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बाजार की निगाह कंपनियों की आय पर
पुनीत वाधवा /  August 14, 2016

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के वर्ष 2016-17 की तीसरी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में दरों में बदलाव न करने और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) विधेयक की राह साफ होने के साथ ही बाजार अब अपना ध्यान कंपनियों की आय में वृद्घि और वैश्विक रुझानों पर केंद्रित कर सकते हैं। फरवरी में केंद्रीय बजट के पेश होने के बाद से निफ्टी-50 सूचकांक लगभग 23 फीसदी चढ़कर 8700 के करीब पहुंच चुका है और इसे सकारात्मक वैश्विक एवं घरेलू कारकों से  मदद मिली है। आरबीआई की मौद्रिक नीति आने के बाद मंगलवार को बाजारों में कमजोरी दिखी और दिन के कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी-50 सूचकांक लगभग 0.5 फीसदी गिर कर 28,000 और 8670 के स्तर पर आ गए। मगर बाद के दिनों में इनमें इजाफा हुआ। 

 
जापान के मिजुहो बैंक के रणनीतिकार (भारत) तीर्थंकर पटनायक ने कहा, अगस्त में नीतिगत दरों में कोई बदलाव नहीं होने का बाजार पर असर काफी हद तक दिख चुका है। किसी को भी यह उम्मीद नहीं थी कि आरबीआई गवर्नर के तौर पर अपनी आखिरी नीतिगत समीक्षा में रघुराम राजन कोई बड़ा बदलाव करेंगे। मुद्रास्फीति के लगभग नियंत्रण में होने से यह उनुमान था कि आरबीआई का रुख उदार रहेगा। हालांकि केंद्रीय बैंक की एकमात्र चिंता खाद्य महंगाई को लेकर बनी हुई थी जिसमें अच्छे मॉनसून के कारण नरमी आने के अनुमान से बाजारों को हाल में राहत मिली है।' विश्लेषकों का कहना है कि बाजारों की आगामी राह आरबीआई की दर कटौती की पहल के बजाय काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि कंपनियों की आय में कैसा और कितना सुधार आता है? इसके अलावा अनुकूल जिंस कीमतों (खासकर तेल) के लिहाज से वैश्विक रुझान भी धारणा को मजबूती देगा।
 
पटनायक ने कहा, 'पूंजी प्रवाह के नजरिये से हालात अब तक भारतीय बाजारों के लिए सकारात्मक बने हुए हैं और हम वैश्विक रूप से कुछ सुधार देख रहे हैं। भारत में बॉन्ड प्रतिफल बेहतर हो रहा है और इस कारण बॉन्ड बाजार आकर्षक बन गया है। दूसरी तरफ रुपया भी काफी हद तक मजबूत है। जहां तक विदेशी पोर्टफोलियो के निवेशकों की बात है तो उनको इससे फायदा होगा कि प्रतिफल में कितना अंतर आ ता है। ऐसी सूरत में मैं डॉलर प्रवाह की गति मजबूत बने रहने की उम्मीद करता हूं। बाजार भी भविष्य में कॉरपोरेट आय पर नजर बनाए रखेंगे। मेरा मानना है कि बाजार में अब से लेकर मार्च 2017 तक 7 से 10 फीसदी की तेजी आएगी।'
 
जून 2016 के लिए उपभोक्ता कीमत मुद्रास्फीति (सीपीआई) 5.8 फीसदी के साथ 22 महीने की ऊंचाई पर रही जो इससे पहले के महीने में दर्ज 5.77 फीसदी की तुलना में कुछ अधिक है। वित्त वर्ष 2017 के पहले तीन महीनों के लिए औसत मुद्रास्फीति अब 5.7 फीसदी पर है जो वित्त वर्ष 2016 के पहले तीन महीनों के 5.1 फीसदी से अधिक है। इक्विनोमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जी चोक्कालिंगम ने कहा, 'हमें विश्वास है कि नई मौद्रिक व्यवस्था के तहत इस साल कम से कम एक बार ब्याज दरों में कटौती की जा सकती है। हालांकि किसी बड़ी कटौती की गुंजाइश सीमित है क्योंकि धातु, तेल, संसाधनों  और कुछ फसलों की कीमतें भी चढऩी शुरू हो गई हैं। मगर अच्छे मॉनसून से यह सुनिश्चित होगा कि खाने-पीने की चीजों से जुड़ी महंगाई नियंत्रित बनी रहेगी। बाजारों को मजबूती भविष्य में दर कटौती के बजाय कॉरपोरेट आय में संभावित सुधार से मिलेगी।' 
Keyword: RBI, raghuram rajan, repo rate,,
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