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पोंजी से बचने के लिए रिजर्व बैंक करेगा आपको 'सचेत'
तिनेश भसीन /  August 28, 2016

सचेत की वेबसाइट डब्ल्यू डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट सचेत डॉट आरबीआई डॉट ओआरजी डॉट इन पर जाएं 

व्यक्तिगत जानकारी सहित शिकायत पंजीकरण फॉर्म भरें  
नियामक चुनें और संबंधित जानकारी उपलब्ध कराएं। अगर आपको ठीक से नहीं पता है तो 'नियामक का नहीं पता' का विकल्प भरें  
दस्तावेज स्कैन कर अपलोड करें 
आपको संबंधित नियामक के ब्योरे सहित एक शिकायत नंबर मिलेगा 
आपकी शिकायत पर आगे की कार्रवाई की जानकारी के लिए संबंधित नियामक से संपर्क करें 
मामले को निपटाने की कोई अधिकतम समय सीमा नहीं है
30 दिनों के बाद आपको वेबसाइट पर रिमाइंडर बटन दिख सकता है। अगर समाधान नहीं हुआ है तो इसे दबाएं 
 
हाल में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने एक ऑनलाइन वेबसाइट- सचेत शुरू की है। इसे शुरू करने का मकसद लोगों द्वारा दी गई सूचनाओं के आधार पर शुरुआत में ही पोंजी योजनाओं पर रोक लगाना है। अगर किसी व्यक्ति को यह लगता है कि कोई कंपनी अवैध रूप से पैसा इक_ïा कर रही है तो वह डब्ल्यू डब्ल्यू डॉट सचेत डॉट आरबीआई डॉट ओआरजी डॉट इन वेबसाइट पर जाकरइसकी जानकारी दे सकता है। लोग इस वेबसाइट का इस्तेमाल उन कंपनियों के बारे में व्यापक सूचनाएं जुटाने के लिए भी कर सकते हैं, जो जमाएं स्वीकार करने के लिए अधिकृत हैं। अगर उनके साथ किसी फर्जी कंपनी ने धोखाधड़ी की है तो वे इस वेबसाइट पर उसकी शिकायत कर सकते हैं। 
 
हालांकि इस वेबसाइट का नियंत्रण आरबीआई के पास होगा, लेकिन वित्तीय क्षेत्र के सभी नियामक और विभिन्न राज्यों की कानून का पालन सुनिश्चित करने वाली एजेंसियां इससे जुड़ेंगी। शार्दूल अमरचंद मंगलदास में पार्टनर सपन गुप्ता कहते हैं, 'अब तक किसी व्यक्ति को किसी पोंजी योजना के बारे में शिकायत करने या अधिकृत कंपनियों की सूचना हासिल करने के लिए सबसे पहले नियामक के अधिकार-क्षेत्र के बारे में जानना पड़ता था। अगर किसी व्यक्ति ने उस नियामक से संपर्क किया, जिसके क्षेत्राधिकार में संबंधित क्षेत्र या अर्थव्यवस्था नहीं आती थी तो वह ज्यादा कुछ नहीं कर सकता था।'
 
सचेत के माध्यम से लोग एक साझा प्लेटफॉर्म पर शिकायत कर सकते हैं और संबंधित नियामक इस शिकायत पर विचार कर सकता है, भले ही व्यक्ति को संबंधित कंपनी के नियामक के बारे में नहीं पता हो। वित्तीय क्षेत्र में लोगों के लिए नियामकीय ढांचे के बारे में जानना और संबंधित प्राधिकरण से संपर्क करना संभव नहीं होता है। अगर कोई कंपनी न तो बैंक है और न ही गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) है, लेकिन जमाएं स्वीकार करती है तो वह कंपनी मामलों के मंत्रालय के क्षेत्राधिकार में आती है। राज्य सरकार साहूकारों का नियमन करती हैं। सामूहिक निवेश योजनाएं भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के दायरे में आती हैं, लेकिन यह फंड 100 करोड़ रुपये से अधिक होना जरूरी है। 
 
सचेत का इस्तेमाल 
 
प्राधिकरण मुख्य रूप से यह चाहते हैं कि निवेशक उन कंपनियों की सूचनाएं साझा करें, जिनके बारे में उन्हें संदेह है कि वे पोंजी योजनाएं चला रही हैं। वे मुखबिर या पीडि़त हो सकते हैं। लोगों को ज्यादा से ज्यादा सूचनाएं साझा करने के लिए प्रोत्साहित करने की खातिर आरबीआई एक मंच बना रहा है, जहां लोग अपनी दिक्कतों के बारे में विचार-विमर्श कर सकते हैं। लोग 'हेल्प योर रेग्युलेटर' के विकल्प के तहत अपनी पहचान उजागर किए बिना सीधे पोंजी योजनाओं की सूचनाएं साझा कर सकते हैं। 
 
अवैध वित्तीय योजनाओं का शिकार बने लोग अपनी जानकारी प्रविष्टï करने के बाद शिकायत दायर कर सकते हैं। वे संबंधित दस्तावेज भी अपलोड कर सकते हैं। शिकायत दायर करने के बाद शिकायतकर्ता को टेक्स्ट मेसेज या ई-मेल के जरिये शिकायत का नंबर और उस नियामक का ब्योरा मिल जाता है, जो उनकी शिकायत को हल करेगा। ऐसी शिकायतों की जांच बहुत जटिल हो सकती है और इसमें कई एजेंसियों को मिलकर जांच करने की जरूरत पड़ सकती है, इसलिए शिकायतों के निपटारे के लिए कोई निश्चित समय नहीं दिया जाता। यह निवेशकों के लिए असुविधाजनक साबित हो सकता है, जिन्हें अनिश्चित समय के लिए इंतजार करना पड़ सकता है। हालांकि सचेत बेवसाइट का संचालन आरबीआई के हाथ में होगा, लेकिन इस नियामक का अन्य प्राधिकरणों पर नियंत्रण नहीं होगा। 
 
सचेत बनाम सेबी का प्लेटफॉर्म 
 
शेयर बाजार नियामक का भी ऐसा ही प्लेटफॉर्म है, जिसे सेबी शिकायत निवारण तंत्र या स्कोर्स कहा जाता है, जो निवेशकों के बीच काफी लोकप्रिय है। सेबी को 2014-15 में 38,442 शिकायतें मिलीं और उसने 35,090 शिकायतों का निस्तारण किया, जबकि 2013-14 में 35,299 शिकायतें आई थीं और 33,350 का निपटारा किया गया। हालांकि यह आवश्यक नहीं है कि सचेत को भी इतनी ही सफलता मिले। खेतान ऐंड कंपनी में सहायक साझेदार मोइन लाढा ने कहा, 'प्रतिभूति बाजार में जानकार निवेशक आते हैं, जिससे स्कोर्स सफल रहा है। लेकिन पोंजी योजनाओं का शिकार बनने वाले लोग अलग वर्ग में आते हैं।' ज्यादातर पोंजी योजनाएं छोटे शहरों में शुरू होती हैं, जहां निवेशक जानकार नहीं होते हैं या कम पढ़े-लिखे होते हैं। 
 
अच्छा लेकिन नहीं पर्याप्त 
 
नियामकों, राज्यों और कानून लागू कराने वाली एजेंसियों द्वारा किया गया पहला प्रयास है, इसलिए हो सकता है कि यह पोंजी योजनाओं को रोकने में पूरी तरह कारगर न रहे। लाढा कहते हैं, 'अनधिकृत वित्तीय उत्पादों से जुड़ी कंपनियों पर लगाम लगाने का सबसे अच्छा तरीका यह है कि एकीकृत नियामकीय व्यवस्था होनी चाहिए, जिसमें धोखाधड़ी के मामलों के त्वरित निपटान के लिए विनियमित जमा योजनाएं एवं जमाकर्ता हित संरक्षण विधेयक 2015 की तरह विशेष राज्य अदालतें होनी चाहिए।'
 
वीरप्पा मोइली की अध्यक्षता वाली इस समिति ने धन इक_ïा करने वाली योजनाओं के लिए एक अलग नियामक की सिफारिश की थी। पोंजी योजनाओं पर समिति ने अपनी जो रिपोर्ट पेश की थी, उसमें उसने पाया था कि ऐसी योजनाएं विभिन्न नियामकों के अधिकार क्षेत्र में आती हैं, जिससे व्यक्ति का शोषण होता है। इन योजनाओं की सफलता की एक बड़ी वजह यह भी है कि एजेंटों को भारी कमीशन दिया जाता है। लाढा कहते हैं, 'लोग बिचौलियों पर विश्वास करते हैं, जो आमतौर पर पीडि़त के परिचित होते हैं। सरकार को एजेंटों को अपने काम के प्रति जिम्मेदार बनाना चाहिए।'
 
Keyword: RBI, ponji, fund,,
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