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करें जतन ताकि दावे पर न लगे ग्रहण
संजय कुमार सिंह /  August 07, 2016

झारखंड के गोड्डा की 44 साल की किरण गोदिया को अप्रैल 2015 में पित्ताशय की पथरी निकलवाने के लिए ऑपरेशन करना पड़ा। बीमा कंपनी ने ऑपरेशन में लगे 55,000 रुपये तो उन्हें दे दिए, लेकिन जांच पर खर्च हुए 10,500 रुपये नहीं दिए। इसकी वजह उन्हें न तो बीमा कंपनी ने बताई और न ही थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (टीपीए) ने। इसी तरह 65 साल के अजय रंजन मुखर्जी को रक्त प्रवाह में रुकावट की आशंका से अस्पताल में भर्ती कराया गया। वह हफ्ते भर  वहां रहे, लेकिन कोई दिक्कत पता नहीं चली। अस्पताल ने उन्हें करीब 55,000 रुपये का बिल थमा दिया। लेकिन बीमा कंपनी ने दावा खारिज कर दिया। इसकी वजह यह थी कि एक जूनियर डॉक्टर ने उनकी केस हिस्ट्री में लिख दिया कि उन्हें पहले से ब्लड शुगर  है। उनके बेटे पार्थ कहते हैं, 'पहले और बाद की किसी भी जांच मेंं यह बात सामने नहीं आई थी।' पार्थ ने कुछ समय तक मुकदमा भी लड़ा लेकिन तबादला होने पर उन्हें मुकदमा छोडऩा पड़ा। मेडिक्लेम रद्द होने पर बहुत खीझ होती है। लेकिन दावा खारिज न हो इसका ध्यान आप ही रखें।

 
क्या नहीं है कवर
 
सभी संभावित ग्राहकों को पॉलिसी दस्तावेज पढऩा चाहिए और यह पता करना चाहिए कि यह कैसे काम करता है। 
 
90 दिन की दिक्कत 
 
बहुत सी पॉलिसी में शुरुआती 30 से 90 दिन का कूलिंग पीरियड होता है, जिसमें किसी भी बीमारी का दावा स्वीकार नहीं किया जाता। केवल दुर्घटना का दावा स्वीकार किया जाता है। 
 
क्या नहीं है शामिल 
 
बीमारियों की एक सूची को एक्सक्लूजन कहा जाता है, जिन्हें दो साल तक आपकी पॉलिसी में कवर नहीं किया जाता है। इनमें टॉन्सिल को हटाना, पित्त की थैली की पथरी आदि शामिल हैं। जिन शारीरिक दिक्कतों के तुरंत इलाज की जरूरत नहीं होती है, उन्हें एक्सक्लूजन में शामिल किया जाता है, ताकि पॉलिसी का दुरुपयोग रोका जा सके। 
 
पुरानी बीमारियां 
 
अगर कोई व्यक्ति यह घोषणा करता है कि वह उसे पहले से कुछ बीमारियां (पीईडी) हैं या इनका पता स्वास्थ्य जांच में चलता है तो उन बीमाारियों को एक निश्चित समय तक कवर नहीं किया जाएगा। एसबीआई जनरल इंश्योरेंस के प्रमुख (उत्पाद विकास) पुनीत साहनी कहते हैं, 'मेडिक्लेम उन बीमारियों को कवर करता है जो आपको पॉलिसी लेने के बाद होती हैं, उन बीमारियों को नहीं जो आपको पहले से हैं।' आपको जो बीमारियां या दिक्कतें पहले से हैं, उन्हें 2 से 4 साल तक कवर नहीं किए जाने के आसार होते हैं। स्टार हेल्थ इंश्योरेंस के वरिष्ठ कार्यकारी निदेशक एस प्रकाश कहते हैं, 'जब यह अवधि समाप्त हो जाती है तो पुरानी बीमारियों को पूरी तरह कवर कर लिया जाता है।' 
 
उप-सीमाएं 
 
हो सकता है कि कुछ बीमा कंपनियां कम प्रीमियम पर अपनी पॉलिसी बेच देती हों, लेकिन उनमें उप-सीमाएं होती हैं। कुछ निश्चित शुल्क जैसे कमरे का किराया या आईसीयू की प्रतिपूर्ति के लिए अधिकतम सीमा तय कर दी जाती है जैसे बीमित राशि की 1 या 2 फीसदी। इन पॉलिसी में यह प्रावधान होता है कि अमुक बीमारी में क्षतिपूर्ति की अधिकतम सीमा इतनी होगी। यह बात याद रखें कि सभी अस्पतालों का खर्च कमरों की श्रेणी से जुड़ा होता है, जिन्हें आप किराये पर लेते हैं। माना कि आपकी पॉलिसी में कमरे के किराये की अधिकतम सीमा बीमित राशि की 1 फीसदी है। आपकी बीमित राशि 5 लाख रुपये है, इसलिए कमरे के किराये की उप-सीमा 5,000 रुपये होती है। जब आप अस्पताल में भर्ती होते हैं और दो लोगों द्वारा साझा किए जाने वाले कमरे का विकल्प चुनते हैं तो अस्पताल आपसे पूरे खर्च में 50,000 रुपये वसूल सकता है। लेकिन अगर आप 7,000 रुपये किराये वाला सिंगल रूम चुनते हैं तो उसी इलाज में आपका पूरा खर्च 75,000 रुपये आ सकता है। उस स्थिति में आपको अपनी जेब से शेष 25,000 रुपये देने पड़ेंगे। ऐसी पॉलिसी न लें, जिनमें बीमित राशि अधिक है, लेकिन कमरे का किराया कम। 
 
सह-भुगतान खंड 
 
वरिष्ठ नागरिकों की पॉलिसी में यह खंड होता है। जब बिल बनता है तो आपको कुछ रकम खुद देनी होती है। बाकी बीमा कंपनी देती है। अगर बीमा पॉलिसी छोटे शहर में खरीदी जाती है और आप अपना इलाज महानगर में कराते हैं तो बीमा कंपनी लागत के एक हिस्से की ही भरपाई कर सकती है। 
 
महंगे उत्पाद
 
पॉलिसी खरीदते समय बीमा कंपनी से यह साफ-साफ पूछ लें कि स्टेंट (आयातित स्टेंट 1 लाख रुपये से महंगा हो सकता है) जैसे महंगे उत्पाद कवर होंगे या नहीं। निजी स्वास्थ्य बीमा कंपनियां ज्यादा महंगी पॉलिसी में इसे कवर करते हैं, लेकिन कुछ कंपनियां इसे छोड़ भी सकती हैं। प्रकाश कहते हैं, 'अगर इलाज में इसकी जरूरत होगी तो उसे कवर किया जाएगा।'
 
आप क्या करें? 
 
जल्दी खरीदें: पॉलिसी जितनी जल्दी खरीदेंगे, उतनी बेहतर स्थिति में रहेंगे। वेंटेज इंश्योरेंस ब्रोकर्स के मुख्य कार्याधिकारी अरविंद लड्ढा कहते हैं, 'युवावस्था आपको कोई बीमारी नहीं होने के आसार होते हैं, इसलिए आपको कुछ रोग कवर होने का इंतजार नहीं करना होगा।'
 
पूरी घोषणा करें 
 
मेडिक्लेम प्रस्ताव फॉर्म में सवाल पूछे जाते हैं जैसे क्या आपको पहले से कुछ बीमारियां हैं? क्या आपके परिवार में किसी को बीमारियां हुई हैं? इन सवालों का ईमानदारीपूर्वक जवाब दें। बहुत से लोग सोचते हैं कि पुरानी बीमारियां नहीं बताने से वे बच जाएंगे। जब मरीज डॉक्टर के पास जाते हैं तो वे स्वास्थ्य की पूरी जानकारी दे देते हैं। बीमा कंपनियों की अस्पतालों के रिकॉर्ड तक पहुंच होती है। साहनी कहते हैं, 'अगर आपकी सेहत के अब तक के रिकॉर्ड से पता चलता है कि आपने पहले से मौजूद बीमारी के बारे में नहीं बताया था तो आपका दावा रद्द हो सकता है।' लड्ढा कहते हैं, 'विवाद की स्थिति में संदर्भ के रूप में इस्तेमाल के लिए प्रस्ताव फॉर्म की एक प्रति रखें।'
 
स्वास्थ्य जांच न टालें 
 
आमतौर पर बीमा कंपनियां 45 साल की उम्र तक स्वास्थ्य जांच के लिए नहीं कहती हैं। अगर आपको पहले से कोई दिक्कत है तो जांच जरूरी हो जाती है। अगर आप जांच नहीं कराते हैं और यह पता चलता है कि आपको पहले से दिक्कत थी तो आपका दावा रद्द हो सकता है। 
 
कानूनी मदद 
 
अगर बीमा कंपनी आपके पत्रों और ई-मेल की तरफ ध्यान नहीं दे रही है तो वकील से संपर्क कर उसे कानूनी नोटिस भेजें। दिल्ली उच्च न्यायालय के वकील शिवेंद्र सिंह कहते हैं, 'बीमा कंपनी के साथ सौदेबाजी करना या आपके दावे को घटाना गलती होगी।' उन्होंने सलाह दी कि तुरंत मामले की सुनवाई और हर्जाना लेने के लिए उपभोक्ता अदालत से संपर्क करें।
Keyword: insurance, policy, book,,
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