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सरकारी बैंकों में निवेश के लिए यही है सही वक्त?
हंसिनी कार्तिक /  July 03, 2016

भले ही परिसंपत्ति गुणवत्ता, खराब ऋण वृद्घि और कमजोर प्रतिफल अनुपात को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं, लेकिन सस्ते मूल्यांकन, मजबूत परिचालन मुनाफे और संस्थागत स्वामित्व ऐसे बिंदु हैं जिन पर निवेशकों को विचार करने की जरूरत है। इस पृष्ठïभूमि में, विश्लेषकों के एक वर्ग का मानना है कि फिलहाल चुनिंदा सरकारी बैंकों के शेयर खरीदने के लिहाज से खराब समय नहीं है। इसके कई कारण हैं जो इस तर्क को समर्थन देते हैं। 

 
उदाहरण के लिए पीएनबी ने 30,000 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां वॉच लिस्ट के तहत रखी हैं। बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) की 15,000 करोड़ रुपये की वॉच लिस्ट है जबकि एसबीआई ने वॉच लिस्ट के तहत 31,000 करोड़ रुपये की परिसंपत्तियां सुनिश्चित की हैं। हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ये आंकड़े सिर्फ संकेतक हैं, अन्य बैंक भी हैं जो अलग सोच रखते हैं। नोमुरा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, 'बैंकों की दबावग्रस्त परिसंपत्तियों ने हमें यह संकेत दिया है कि हम खासकर पीएसबी के लिए, गैर-निष्पादित आस्तियों (एनपीए) में चरम सीमा के नजदीक हैं, क्योंकि दबाव वाले क्षेत्रों में उनका 30-50 फीसदी निवेश या तो एनपीए करार दिया जा चुका है या इसे पुनर्गठित किया जा चुका है।'
 
अन्य कारक है इन बैंकों का हाल के वर्षों में तैयार हुआ मजबूत जमा आधार या कस्टमर फ्रेंचाइजी, जिस पर बाजार ने अधिक ध्यान नहीं दिया है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि एसबीआई को छोड़कर शीर्ष पांच पीएसबी का 19,89,291 करोड़ रुपये का जमा आधार है जबकि शीर्ष पांच निजी बैंकों के लिए यह 15,24,097 करोड़ रुपये है। इसके अलावा रिपोर्टों से पता चलता है कि लोकप्रिय धारणा के विपरीत, बड़े पीएसबी का मोबाइल बैंकिंग लेनदेन निजी क्षेत्र के बैंकों के मुकाबले अधिक है। ये कारकों के अनुकूल रहने से पीएसबी ने कृषि उधारी, छोटे एवं मझोले उद्यमों के लिए ऋण, आवास ऋण और पर्सनल ऋणके लिए अपनी उधारी गतिविधियों को व्यापक बनाया है और वित्त वर्ष 2017 में 8-10 फीसदी की ऋण वृद्घि का अनुमान उचित दिख रहा है। हालांकि ये लक्ष्य निजी बैंकों (वित्त वर्ष 2017 में 20-22 फीसदी) के लक्ष्यों के समान हैं, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि इन लक्ष्यों को हासिल करने से पीएसबी को वित्त वर्ष 2017 में पुन: विकास की पटरी पर लौटने में मदद मिलेगी। हालांकि कई जोखिमों की वजह से निवेशकों को सतर्कता बरतने की भी जरूरत है। विश्लेषकों का कहना है कि निवेशकों को अपना ध्यान शीर्ष पांच पीएसबी- एसबीआई, बीओबी, यूनियन बैंक और केनरा बैंक तक सीमित रखने की जरूरत होगी क्योंकि पूंजी पर्याप्तता अनुपात (पीएनबी को छोड़कर) वित्त वर्ष 2017 के वृद्घि लक्ष्यों को पूरा करने के लिहाज से उचित स्तर पर है। 
Keyword: bank, invest, fund,,
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