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एसबीआई विलय: अस्थायी दबाव बढऩे के आसार
हंसिनी कार्तिक /  August 21, 2016

भले ही भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) का उसके सहायक बैंकों के साथ विलय अनुपात पर बाजार ने सकारात्मक प्रतिक्रिया दिखाई है, लेकिन कुछ विश्लेषक इस विलय के समय को लेकर आश्चर्य जता रहे हैं। रेलिगेयर कैपिटल मार्केट की एक ताजा रिपोर्ट में विलय के बाद एसबीआई की परिसंपत्ति गुणवत्ता पर दबाव बढऩे की चेतावनी दी गई है। एसबीआई के कुछ सहायक बैंकों की दबावग्रस्त परिसंपत्ति गुणवत्ता को देखते हुए इस तरह की चिंता जताई गई है। इसी तरह डॉयचे बैंक की रिपोर्ट में निकट भविष्य में परिचालन की लागत में भारी वृद्घि का अनुमान जताया गया है। प्रभुदास लीलाधर के मुख्य कार्याधिकारी एवं मुख्य पोर्टफोलियो प्रबंधक अजय बोडके निवेशकों को विलय के असर का आकलन क्षणिक दबाव के आधार पर नहीं करने की सलाह दे रहे हैं। उनका कहना है कि लेकिन प्रत्येक विलय कर्मचारियों के समेकन से जुड़ी जटिलताओं और खर्च  से जुड़ा होता है। वह कहते हैं, 'विलय की वजह से एक ऐसे बैंक का निर्माण होगा जो उसके निजी क्षेत्र के प्रतिस्पर्धी की तुलना में लगभग पांच गुना बढ़ा होगा। इसे देखते हुए विलय से जुड़ी लागत तर्कसंगत है।'

 
बैंकिंग क्षेत्र में विलय से संबंधित चिंताओं में से एक प्रौद्योगिकी मंच के समेकन की है। सकारात्मक बात यह है कि एसबीआई और उसके सहायक समान प्रौद्योगिकी और प्रणालियों पर काम करते हैं जिसकी वजह से बैंक को समेकन से जुड़ी समस्या का कम सामना करना पड़ेगा। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की रिपोर्ट में कहा गया है कि एसबीआई और उसके सहायक बैंकों के कुल कर्मचारियों की संख्या 280,000 है और लगातार सेवानिवृति और कर्मचारियों के नौकरी छोड़कर जाने की दर में तेजी की वजह से अगले दो-तीन साल में यह घटकर 240,000-250,000 रह जाने का अनुमान है। कर्मचारियों की संख्या कमी आना इसलिए भी संभव दिख रहा है क्योंकि एसबीआई हाल के वर्षों में अपने प्रमुख कर्मचारी आधार में कमी लाने में सफल रहा है। इसी तरह एसबीआई ने अपने मौजूदा नेटवर्क को तर्कसंगत बनाने के लिए अपनी कुछ मौजूदा शाखाओं को बंद करने या कुछ को ऑटोमेटिक टेलर मशीन में तब्दील करने की योजना बनाई है। हालांकि इनसे भारी खर्च भी जुड़ा होगा क्योंकि एसबीआई को पीएफ देयताओं के संदर्भ में 3,000 करोड़ रुपये की रकम खर्च करनी पड़ रही है। 
 
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग ने विलय के बाद के वर्ष में 1500 करोड़ रुपये की लागत बचत का अनुमान जताया है। यह बचत तब संभव होगी जब विलय का लाभ प्राप्त होना शुरू हो जाएगा। इसके परिणामस्वरूप, समेकित बैंक को कोस्ट-टु-इनकम रेशियो में मौजूदा 49.5 फीसदी से 150 आधार अंक की गिरावट का सामना करना पड़ सकता है। खर्च में इस सुधार का असर शेयर मूल्यांकन पर सकारात्मक दिख सकता है। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों की गणना के अनुसार जब इस विलय का लाभ मिलना शुरू हो जाएगा तो मजबूत राजस्व प्रवाह और लागत बचत से उसके मूल्यांकन को मजबूती मिलेगी और पूंजी पर प्रतिफल वित्त वर्ष 2017 के 6.8 फीसदी से सुधरकर वित्त वर्ष 2018 में 10.3 फीसदी हो जाएगा। शेयर अदला-बदली अनुपात की घोषणा के बाद ब्लूमबर्ग के इस शेयर पर नजर रख रहे 8 में से 6 विश्लेषकों ने 278 रुपये के औसत कीमत लक्ष्य के साथ एसबीआई के शेयर पर खरीदारी के सुझाव को बरकरार रखा है।
Keyword: SBI, bank, merge,,
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