इन शेयरों पर स्थिति स्पष्टï होने तक इंतजार करना पसंद कर सकते हैं। टाटा स्टील के लिए भी ब्लूमबर्ग के ज्यादातर विश्लेषकों ने 309 रुपये के अपने औसत कीमत लक्ष्य के साथ 'बिकवाली' करने का सुझाव दिया है। इससे इस शेयर में मौजूदा स्तरों से 20 फीसदी की गिरावट का संकेत मिलता है। शेष कंपनियों के संदर्भ में यहां कुछ ऐसी कंपनियों पर प्रकाश डाला जा रहा है जिन पर निवेशक गिरावट आने पर विचार कर सकते हैं। इन कंपनियों का चयन आय वृद्घि की संभावना और ब्रोकरों द्वारा अनुकूल (खरीदें) रेटिंग के आधार पर किया गया है। 
 
बीपीसीएल/एचपीसीएल
 
ब्लूमबर्ग के अनुमानों के अनुसार एचपीसीएल और बीपीसीएल जैसी तेल विपणन कंपनियां वित्त वर्ष 2016-18 के दौरान आय में सालाना आधार पर सपाट वृद्घि दर्ज कर सकती हैं। लेकिन परिचालन के मोर्चे पर सुधार और मजबूत संभावनाओं को देखते हुए बाजार इसे लेकर चिंतित नहीं है। डीजल कीमतों को नियंत्रण-मुक्त किए जाने और अंडररिकवरी में कमी की वजह से इन कंपनियों ने वित्त वर्ष 2016 के शुद्घ लाभ में बड़ा सुधार दर्ज किया। इससे पहले अंडररिकवरी के लिए सरकारी मदद के समय को लेकर अनिश्चितता की वजह से इनका मुनाफा बेहद अस्थिर था।
 
भविष्य में इन दोनों कंपनियों को कच्चे तेल कीमतों में नरमी और कार्यशील पूंजी तथा ब्याज लागत में कमी का लाभ मिलेगा। हालांकि डीजल कीमतों को नियंत्रण-मुक्त किया जाना उनके विपणन मार्जिन के लिए सकारात्मक है, लेकिन केरोसिन की कीमत में वृद्घि की वजह से शेयर कीमतें चढ़ सकती हैं। दरअसल, दोनों कंपनियों को रिफाइनिंग व्यवसाय के परिदृश्य में आ रहे सुधार की वजह से नुमालीगढ़ रिफाइनरी और एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी में अपने निवेश को भुनाने से लाभ मिल सकता है। बीपीसीएल की पहली तिमाही का परिणाम 1 सितंबर को घोषित किया जाएगा, लेकिन सोमवार को एचपीसीएल ने अपने वित्तीय परिणाम की घोषणा कर दी है। एचपीसीएल का शुद्घ लाभ सालाना आधार पर 30 फीसदी बढ़कर 2,098 करोड़ रुपये हो गया है। वहीं अन्वेषण और उत्पादन व्यवसाय में अनुकूल सुधार बीपीसीएल के लिए अन्य उत्प्रेरक होगा। 
 
जेएसडब्ल्यू स्टील 
 
कंपनी द्वारा दो अंक की बिक्री वृद्घि दर्ज किए जाने की संभावना है। जेएसडब्ल्यू ने मजबूत नकदी प्रवाह भी हासिल किया है। जेएम फाइनैंशियल के विश्लेषकों ने एक ताजा रिपोर्ट में लिखा है, 'हमें विश्वास है कि अपने प्रतिस्पर्धियों की तुलना में जेएसडब्ल्यू अपने शानदार रिकॉर्ड को देखते हुए मौजूदा चुनौतीपूर्ण इस्पात बाजार में अपनी लागत को पुन: समायोजित करने में अधिक सक्षम होगी।' आयात के खिलाफ सरकार का सहायक रुख सकारात्मक है, हालांकि इस संबंध में किसी तरह की बाधा इस शेयर और घरेलू उद्योग की चाल प्रभावित कर सकती है। 
 
एमऐंडएम फाइनैंशियल सर्विसेज
 
ग्रामीण बाजारों में अपनी मजबूत उपस्थिति की वजह से एमऐंडएम फाइनैंशियल सर्विसेज अच्छे मॉनसून का लाभ उठाने के लिए तैयार है। ग्रामीण परिदृश्य में सुधार से न सिर्फ ऋण वृद्घि को मजबूती मिलेगी बल्कि इसका परिसंपत्ति गुणवत्ता पर भी अनुकूल असर दिखेगा, क्योंकि मौजूदा कर्जदारों की ऋण अदायगी की क्षमता में सुधार आया है। कोष की घटती लागत और ट्रैक्टरों एवं यूटिलिटी वाहनों के मजबूत प्रतिफल वाले सेगमेंटों के लिए ऋण में तेजी से  शुद्घ ब्याज मार्जिन भी बढ़ सकता है। 
 
यूपीएल
 
यूपीएल अच्छे मॉनसून से फायदा उठाने वाली प्रमुख लाभार्थी कंपनियों में शामिल है। लातिन अमेरिकी बाजार में लगातार मजबूती, 20 फीसदी राजस्व कंपनी के लिए वृद्घि की रफ्तार मजबूत बनाने वाले अन्य कारक होंगे। कंपनी प्रबंधन को उम्मीद है कि इस साल राजस्व 12-15 फीसदी बढ़ेगा और एबिटा में 60-100 आधार अंक तक की तेजी आएगी। डाइवर्सिफाइड पोर्टफोलियो के साथ साथ कंपनी द्वारा ब्रांडिंग और नए उत्पाद लॉन्च पर लगातार ध्यान केंद्रित किया जाना अन्य सकारात्मक बदलाव हैं। कंपनी वित्त वर्ष 2018 में एडवांटा के विलय से भी लाभान्वित हो सकती है।  
 
वेदांत
 
विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी के जस्ता, एल्युमीनियम और विद्युत व्यवसायों के सुधरते परिदृश्य और क्षमता वृद्घि वेदांत के लिए प्रमुख उत्प्रेरक होंगे। सस्ते तेल की उपलब्धता से लागत किफायत को भी मजबूती मिलेगी। आईआईएफएल में विश्लेषक तरंग भानुशाली कहते हैं, 'केयर्न इंडिया का विलय वेदांत को उसके मजबूत नकदी प्रवाह तक पहुंच उपलब्ध कराएगा और साथ ही नकदी की स्थिति में भी सुधार आएगा।' कर्ज में कमी आने से भी नकदी प्रवाह को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी। 
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