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म्युचुअल फंडों में सीधे निवेश के आसान रास्ते
संजय कुमार सिंह /  July 10, 2016

तमाम म्युचुअल फंडों के डायरेक्ट प्लान जनवरी 2013 में पेश किए गए थे और अब उन्हें करीब साढ़े तीन साल हो चुके हैं। हालांकि विश्वस्त निवेशकों, ज्यादातर कंपनियों को ये सेवाएं प्राप्त हो रही हैं, लेकिन खुदरा निवेशकों ने इनमें मुस्तैदी अभी तक नहीं दिखाई है। बहरहाल डायरेक्ट प्लान के मामले में खर्च का अनुपात सामान्य योजना के मुकाबले कम है। यह अंतर फंड टाइप के आधार पर 60 से 150 आधार अंक के दायरे में हो सकता है। हालांकि हर साल जमा रकम छोटी लग सकती है, लेकिन पूरी उम्र के लिहाज से यह बड़ा अंतर हो सकता है। उद्योग सूत्रों का कहना है कि प्रति वर्ष खर्च अनुपात में 100 आधार अंक यानी 1 फीसदी की औसत बचत के साथ व्यक्ति सेवानिवृति कोष में लगभग 25 फीसदी का इजाफा दर्ज कर सकता है। 

 
इसमें आश्चर्य नहीं है कि बाजार नियामक सेबी इनको खासी तेजी के साथ बढ़ावा दे रहा है। सेबी ने फंड हाउसों से निवेशक (वितरक के जरिये जुडऩे वाले) से वसूले जाने वाले खर्च का छमाही आंकड़ा देने को कहा है जिसमें खर्च के तरीके और डायरेक्ट योजनाओं की लागत आदि शामिल हैं। हालांकि जागरूकता के अभाव की वजह से खुदरा निवेशकों ने डायरेक्ट प्लान पर ध्यान नहीं दिया है। आदर्श तौर पर यदि खुदरा निवेशक डायरेक्ट प्लान को फंड चयन और पोर्टफोलियो प्रबंधन पर गुणवत्तायुक्त सलाह के साथ जोड़ सकते हैं तो यह उनके लिए फायदेमंद स्थिति होगी। यहां डायरेक्ट प्लान में निवेश के लिए विभिन्न विकल्पों के फायदों और नुकसान पर प्रकाश डाला जा रहा है।
 
एएमसी वेबसाइट
 
यदि आपको यह बात अच्छी तरह पता है कि किस फंड का चयन किया जाए तो अपना केवाईसी हासिल करें और उस ऐसेट मैनेजमेंट कंपनी (एएमसी) के साथ अपना अकाउंट खोलें जिसके साथ निवेश करना चाहते हैं। फंड हाउस के साथ सीधे तौर पर निवेश कर, आप ब्रोकरों और वितरकों से बच सकते हैं। इससे आप न सिर्फ उन्हें कमीशन देने से बच सकते हैं बल्कि आप उनके द्वारा गलत जानकारी देकर बिक्री किए जाने की आशंका को भी दूर कर सकते हैं। 
 
इस रूट को अपनाने पर समस्या यह है कि समय के साथ, निवेश से संबंधित फंड हाउसों की संख्या बढ़ जाती है जिससे प्रक्रिया जटिल हो जाती है। यदि आप पांच फंड हाउसों में निवेश कर रहे हैं जो आपको पांच खाते खोलने होंगे और पांच लॉगिन आईडी और पासवर्ड याद रखने होंगे। आपके पोर्टफोलियो के प्रदर्शन का समेकित नजरिया उपलब्ध नहीं होगा। आपको अन्य वेबसाइट पर पोर्टफोलियो ट्रैकर टूल में अपने सभी लेनदेन के बारे में जानकारी डालनी होगी जिसमें समय लगेगा। यदि आप साल के दौरान कुछ बिकवाली कर बाहर निकलते हैं तो आपको अपनी अल्पावधि पूंजीगत लाभ देयता की गणना करनी होगी या टैक्स रिटर्न फाइल करते वक्त ऐसा करने के लिए एक चार्टर्ड अकाउंटेंट की सेवा लेने की जरूरत होगी। यदि आपका निवेश 25-30 लाख रुपये को पार कर जाता है तो यह सब करना जटिल हो सकता है।
 

एमएफ यूटीलिटीज इंडिया

एमएफ यूटीलिटीज म्युचुअल फंड उद्योग की एक पहल है। खुदरा निवेशकों को उसकी वेबसाइटों पर जाने और कॉमन अकाउंट नंबर (सीएएन) पंजीकरण फॉर्म भरने की जरूरत होगी। जब यह संख्या आवंटित हो जाती है, आप इस विकल्प के जरिये म्युचुअल फंडों के डायरेक्ट प्लांस में निवेश कर सकते हैं। मौजूदा समय में आप एमएफ यूटीलिटीज के जरिये 25 एएमसी में निवेश कर सकते हैं। इस एग्रीगेटर सेवा के जरिये निवेश करने का फायदा यह है कि निवेशक विभिन्न फंड हाउसों के साथ सौदेबाजी के झंझट से बच सकता है। एमएफ यूटीलिटीज इंडिया के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी वी रमेश कहते हैं, 'एक फॉर्म भरकर और एक चेक सौंपकर निवेशक विभिन्न फंड हाउसों के फंडों में निवेश कर सकता है। उसे यह भी संकेत मिलता है कि विभिन्न फंड हाउसों में कितनी रकम आवंटित की जानी चाहिए।' निवेशकों को इस सेवा का इस्तेमाल करने के लिए कोई अतिरिक्त खर्च करने की जरूरत नहीं होगी। हालांकि याद रखें कि एमएफ यूटीलिटीज न सिर्फ रिटेल-केंद्रित पहल है। 

 
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म
 
शुरू में म्युचुअल फंड निवेश प्लेटफॉर्म मूल रूप से आपको ऑनलाइन निवेश की सुविधा देते थे। वे आपको म्युचुअल फंडों के रेग्युलर प्लान में निवेश की अनुमति देते और ऑफलाइन ब्रोकर की तरह समान कमीशन हासिल करते। हाल में ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों की श्रेणी उभरी है जैसे इन्वेज्टा, ओरो वेल्थ आदि जो आपको डायरेक्ट प्लान में निवेश की अनुमति देते हैं। ऐसे प्लेटफॉर्म के साथ निवेश कर आप ब्रोकर का कमीशन चुकाने से बचते हैं। इसके अलावा आप हितों के टकराव से भी बच सकते हैं जो कमीशन-आधारित एजेंटों और वितरकों से संबद्घ होते हैं। ऑरो वेल्थ की सह-संस्थापक स्वाति अग्रवाल कहती हैं, 'जब कोई कमीशन के जरिये रकम कमा रहा होगा तो वह आपसे हमेशा निवेश कराते रहना चाहेगा। वह आपको इक्विटी फंडों में निवेश बनाए रखने के लिए भी प्रेरित करता है जिनमें उसे डेट या लिक्विड फंडों के मुकाबले अच्छा कमीशन प्राप्त होता है।'
 
इसके अलावा ये कंपनियां रोबो एडवाइजरी सेवाएं भी मुहैया कराती हैं। इन्वेज्टा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शरद सिंह कहते हैं, 'हमारे एनालिटिक्स टूल प्रमुख फंड एवं संपत्ति प्रबंधकों और वैश्विक संस्थागत निवेशकों द्वारा विश्लेषण और निवेश के लिए फंडों का चयन करने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। इन्वेज्टा रोबो एडवाइजरी समान विश्लेषण द्वारा समर्थित है और यह खुदरा निवेशकों के लिए उपलब्ध है।' ये कंपनियां लक्ष्य-आधारित परिसंपत्ति आवंटन पर जोर देती हैं जिससे आपके पोर्टफोलियो को पुन: संतुलित बनाने और इक्विटी के लिए आपका आवंटन घटाने में मदद करती हैं। किसी फंड से निकलने पर आपको कर देयता और एक्जिट लोड जैसे पहलुओं के बारे में अवगत कराया जाता है। इसके अलावा वे पोर्टफोलियो ट्रैकिंग और प्रदर्शन रिपोर्ट जैसे टूल भी उपलब्ध कराती हैं।
 
इन्वेज्टा उन लोगों से हर महीने 79 रुपये का शुल्क वसूलती है जो सिर्फ लेनदेन करना चाहते हैं और उन लोगों से 109 रुपये का शुल्क लिया जाता है जो लेनदेन के साथ ही सलाह हासिल करने का फायदा भी उठाना चाहते हैं। ऑरो वेल्थ 1 लाख रुपये से अधिक निवेश पर 0.1 फीसदी का शुल्क वसूलती है। इस स्तर से नीचे कंपनी 50 रुपये प्रति लेनदेन वसूलती है। एसआईपी के लिए यह 200 रुपये प्रति वर्ष वसूलती है। इसकी सलाहकार सेवाएं 1,000 रुपये प्रति वर्ष के शुल्क पर उपलब्ध हैं। इन प्लेटफॉर्मों द्वारा उपलब्ध कराई जाने वाली परामर्श सेवा हालांकि विशेष रूप से विकसित नहीं है, लेकिन यह डेटा विश्लेषण और वित्तीय सिद्घांतों पर आधारित होती है। ऐसे प्लेटफॉर्म खासकर समृद्घ लोगों के लिए अच्छे साबित हो सकते हैं। हालांकि अभी ये शुरुआती चरण में हैं। 
 
निवेश परामर्शदाता
 
बाजार नियामक द्वारा डायरेक्ट प्लान पर फीड्ïस (जिसमें सभी बैक-ऑफिस जानकारी शामिल) सेबी पंजीकृत निवेश सलाहकारों (आरआईए) के लिए उपलब्ध कराए जाने से ये सलाहकार अब ग्राहकों की ओर से इन डायरेक्ट योजनाओं में निवेश कर सकते हैं। नई पीढ़ी के ऑनलाइन प्लेटफॉर्मों की तरह आरआईए भी ग्राहक द्वारा दी जाने वाली फीस से कमाई करते हैं और उत्पाद कमीशन पर निर्भर नहीं रहते हैं। इस समय में कुछ आरआईए जिस मॉडल पर अमल करते हैं वह है कस्टोडियन सेवा प्रदाता (जिसमें 17 मौजूदा समय में सेबी के साथ पंजीकृत हैं) के जरिये अपने ग्राहक की रकम का निवेश करना। आरआईए सलाह मुहैया कराता है जबकि कस्टोडियन सेवा प्रदाता सभी बैक-एंड कार्य का प्रबंधन करता है जैसे रकम का निवेश करना, ग्राहक को समय समय पर रिपोर्ट (उनके निवेश के प्रदर्शन, कर देनदारी आदि के बारे में) मुहैया कराना।  आरआईए मॉडल उन अमीर निवेशकों (एचएनआई) के लिए अधिक उपयुक्त हैं जो उनके निवेश, खासकर संकट के समय में, का प्रबंधन करने वाले लोगों से बातचीत करने में सक्षम होना चाहते हैं। आरआईए के साथ आप व्यक्तिगत सलाह भी ले सकते हैं। गुडग़ांव की आरआई अंकुर कपूर एडवाइजरी के अंकुर कपूर कहते हैं, 'किसी ग्राहक के लिए साल में एक बार छुट्टïी पर बाहर जाना अहम हो सकता है तो दूसरे ग्राहक को गैजेट पर रकम खर्च करना पसंद आ सकता है। इन जरूरतों को पूरा करना तभी संभव है जब परामर्शदाता ग्राहक से बातचीत करे।' 
Keyword: share, market, sensex, mutual fund,,
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