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विकलांगता से जूझने के लिए दुर्घटना बीमा का चयन
संजय कुमार सिंह /  July 17, 2016

भूतल परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में सड़क हादसों में बड़ी तेजी आई है। 2015 में इनकी संख्या 5.01 लाख तक पहुंच गई, जो साल भर पहले के मुकाबले 2.5 फीसदी अधिक थी। हादसों में होने वाली मौतों की संख्या भी 4.6 फीसदी बढ़कर 1.5 लाख हो गई। देश की राजधानी दिल्ली में सबसे ज्यादा 1622 लोग सड़क हादसों के शिकार रहे और सबसे ज्यादा 23,468 हादसे मुंबई में हुए। स्पष्टï है कि दुर्घटना से होने वाली मौतों और विकलांगता का जोखिम हर साल बढ़ रहा है और इसे देखते हुए जरूरी है कि हम पर्याप्त सुरक्षा कवर लें।

 
युवाओं के लिए पहला बीमा
 
आम तौर पर माना जाता है कि टर्म पॉलिसी और चिकित्सा बीमा दुर्घटना (मौत और उपचार) के मामले में जरूरतों को पूरा करेगा। लेकिन दोनों के बीच में एक और बात आती है और वह है दुर्घटना के कारण विकलांगता। इसमें व्यक्तिगत बीमा अहम भूमिका निभाता है। यदि बीमित व्यक्ति की किसी दुर्घटना में मौत हो जाती है तो इसके तहत भुगतान किया जाता है। यदि बीमित व्यक्ति ऐसी स्थायी या अस्थायी विकलांगता का शिकार होता है जिससे उसकी आय को नुकसान पहुंचता हो तो उस स्थिति में भी बीमा कंपनी भुगतान करती है। दरअसल कुछ अरसा पहले ही नौकरी शुरू करने वाले और बगैर आश्रितों वाले लोगों के लिए व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा की खरीदारी अहम है क्योंकि जीवन बीमा उनके परिजनों के लिए कुछ हद तक उचित है, जो बीमित रकम प्राप्त होने की तुलना में परिवार के सदस्य के खोने पर अधिक शोक संतप्त होंगे। बजाज आलियांज जनरल इंश्योरेंस की हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन टीम के प्रमुख अभिजित घोष कहते हैं, 'व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा तब उपयोगी है जब आप विकलांग हो जाते हैं और काम करने लायक नहीं रह जाते हैं।'ये टर्म पॉलिसी की तुलना में सस्ते भी हैं। वैंटेज इंश्योरेंस ब्रोकर्स के मुख्य कार्याधिकारी अरविंद लड्ढïा कहते हैं, 'जिन युवाओं के पास टर्म इंश्योरेंस नहीं है, उन्हें कम से कम व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा जरूर लेना चाहिए। इसके अलावा यदि व्यक्ति युवा हो तो प्राकृतिक कारणों के बजाय दुर्घटना से मौत की आशंका अधिक रहती है।'
 
आश्रितों वाले लोगों के लिए महत्त्वपूर्ण
 
जिन लोगों की उम्र कुछ अधिक है और जिनका परिवार उन्हीं पर आश्रित है, उन्हें भी यह बीमा लेना चाहिए। उन्हें यह भी देखने की जरूरत है कि क्या उनके पास ऋण चुकाने, परिवार की लाइफस्टाइल जरूरतों को पूरा करने और भविष्य की वित्तीय जरूरतों (बच्चों की शिक्षा और शादी आदि) को पूरा करने के लिए पर्याप्त बीमा (टर्म पॉलिसी) है या नहीं। हालांकि टर्म कवर के लिए सालाना आय के 10 गुना को पर्याप्त समझा जाता है, लेकिन व्यक्गित दुर्घटना बीमा के मामले में यह मासिक वेतन (साथ ही ऋण, यदि कोई हो) का100 गुना होना चाहिए। नि:संदेह यह पॉलिसी मौत के जोखिम (दुर्घटना द्वारा) को आंशिक रूप से ही कवर करेगी, लेकिन यह विकल्प कम महंगा है और वे लोग इसका इस्तेमाल कर सकते हैं, जो अधिक टर्म इंश्योरेंस नहीं खरीद सकते। इसके अलावा इस पॉलिसी को अलग-थलग और पूर्ण पॉलिसी के तौर पर ही खरीदें, राइडर के रूप में नहीं। लड्ढïा हैं, 'स्टैंडअलोन पॉलिसी राइडर के मुकाबले सस्ती होती है। इसके अलावा राइडरों में अक्सर विकलांगता बीमा भी नहीं होता।'
 
परिवार के सदस्यों को जोड़ें
 
आय कमाने वाले सदस्य के साथ साथ अन्य महत्त्वपूर्ण सदस्यों को भी शामिल करें। आइडील इंश्योरेंस ब्रोकर्स के मुख्य परिचालन अधिकारी राहुल मोहता ने कहा, 'जीवनसाथी के लिए कवर की खरीदारी अच्छा विचार है क्योंकि उसे कई जोखिमों से जूझना पड़ता है।' बीमा कंपनियां सामान्य तौर पर गृहिणी के लिए पति की बीमित रकम का 50 फीसदी तक कवर मुहैया कराती हैं। एचडीएफसी एर्गो जनरल इंश्योरेंस में नियुक्त मुंशी अनुराग रस्तोगी कहते हैं, 'यदि पत्नी भी कमाती है तो उनके लिए बड़ा कवर खरीदें और पति की बीमित रकम के सिर्फ 50 फीसदी पर निर्भर न रखें।'बच्चों को भी परिवार के मुखिया की बीमित रकम का 10-25 फीसदी कवर मुहैया कराया जा सकता है।
 
ये विशेषताएं जरूरी
 
आपकी व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा पॉलिसी में चार जरूरी कवर होने चाहिए- डेथ बेनीफिट, पर्मानेंट टोटल डिसेबिलिटी, पर्मानेंट पाॢशयल डिसेबिलिटी और टेम्पररी डिसेबिलिटी। स्थायी विकलांगता के मामले में, बीमित रकम का 100 प्रतिशत हिस्सा चुकाया जाता है। आंशिक रूप से स्थायी विकलांगता के लिए गंभीरता के आधार पर भुगतान 10 से 40 फीसदी किया जाएगा। टेम्पररी टोटल डिसेबिलिटी ऐसा राइडर है जिसमें व्यक्ति को हड्डïी टूटने पर कुछ हफ्ते तक बिस्तर पर ही रहना पड़ता है। इसलिए उसे लंबे समय तक बिस्तर पर आराम करने की सलाह दी जाती है। इस कवर को वीकली इंडेमिटी कवर भी कहा जाता है और प्रति सप्ताह बीमित रकम का एक फीसदी चुकाया जाएगा। रस्तोगी कहते हैं, 'मौत के मामले कम आते हैं, जबकि दुर्घटना के दौरान स्थायी विकलांगता अधिक आम बात है। कई कंपनियां स्थायी विकलांगता के लिए 1,000-5,000 रुपये प्रति दिन का भुगतान करती हैं।'
 
इन बातों पर भी दें ध्यान
 
लापरवाही, खराब तरह से गाड़ी चलाने या नशे में गाड़ी चलाने की वजह से होने वाले सड़क हादसों को कवर में शामिल नहीं किया जाता है। मोहता कहते हैं कि बगैर दुर्घटना के चिकित्सीय समस्या, पुरानी विकलांगता और स्वयं जान-बूझकर घायल होने जैसी परिस्थितियों को भी कवर मुहैया नहीं कराया जाएगा। कई पॉलिसी में एडवेंचर स्पोट्ïर्स को भी शामिल नहीं किया गया है, हालांकि बजाज आलियांज ने हाल में इसकी पेशकश की है। लड्ढïा कहते हैं, 'कवर में शामिल स्पोट्ïर्स की संख्या पर विचार करें और कवर से जुड़ी चेतावनियों और शर्तों को अच्छी तरह से समझ लें। एडवेंचर स्पोट्ïर्स को तभी शामिल किया जा सकेगा जब आप उचित मार्गदर्शन और प्रख्यात एजेंसी के मार्गदर्शन में इसे करें।' यदि किसी खास विकलांगता के बारे में पॉलिसी के दस्तावेजों में जिक्र नहीं किया गया है तो यह विवाद का विषय हो सकता है। उस स्थिति में विकलांगता की गंभीरता जानने के लिए डॉक्टर की राय ली जाती है। 
Keyword: road, accident, insurance,,
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